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Bhagwanभगवान

हर देवता का पूर्ण पन्ना, परिचय, मूल मंत्र, पूजा विधि, व्रत, कथा और आरती के लिंक। अपने इष्ट देव का द्वार खोलें।

हनुमान जी, हनुमान जीॐ हं हनुमते नमः

हनुमान जी

हनुमान जी माता अंजना और वानरराज केसरी के पुत्र हैं। उन्हें पवनपुत्र इसलिए कहा जाता है कि मान्यता के अनुसार वायु देव का उनके जन्म में विशेष योगदान था। वे श्री राम के परम भक्त हैं और रामायण में उनकी भूमिका सीता जी की खोज, लंका दहन और संजीवनी लाने जैसे प्रसंगों में सबसे प्रसिद्ध है। हनुमान जयंती कई जगह चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में तिथि अलग है।

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श्री राम, श्री रामश्री राम जय राम जय जय राम

श्री राम

वाल्मीकि रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। ऋषियों की सलाह पर उन्होंने पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया। यज्ञ से प्राप्त खीर तीनों रानियों में बांटी गई। चैत्र शुक्ल नवमी को कौशल्या के गर्भ से राम का जन्म हुआ। कैकेयी से भरत और सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए। इसी तिथि को आज राम नवमी के रूप में मनाया जाता है।

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बांके बिहारी जी, बांके बिहारी जीहरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे

बांके बिहारी जी

बांके का अर्थ है टेढ़ा या मुड़ा हुआ। यहां ठाकुर जी की मूर्ति त्रिभंग मुद्रा में है, यानी तीन जगह से झुकी हुई, गर्दन, कमर और घुटने। बिहारी का मतलब है विहार करने वाला या लीला करने वाला। इस तरह नाम का भाव हुआ, तीन जगह से मुड़कर खड़े लीलाधारी कृष्ण।

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महालक्ष्मी, महालक्ष्मीॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

महालक्ष्मी

लक्ष्मी जी को कमल पर विराजमान दिखाया जाता है। चार हाथ हैं, जिन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से जोड़ा जाता है। दोनों ओर से हाथी उन पर जल अर्पित करते दिखते हैं, इसलिए उनका एक नाम गजलक्ष्मी भी है। कमल का अर्थ है कीचड़ में रहकर भी निर्मल रहना। लक्ष्मी जी विष्णु की पत्नी हैं और समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं।

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मां काली, मां कालीॐ क्रीं कालिकायै नमः

मां काली

देवी महात्म्य के अनुसार रक्तबीज नाम के असुर को वरदान था कि उसके रक्त की हर बूंद जमीन पर गिरते ही एक नया रक्तबीज बना देगी। देवी जितना उसे मारतीं, उतने ही नए असुर खड़े हो जाते। तब देवी दुर्गा के क्रोध से काली प्रकट हुईं। उन्होंने रक्तबीज के शरीर से बहता हर रक्त अपने मुख में ले लिया, ताकि एक भी बूंद धरती पर न गिरे। इस तरह उसका अंत हुआ।

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सूर्य देव, सूर्य देवॐ घृणिः सूर्याय नमः

सूर्य देव

वैदिक परंपरा में सूर्य एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें प्रत्यक्ष देखा जा सकता है, इसलिए उन्हें प्रत्यक्ष देव कहा जाता है। उनके रथ में सात घोड़े जुते हैं, जिन्हें सप्ताह के सात दिन या प्रकाश के सात रंगों से जोड़कर समझा जाता है। सारथी अरुण हैं। पुराणों में सूर्य की पत्नी संज्ञा और छाया बताई गई हैं। शनि देव छाया के पुत्र हैं और यमराज संज्ञा के पुत्र।

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शनि देव, शनि देवॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि देव

पुराणों के अनुसार शनि सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं। यमराज उनके भाई हैं और यमुना उनकी बहन। शनि का रंग श्याम है और वाहन कौआ या गिद्ध माना जाता है। कई चित्रों में वे भैंसे या गिद्ध पर सवार दिखते हैं। उनकी चाल सबसे धीमी मानी गई है, इसलिए एक नाम शनैश्चर भी है, यानी धीरे चलने वाला।

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महाकालेश्वर, महाकालेश्वरॐ नमः शिवाय

महाकालेश्वर

काल के दो अर्थ हैं, समय और मृत्यु। महाकाल यानी वह जो समय और मृत्यु दोनों का स्वामी है। उज्जैन को प्राचीन काल में अवंतिका कहा जाता था और यह सात मोक्षदायिनी पुरियों में गिनी जाती है। भारतीय खगोल परंपरा में उज्जैन को समय की गणना का केंद्र माना गया, इसलिए यहां महाकाल का विराजना कोई संयोग नहीं समझा जाता।

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खाटू श्याम जी, खाटू श्याम जीश्री श्याम देवाय नमः

खाटू श्याम जी

स्कंद पुराण की परंपरा के अनुसार बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उनकी माता का नाम मौर्वी बताया जाता है, जिन्हें कुछ कथाओं में कामकंटका भी कहा गया है। बचपन से ही वे असाधारण योद्धा थे। उन्होंने देवी की उपासना की और उन्हें तीन अमोघ बाण मिले। इसी कारण उनका एक नाम तीन बाण धारी पड़ा।

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मां पार्वती, मां पार्वतीॐ ह्रीं पार्वत्यै नमः

मां पार्वती

पर्वतराज हिमवान और मैना की पुत्री होने से वे पार्वती कहलाईं। उन्हें गौरी, उमा, शैलजा और अपर्णा भी कहा जाता है। शिव पुराण की कथा के अनुसार वे पूर्व जन्म में दक्ष की पुत्री सती थीं। पिता के यज्ञ में पति शिव का अपमान सहन न कर पाने पर सती ने प्राण त्याग दिए। शिव गहरे वैराग्य में चले गए। सती ने ही हिमालय के घर पार्वती के रूप में दोबारा जन्म लिया। नवदुर्गा के नौ रूपों में पहला शैलपुत्री और दूसरा ब्रह्मचारिणी इन्हीं के रूप हैं।

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मां गंगा, मां गंगाॐ गंगायै नमः

मां गंगा

अयोध्या के राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया। इंद्र ने डर के मारे यज्ञ का घोड़ा चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के पास बांध दिया। सगर के साठ हजार पुत्र घोड़ा ढूंढते हुए वहां पहुंचे और मुनि को चोर समझ बैठे। कपिल मुनि की तपस्या भंग हुई और उनकी दृष्टि से सभी पुत्र भस्म हो गए।

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जगन्नाथ जी, जगन्नाथ जीॐ जगन्नाथाय नमः

जगन्नाथ जी

जगन्नाथ का अर्थ है जगत के नाथ। उन्हें कृष्ण का रूप माना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में तीन विग्रह हैं: जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा। साथ में सुदर्शन भी विराजमान हैं। मूर्तियां लकड़ी की हैं, बड़ी गोल आंखों वाली, और हाथ पैर पूरे दिखाई नहीं देते। यह रूप पहली बार देखने वाले को अलग लगता है, इसलिए लोग इसके पीछे की कथा जानना चाहते हैं।

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वेंकटेश्वर जी, वेंकटेश्वर जीॐ नमो वेंकटेशाय

वेंकटेश्वर जी

बहुत से लोग दोनों नामों को एक समझ लेते हैं। तिरुपति नीचे बसा शहर है, जहां रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा है। तिरुमला ऊपर पहाड़ी पर है, जहां वेंकटेश्वर का मंदिर है। पहाड़ी की सात चोटियां मानी जाती हैं, इसलिए इसे सप्तगिरि भी कहते हैं और भगवान को सात पहाड़ों का स्वामी कहा जाता है।

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कार्तिकेय जी, कार्तिकेय जीॐ सरवणभावाय नमः

कार्तिकेय जी

तारकासुर ने ब्रह्मा जी से वर पाया था कि उसकी मृत्यु केवल शिव के पुत्र के हाथों हो। उस समय शिव सती के वियोग में तपस्या में लीन थे और विवाह करना ही नहीं चाहते थे। इसी कारण देवताओं ने पार्वती के तप और शिव से उनके विवाह का मार्ग बनाया। यह कथा हरतालिका तीज वाले लेख में विस्तार से है।

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संतोषी माता, संतोषी माताॐ संतोषी माता नमः

संतोषी माता

संतोषी माता का नाम वेदों या प्रमुख पुराणों में नहीं मिलता। यह एक लोक परंपरा है, जो उत्तर भारत में 1960 के दशक के बाद तेजी से फैली। 1975 की फिल्म "जय संतोषी मां" के बाद यह व्रत घर घर पहुंचा। इसका मतलब यह नहीं कि श्रद्धा कम है। करोड़ों लोग इस व्रत को निभाते हैं। बस लिखते समय इसे "लोक मान्यता के अनुसार" कहना सही रहेगा, पुराण का प्रसंग बताकर नहीं।

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6:15ॐ

Aaj ka Bhakti Vichar

मन के वश में करना ही सबसे बड़ी तपस्या है।

ॐ नमः शिवाय

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