Bhagwan

गणेश जी

Buddhi · Siddhi · Mangalसर्व स्थान (सृष्टि के प्रथम पूज्य)गणेश चतुर्थी, दीपावली
गणेश जी

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गणेश जी

शिव पुराण में आई कथा के अनुसार माता पार्वती स्नान के लिए जाने वाली थीं। उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। फिर उसे द्वार पर बैठाकर कहा कि कोई भीतर न आने पाए।

थोड़ी देर में भगवान शिव लौटे। बालक ने उन्हें रोक दिया। उसे पता ही नहीं था कि सामने कौन खड़ा है। बात बढ़ी और क्रोध में शिव जी ने बालक का सिर काट दिया। पार्वती जी को जब यह पता चला तो उनका दुख और क्रोध दोनों इतने बड़े थे कि देवता घबरा गए।

मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

हे गणों के स्वामी गणपति, आपको नमस्कार।

गणेश जी की पूजा विधि, जन्म कथा और मंत्र

गणेश जी की जन्म कथा

शिव पुराण में आई कथा के अनुसार माता पार्वती स्नान के लिए जाने वाली थीं। उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। फिर उसे द्वार पर बैठाकर कहा कि कोई भीतर न आने पाए।

थोड़ी देर में भगवान शिव लौटे। बालक ने उन्हें रोक दिया। उसे पता ही नहीं था कि सामने कौन खड़ा है। बात बढ़ी और क्रोध में शिव जी ने बालक का सिर काट दिया। पार्वती जी को जब यह पता चला तो उनका दुख और क्रोध दोनों इतने बड़े थे कि देवता घबरा गए।

शिव जी ने अपने गणों को आदेश दिया कि उत्तर दिशा में जो पहला जीव मिले, उसका सिर ले आओ। गण एक हाथी का सिर लेकर आए। वही सिर बालक को लगाया गया और वह फिर जीवित हो उठा। शिव जी ने उसी समय कहा कि हर पूजा में सबसे पहले इसी की पूजा होगी। इसी कारण नाम पड़ा गणपति, यानी गणों के स्वामी।

कुछ ग्रंथों और क्षेत्रीय कथाओं में इस प्रसंग के ब्योरे अलग मिलते हैं, पर मूल बात हर जगह एक ही है।

गणेश जी की पूजा कब करें

बुधवार का दिन गणेश जी को प्रिय माना जाता है। हर महीने की चतुर्थी, खासकर संकष्टी चतुर्थी, पर भी लोग व्रत रखते हैं। सबसे बड़ा पर्व गणेश चतुर्थी है, जो भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आता है। तारीख हर साल बदलती है, इसलिए पंचांग देख लें।

घर पर गणेश पूजा की सरल विधि

सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा की जगह धो लें।

चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या चित्र रखें।

दीपक जलाएं और हाथ में जल लेकर मन में संकल्प करें कि आप किस इच्छा या भाव से पूजा कर रहे हैं।

गणेश जी को रोली, चावल और लाल फूल चढ़ाएं।

दूर्वा की 21 गांठें चढ़ाना परंपरा है। दूर्वा गणेश जी को सबसे प्रिय मानी जाती है।

भोग में मोदक या बेसन और बूंदी के लड्डू रखें।

मंत्र जप करें, फिर आरती करें और प्रसाद सबको बांटें।

परंपरा में गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती। इसके पीछे भी एक लोक कथा है, इसलिए पूजा की थाली में तुलसी के पत्ते न रखें।

गणेश जी के मंत्र

सबसे सरल मंत्र है:

ॐ गं गणपतये नमः

इसे 108 बार जपा जा सकता है। कोई भी नया काम शुरू करने से पहले यह श्लोक भी बोला जाता है:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

इसका भाव है कि हे विशाल शरीर और करोड़ों सूर्य के समान तेज वाले देव, मेरे सारे कामों को बिना रुकावट पूरा कीजिए।

गणेश चतुर्थी पर क्या करें

घर में मूर्ति बैठाने वाले परिवार आमतौर पर डेढ़ दिन, तीन, पांच, सात या दस दिन बाद विसर्जन करते हैं। मिट्टी की मूर्ति चुनना बेहतर है, क्योंकि वह पानी में घुल जाती है और नदी तालाब को नुकसान नहीं पहुंचाती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों होती है?

शिव पुराण की कथा के अनुसार शिव जी ने स्वयं वरदान दिया कि हर शुभ कार्य में पहले गणेश जी पूजे जाएंगे।

गणेश जी को कौन सा फूल और भोग चढ़ाएं?

लाल फूल, दूर्वा और मोदक या लड्डू। तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।

गणेश जी की पूजा किस दिशा में करें?

घर में पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।

क्या रोज गणेश जी का मंत्र जप सकते हैं?

हां, इसमें कोई रोक नहीं है। रोज सुबह 11 या 21 बार भी जप कर सकते हैं।

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