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मां सरस्वती

Gyan · Kala · Sangeetसभी विद्यालय और साधक का मनवसंत पंचमी
मां सरस्वती

मां सरस्वती

मां सरस्वती

सरस्वती जी श्वेत वस्त्र में कमल या शिला पर विराजमान दिखाई जाती हैं। उनके हाथों में चार चीजें होती हैं।

वाहन हंस है। परंपरा में हंस को नीर क्षीर विवेक वाला माना गया है, यानी दूध और पानी को अलग कर देने वाली समझ। कुछ क्षेत्रों में मोर भी उनके साथ दिखता है।

मंत्र

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

हे सरस्वती, आपको नमस्कार।

सरस्वती पूजा विधि और वसंत पंचमी का महत्व

मां सरस्वती का स्वरूप

सरस्वती जी श्वेत वस्त्र में कमल या शिला पर विराजमान दिखाई जाती हैं। उनके हाथों में चार चीजें होती हैं।

वीणा: कला और संगीत का प्रतीक।

पुस्तक: ज्ञान और वेद।

जपमाला: साधना और एकाग्रता।

वरमुद्रा: आशीर्वाद।

वाहन हंस है। परंपरा में हंस को नीर क्षीर विवेक वाला माना गया है, यानी दूध और पानी को अलग कर देने वाली समझ। कुछ क्षेत्रों में मोर भी उनके साथ दिखता है।

सरस्वती की कथा

पुराणों में अलग अलग प्रसंग मिलते हैं। एक मान्यता के अनुसार सृष्टि रचते समय ब्रह्मा जी को चारों ओर मौन दिखा। तब उनके कमंडल के जल से देवी प्रकट हुईं और उनकी वीणा से स्वर फूटे। इसी से वाणी और ज्ञान का संसार बना।

रामायण के उत्तरकांड में एक रोचक प्रसंग आता है। कुंभकर्ण ने तपस्या के बाद ब्रह्मा जी से वर मांगना था। देवताओं ने सरस्वती जी से प्रार्थना की कि वे उसकी जीभ पर बैठ जाएं। नतीजा यह हुआ कि वह "इंद्रासन" की जगह "निद्रासन" मांग बैठा और छह महीने सोने वाला बन गया। कथा हल्की सी लगती है, पर इसमें यह संकेत है कि वाणी में सरस्वती का वास होता है।

ऋग्वेद में सरस्वती का उल्लेख एक नदी के रूप में भी है और वाक् देवी के रूप में भी। इसलिए दोनों रूप साथ साथ मान्य हैं।

वसंत पंचमी कब और क्यों

माघ मास की शुक्ल पंचमी को वसंत पंचमी आती है, यानी जनवरी के अंत या फरवरी में। इसे मां सरस्वती का प्रकट दिवस माना जाता है। सर्दी ढलने लगती है, खेतों में सरसों पीली दिखने लगती है और इसी कारण पीला रंग इस दिन की पहचान बन गया है। तिथि हर साल बदलती है, इसलिए पंचांग से देखें।

कई स्कूलों में इस दिन बच्चों से पहली बार अक्षर लिखवाने की रस्म होती है, जिसे विद्यारंभ या अक्षराभ्यास कहते हैं।

घर पर सरस्वती पूजा की विधि

सुबह स्नान करके पीले या सफेद कपड़े पहनें।

चौकी पर पीला या सफेद कपड़ा बिछाकर सरस्वती जी की मूर्ति या चित्र रखें।

पूजा के पास अपनी किताबें, कॉपी, कलम, वाद्य यंत्र या काम के औजार रखें।

दीपक जलाएं और सफेद या पीले फूल चढ़ाएं। चंदन और अक्षत भी रखें।

भोग में केसरिया खीर, पीले चावल, बूंदी या मौसमी फल रखें।

मंत्र जप के बाद आरती करें।

पूजा के बाद कुछ देर पढ़ाई, लेखन या अभ्यास करें। परंपरा में माना जाता है कि इस दिन किया गया पहला प्रयास शुभ होता है।

पूजा के दिन किताबों और वाद्यों को पैर न लगाएं, यह सावधानी ज्यादातर घरों में रखी जाती है।

सरस्वती वंदना और मंत्र

सबसे प्रसिद्ध वंदना की शुरुआत इस पंक्ति से होती है:

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

इसका भाव है कि जो देवी चमेली के फूल, चंद्रमा, बर्फ और मोती के हार जैसी उजली हैं और श्वेत वस्त्र धारण किए हैं, उन्हें प्रणाम।

सरल मंत्र:

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

इसमें "ऐं" सरस्वती का बीज मंत्र माना जाता है। इसे 11 या 108 बार जपा जा सकता है। विद्यार्थी रोज सुबह पढ़ाई शुरू करने से पहले इसे बोल सकते हैं। इसके साथ गायत्री मंत्र के अर्थ वाला लेख भी देखा जा सकता है, क्योंकि गायत्री को भी ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता है।

विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए एक बात

पूजा से मन टिकता है, पर पढ़ाई या रियाज की जगह कोई चीज नहीं ले सकती। सरस्वती उपासना का असली अर्थ नियमित अभ्यास से जुड़ा है। इसलिए पूजा के बाद एक छोटा लक्ष्य जरूर तय कर लें, जैसे रोज आधा घंटा एक ही विषय पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वसंत पंचमी पर पीला रंग क्यों पहनते हैं?

यह सरसों के खिलने और वसंत ऋतु की शुरुआत का रंग है। इसे ऊर्जा और उल्लास का प्रतीक माना जाता है।

सरस्वती पूजा में क्या नहीं चढ़ाते?

परंपरा में सफेद और पीले फूल प्रिय माने गए हैं। भोग सात्विक रखा जाता है। कुछ घरों में इस दिन प्याज लहसुन नहीं खाए जाते।

क्या सरस्वती पूजा रोज कर सकते हैं?

हां। रोज एक दीपक, एक मंत्र और किताब को प्रणाम करना भी पर्याप्त माना जाता है।

सरस्वती और लक्ष्मी में कौन बड़ी हैं?

परंपरा में इनकी तुलना नहीं की जाती। दीवाली पर लक्ष्मी, वसंत पंचमी पर सरस्वती। महालक्ष्मी पूजा विधि वाला लेख भी पढ़ें।

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