Pauranik Katha

गणेश और कार्तिकेय की पृथ्वी परिक्रमा

माता-पिता की परिक्रमा से पृथ्वी की परिक्रमा का फल पाने वाले गणेशजी की कथा।

गणेश और कार्तिकेय की पृथ्वी परिक्रमा कथा

संपूर्ण कथा

गणेश और कार्तिकेय दोनों के विवाह की बात चली तो दोनों में पहले विवाह का विवाद हो गया। शिव और पार्वती ने शर्त रखी कि जो पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले लौटेगा, उसी का विवाह पहले होगा।

कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर तुरंत परिक्रमा के लिए निकल पड़े। गणेशजी ने अपने भारी शरीर और छोटे वाहन मूषक का विचार करके बुद्धि का सहारा लिया। उन्होंने माता-पिता को आसन पर बैठाकर उनकी सात परिक्रमा की और कहा कि माता-पिता में ही समस्त संसार समाया है।

शिव-पार्वती उनकी बुद्धि से प्रसन्न हुए और गणेशजी का विवाह विश्वरूप की पुत्रियों सिद्धि और बुद्धि से हुआ। लौटने पर कार्तिकेय यह जानकर रुष्ट हो गए और क्रौंच पर्वत पर रहने चले गए।

कथा का संदेश

माता-पिता की सेवा और आदर संसार की सभी तीर्थयात्राओं से बढ़कर है।

सामान्य प्रश्न

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