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Scripture
Ramcharitmanasरामचरितमानस
गोस्वामी तुलसीदास रचित, सात काण्डों में श्रीराम-कथा का अमृत। हर काण्ड का सार और मुख्य प्रसंग।
1बाल काण्ड
Bal Kand Kand
रामचरितमानस का प्रथम काण्ड, नाम-महिमा और राम-कथा का आरंभ। शिव-पार्वती का विवाह, नारद-मुनि का आग्रह, रावण का उदय और फिर राम-अवतरण का संकल्प। अयोध्या में दशरथ की पुत्र-कामना के लिए यज्ञ और कौसल्या के गर्भ से राम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्न का जन्म। विश्वामित्र के साथ वन-गमन, ताड़का-वध, जानकी-स्वयंवर और शिव-धनुष का भंग, बाल काण्ड में राम के बाल-लीला और विवाह तक की कथा है।
मुख्य प्रसंग
2अयोध्या काण्ड
Ayodhya Kand Kand
दूसरा काण्ड, राम के वन-वास की कथा। दशरथ राम को राज्य-भिषेक का संकल्प करते हैं, पर कैकेयी दो वरदान माँगकर राम के लिए चौदह वर्ष का वन-वास और भरत का राज्य ले लेती है। राम मर्यादा-पुरुषोत्तम बनकर पिता का वचन निभाते हैं: सीता-लक्ष्मण सहित वन चले जाते हैं। अयोध्या विरह में दशरथ-स्वर्गवास और भरत का राम को वापस बुलाने का प्रयास, चित्रकूट में भरत-मिलन और पादुका-राज्य।
मुख्य प्रसंग
3अरण्य काण्ड
Aranya Kand Kand
तीसरा काण्ड, दंडक-वन की कथा। राम-सीता-लक्ष्मण वन-विहार करते हुए शबरी से मिलते हैं (शबरी के बेर का प्रसंग)। शूर्पणखा राम पर आसक्त होकर लक्ष्मण से अपमानित होती है: खर-दूषण का वध होता है। रावण के प्रेरणा से मारीच स्वर्ण-मृग बनता है, राम के वियोग में सीता का अपहरण हो जाता है। जटायु रावण से युद्ध कर मरता है; राम खोजते हुए कबंध-मुक्ति और शबरी-दर्शन कर सुग्रीव से मिलते हैं।
मुख्य प्रसंग
4किष्किंधा काण्ड
Kishkindha Kand Kand
चौथा काण्ड, वानर-साम्राज्य की कथा। राम से मित्रता कर सुग्रीव को उसकी पत्नी और राज्य वापस दिलाते हैं: वालि-वध होता है। सुग्रीव राज्य का आनंद मनाता है और वर्षा-ऋतु निकलने पर राम के स्मरण से वानरों को सीता-खोज में भेजता है। हनुमान सुग्रीव की भेंट में राम के भक्त बनते हैं। अंगद-हनुमान आदि दक्षिण दिशा में सीता-खोज निकलते हैं और समुद्र-किनारे संपाती से रावण-लंका का पता चलता है।
मुख्य प्रसंग
5सुंदर काण्ड
Sundar Kand Kand
पाँचवाँ काण्ड, रामचरितमानस का हृदय, हनुमान की लंका-यात्रा। हनुमान समुद्र लाँघकर लंका पहुँचते हैं: लंकिनी का नाश, रावण के भवनों का दर्शन, अशोक-वाटिका में सीता के दर्शन। हनुमान सीता को राम की मुद्रिका दिखाकर उनका भरोसा कराते हैं। फिर रावण को उपदेश देते हैं, अक्षय-कुमार का वध कर लंका-दहन करते हैं और सीता की चूड़ामणि लेकर लौटते हैं। सुंदरकाण्ड का पाठ संकट-नाश के लिए प्रसिद्ध है।
मुख्य प्रसंग
6लंका काण्ड (युद्ध काण्ड)
Lanka Kand (Yuddha Kand) Kand
छठा काण्ड, राम-रावण युद्ध की कथा। विभीषण राम की शरण में आता है; समुद्र से राम की भूमिका और लंका जाने की विनती। नल-नील द्वारा पत्थरों के जल पर तैरने से सेतु-निर्माण, 'राम-सेतु'। युद्ध में कुंभकर्ण, मेघनाद और अंत में रावण का वध। सीता की अग्नि-परीक्षा और उनका स्वीकार। विभीषण का लंका-राज्य और पुष्पक-विमान से अयोध्या की वापसी, भरत की प्रतीक्षा और राम-राज्य-भिषेक (दीपावली की कथा)।
मुख्य प्रसंग
7उत्तर काण्ड
Uttar Kand Kand
सातवाँ और अंतिम काण्ड, राम-राज्य के पश्चात की कथा। राम-राज्य का आदर्श वर्णन, राम के राज्य में दुःख नहीं था। काल के अंश से लक्ष्मण का त्याग, राम का योग-निष्ठा से शरीर-त्याग और सरयू में जल-समाधि। सरयू-तट पर राम का विष्णु-रूप में लय और अयोध्या की जनता का साथ-जाना। उत्तरकाण्ड में राम-कथा की विदाई और 'राम कथा का फल' का वर्णन है, जो सुनता या पढ़ता है, वह राम-कृपा पाता है।
मुख्य प्रसंग
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