Pauranik Katha

भीष्म की शरशय्या और विष्णु सहस्रनाम

बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को उपदेश और विष्णु सहस्रनाम देने की कथा।

भीष्म की शरशय्या और विष्णु सहस्रनाम कथा

संपूर्ण कथा

महाभारत युद्ध के दसवें दिन शिखंडी को आगे करके अर्जुन ने भीष्म पर बाणों की वर्षा की। भीष्म बाणों की शय्या पर गिर पड़े, पर उनके शरीर को बाणों ने धरती से ऊपर थामे रखा। सिरहाने के लिए अर्जुन ने बाणों का तकिया बनाया और प्यास लगने पर धरती से जलधारा निकाली।

इच्छा मृत्यु के वरदान के कारण भीष्म ने उत्तरायण आने तक प्राण नहीं त्यागे। युद्ध के बाद युधिष्ठिर श्री कृष्ण के साथ उनके पास पहुँचे। शोक से भरे युधिष्ठिर को भीष्म ने राजधर्म, मोक्षधर्म और दानधर्म का उपदेश दिया, जो शांति पर्व और अनुशासन पर्व में मिलता है।

युधिष्ठिर के प्रश्न पर भीष्म ने भगवान विष्णु के एक हजार नाम बताए, जिन्हें विष्णु सहस्रनाम कहा जाता है। उत्तरायण आने पर, माघ मास में उन्होंने श्री कृष्ण का ध्यान करते हुए देह त्याग दी।

कथा का संदेश

ज्ञान और धर्म की शिक्षा जीवन के अंतिम क्षण तक देने योग्य सबसे बड़ा दान है।

सामान्य प्रश्न

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