
विष्णु जी
विष्णु जी
विष्णु को पालनकर्ता कहा जाता है। त्रिदेवों में ब्रह्मा सृष्टि रचते हैं, शिव संहार करते हैं और विष्णु संसार को चलाते हैं। उनका निवास क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर माना गया है और लक्ष्मी जी उनकी सेवा में रहती हैं।
उनके हाथों में चार चीजें हैं:
मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
हे वासुदेव, आपको नमस्कार।
भगवान विष्णु के दस अवतार और उनकी कथा
विष्णु जी का स्वरूप
विष्णु को पालनकर्ता कहा जाता है। त्रिदेवों में ब्रह्मा सृष्टि रचते हैं, शिव संहार करते हैं और विष्णु संसार को चलाते हैं। उनका निवास क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर माना गया है और लक्ष्मी जी उनकी सेवा में रहती हैं।
उनके हाथों में चार चीजें हैं:
शंख (पांचजन्य): सृष्टि के आदि नाद का प्रतीक।
चक्र (सुदर्शन): काल का चक्र और अधर्म का नाश।
गदा (कौमोदकी): शक्ति और अनुशासन।
पद्म (कमल): पवित्रता और ज्ञान।
दस अवतार क्रम से
1. मत्स्य। प्रलय के समय विष्णु मछली बनकर आए और राजा सत्यव्रत मनु तथा वेदों को बचाया।
2. कूर्म। समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत डूबने लगा तो विष्णु ने कछुए का रूप लेकर उसे अपनी पीठ पर टिकाया।
3. वराह। हिरण्याक्ष धरती को समुद्र में ले गया था। विष्णु ने वराह रूप में उसे अपने दांतों पर उठाकर बाहर निकाला।
4. नरसिंह। हिरण्यकशिपु को वरदान था कि वह न दिन में मरेगा न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न मनुष्य से न पशु से। उसके पुत्र प्रह्लाद की भक्ति की रक्षा के लिए विष्णु आधे सिंह और आधे मनुष्य बनकर, संध्या के समय, चौखट पर उसका अंत करने आए।
5. वामन। राजा बलि ने तीनों लोक जीत लिए थे। वामन ब्राह्मण बालक बनकर तीन पग भूमि मांगने गए। दो पगों में उन्होंने पूरी सृष्टि नाप ली और तीसरा पग बलि के सिर पर रखा।
6. परशुराम। ऋषि जमदग्नि के पुत्र, जिन्होंने अत्याचारी राजाओं के विरुद्ध फरसा उठाया। माना जाता है कि वे चिरंजीवी हैं।
7. राम। अयोध्या के राजा, जिन्होंने रावण का वध किया। इनकी पूरी कथा मर्यादा पुरुषोत्तम राम वाले लेख में पढ़ी जा सकती है।
8. कृष्ण। द्वापर के नायक, जिन्होंने कंस का अंत किया और कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया।
9. बुद्ध। अधिकतर पुराणों की सूची में नवां अवतार बुद्ध गिना जाता है। कुछ परंपराओं में उनकी जगह बलराम का नाम आता है। यह भेद अलग अलग ग्रंथों की वजह से है, इसलिए लिखते समय "एक मान्यता के अनुसार" कहना ठीक रहेगा।
10. कल्कि। यह अवतार अभी हुआ नहीं माना जाता। कलियुग के अंत में विष्णु श्वेत घोड़े पर सवार होकर अधर्म का नाश करेंगे, ऐसा पुराणों में वर्णन है।
विष्णु जी की पूजा कब और कैसे
गुरुवार का दिन विष्णु पूजा के लिए माना जाता है। एकादशी का व्रत विशेष फलदायी माना गया है, जो हर महीने दो बार आती है। तुलसी दल विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में तुलसी जरूर रखी जाती है। पीले फूल, पीला वस्त्र और चंदन भी चढ़ाए जाते हैं।
विष्णु मंत्र
सबसे प्रचलित मंत्र हैं:
ॐ नमो नारायणाय (अष्टाक्षर मंत्र)
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षर मंत्र)
इनके अलावा विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कई घरों में गुरुवार या एकादशी को होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विष्णु जी के कुल कितने अवतार हैं?
भागवत पुराण में 22 अवतारों की सूची आती है, पर सबसे ज्यादा प्रचलित दस हैं, जिन्हें दशावतार कहा जाता है।
विष्णु जी को तुलसी क्यों प्रिय है?
कथा के अनुसार तुलसी पूर्व जन्म में वृंदा थीं और विष्णु ने उन्हें अपनी सबसे प्रिय बनने का वरदान दिया।
एकादशी क्या है?
चंद्र मास के दोनों पक्षों की ग्यारहवीं तिथि। इस दिन अन्न त्यागकर या फलाहार लेकर विष्णु उपासना की जाती है।
विष्णु और लक्ष्मी जी का क्या संबंध है?
लक्ष्मी जी विष्णु की पत्नी हैं। जहां नारायण हैं, वहां श्री का वास माना जाता है। महालक्ष्मी पूजा विधि वाला लेख भी पढ़ें।
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