
महालक्ष्मी
महालक्ष्मी
लक्ष्मी जी को कमल पर विराजमान दिखाया जाता है। चार हाथ हैं, जिन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से जोड़ा जाता है। दोनों ओर से हाथी उन पर जल अर्पित करते दिखते हैं, इसलिए उनका एक नाम गजलक्ष्मी भी है। कमल का अर्थ है कीचड़ में रहकर भी निर्मल रहना। लक्ष्मी जी विष्णु की पत्नी हैं और समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं।
विष्णु पुराण में एक प्रसंग आता है। ऋषि दुर्वासा ने इंद्र को पुष्पमाला भेंट की। इंद्र ने अहंकार में उसे अपने हाथी ऐरावत के मस्तक पर रख दिया और हाथी ने उसे पैरों तले कुचल दिया। क्रोधित दुर्वासा ने श्राप दिया कि इंद्र का वैभव नष्ट हो जाए। उसके बाद लक्ष्मी जी स्वर्ग छोड़कर समुद्र में चली गईं और देवता श्रीहीन हो गए। फिर समुद्र मंथन हुआ और लक्ष्मी जी पुनः प्रकट हुईं।
मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
हे महालक्ष्मी, आपको नमस्कार।
महालक्ष्मी पूजा विधि: शुक्रवार व्रत और श्रीसूक्त
लक्ष्मी जी का स्वरूप
लक्ष्मी जी को कमल पर विराजमान दिखाया जाता है। चार हाथ हैं, जिन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से जोड़ा जाता है। दोनों ओर से हाथी उन पर जल अर्पित करते दिखते हैं, इसलिए उनका एक नाम गजलक्ष्मी भी है। कमल का अर्थ है कीचड़ में रहकर भी निर्मल रहना। लक्ष्मी जी विष्णु की पत्नी हैं और समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं।
कथा: जब लक्ष्मी स्वर्ग छोड़कर चली गईं
विष्णु पुराण में एक प्रसंग आता है। ऋषि दुर्वासा ने इंद्र को पुष्पमाला भेंट की। इंद्र ने अहंकार में उसे अपने हाथी ऐरावत के मस्तक पर रख दिया और हाथी ने उसे पैरों तले कुचल दिया। क्रोधित दुर्वासा ने श्राप दिया कि इंद्र का वैभव नष्ट हो जाए। उसके बाद लक्ष्मी जी स्वर्ग छोड़कर समुद्र में चली गईं और देवता श्रीहीन हो गए। फिर समुद्र मंथन हुआ और लक्ष्मी जी पुनः प्रकट हुईं।
इस कथा का सीधा संकेत यह निकाला जाता है कि अहंकार और अपमान जहां होता है, वहां से लक्ष्मी चली जाती हैं।
मान्यता के अनुसार लक्ष्मी जी कहां टिकती हैं
शास्त्रों और लोक परंपरा में कुछ बातें बार बार आती हैं:
जहां सफाई और व्यवस्था रहती है
जहां परिश्रम और ईमानदारी की कमाई होती है
जहां बड़ों और स्त्रियों का सम्मान होता है
जहां शाम को दीपक जलता है और घर में कलह कम रहती है
यह किसी धन की गारंटी नहीं है। यह एक जीवन शैली की सीख है, जिसे परंपरा ने लक्ष्मी की कृपा कहा है।
शुक्रवार की पूजा विधि
शुक्रवार को लक्ष्मी जी का दिन माना जाता है।
सुबह घर की सफाई करें और स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें। गुलाबी, लाल या सफेद रंग शुभ माना जाता है।
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी जी की मूर्ति या चित्र रखें। विष्णु जी का चित्र साथ रखना अच्छा रहता है।
घी का दीपक जलाएं।
कमल या गुलाब का फूल, रोली, चावल और सुगंध चढ़ाएं।
भोग में खीर, बताशे, मखाने या सफेद मिठाई रखें।
श्रीसूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
आरती करके प्रसाद बांटें।
कई घरों में 16 शुक्रवार का संकल्प लिया जाता है। जो भी संकल्प लें, उसे निभा सकने की क्षमता देखकर ही लें।
श्रीसूक्त क्या है
श्रीसूक्त ऋग्वेद के परिशिष्ट भाग (खिल सूक्त) में मिलता है। इसकी शुरुआत हिरण्यवर्णां हरिणीं से होती है। इसमें लक्ष्मी जी का आवाहन स्वर्ण जैसी आभा वाली, कमल पर स्थित देवी के रूप में किया गया है। संस्कृत पाठ कठिन लगे तो पहले हिंदी अर्थ पढ़ें और फिर धीरे धीरे पाठ सीखें। गलत उच्चारण से अच्छा है कि भाव के साथ सरल मंत्र जपें।
महालक्ष्मी के मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
इन्हें 108 बार जपा जा सकता है। कमलगट्टे की माला का प्रयोग परंपरा में बताया गया है।
अष्टलक्ष्मी
लक्ष्मी जी के आठ रूप माने जाते हैं: आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी। यानी धन अकेला नहीं है, अन्न, संतान, साहस और विद्या भी लक्ष्मी ही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लक्ष्मी जी की पूजा किस समय करें?
सुबह या शाम का समय ठीक माना जाता है। दीवाली पर प्रदोष काल में पूजा की परंपरा है।
लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा साथ क्यों होती है?
परंपरा में माना जाता है कि धन के साथ बुद्धि जरूरी है, इसलिए दोनों को साथ पूजते हैं।
क्या लक्ष्मी जी को तुलसी चढ़ा सकते हैं?
आमतौर पर लक्ष्मी पूजा में कमल और गुलाब अधिक प्रचलित हैं। तुलसी विष्णु जी की पूजा में विशेष रूप से रखी जाती है।
शुक्रवार व्रत में क्या खाएं?
कई लोग दिन में फलाहार लेते हैं और शाम को पूजा के बाद सात्विक भोजन करते हैं। खट्टी चीजों से परहेज की परंपरा भी कुछ घरों में है।
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