
संपूर्ण कथा
शबरी ऋषि मतंग की शिष्या थीं। गुरु ने देह त्याग से पहले उन्हें आशीर्वाद दिया कि एक दिन श्री राम स्वयं तुम्हारे आश्रम आएँगे। इसी विश्वास में शबरी प्रतिदिन आश्रम को साफ रखतीं और फल-फूल एकत्र करके राम की प्रतीक्षा करती रहीं।
पंपा सरोवर के पास सीता की खोज में निकले राम और लक्ष्मण शबरी के आश्रम पहुँचे। शबरी ने अत्यंत प्रेम से उनका स्वागत किया और उन्हें फल-मूल अर्पित किए। लोक परंपरा में कहा जाता है कि वे हर बेर चखकर मीठे बेर ही राम को देती थीं, जबकि वाल्मीकि रामायण में फल-मूल का उल्लेख है।
राम ने उनकी भक्ति को स्वीकार किया और उन्हें सुग्रीव से मित्रता का मार्ग भी बताया गया। इसके बाद शबरी ने अपनी साधना पूर्ण होने पर देह त्याग कर दिव्य लोक प्राप्त किया।
कथा का संदेश
ईश्वर को भाव और प्रेम प्रिय है, जाति, धन या वैभव नहीं।
