
सूर्य देव
सूर्य देव
वैदिक परंपरा में सूर्य एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें प्रत्यक्ष देखा जा सकता है, इसलिए उन्हें प्रत्यक्ष देव कहा जाता है। उनके रथ में सात घोड़े जुते हैं, जिन्हें सप्ताह के सात दिन या प्रकाश के सात रंगों से जोड़कर समझा जाता है। सारथी अरुण हैं। पुराणों में सूर्य की पत्नी संज्ञा और छाया बताई गई हैं। शनि देव छाया के पुत्र हैं और यमराज संज्ञा के पुत्र।
महाभारत में कर्ण को सूर्य पुत्र बताया गया है। रामायण की परंपरा में हनुमान जी ने सूर्य देव से ही शिक्षा ली थी, यह कथा लोक परंपरा में अधिक प्रचलित है।
मंत्र
ॐ घृणिः सूर्याय नमः
हे तेज से भरे सूर्य देव, आपको नमस्कार।
सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि
सूर्य देव कौन हैं
वैदिक परंपरा में सूर्य एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें प्रत्यक्ष देखा जा सकता है, इसलिए उन्हें प्रत्यक्ष देव कहा जाता है। उनके रथ में सात घोड़े जुते हैं, जिन्हें सप्ताह के सात दिन या प्रकाश के सात रंगों से जोड़कर समझा जाता है। सारथी अरुण हैं। पुराणों में सूर्य की पत्नी संज्ञा और छाया बताई गई हैं। शनि देव छाया के पुत्र हैं और यमराज संज्ञा के पुत्र।
महाभारत में कर्ण को सूर्य पुत्र बताया गया है। रामायण की परंपरा में हनुमान जी ने सूर्य देव से ही शिक्षा ली थी, यह कथा लोक परंपरा में अधिक प्रचलित है।
अर्घ्य देने का सही समय
सबसे शुभ समय सूर्योदय के तुरंत बाद का माना जाता है, जब धूप कोमल होती है। सूर्योदय का समय हर शहर और हर मौसम में बदलता है, इसलिए अपने शहर का समय मोबाइल पर देख लें। दोपहर में अर्घ्य देने की परंपरा नहीं है।
किस दिशा में मुंह करें
पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खड़े हों, क्योंकि सूर्य पूर्व से उगता है। जगह न मिले तो खुले आंगन या छत पर जाएं।
अर्घ्य देने का तरीका
स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें।
तांबे के लोटे में साफ जल भरें। परंपरा में तांबा शुभ माना गया है। न हो तो स्टील या पीतल भी चलता है।
जल में चाहें तो थोड़ी रोली, लाल फूल की पंखुड़ी, अक्षत या मिश्री डाल दें।
लोटे को दोनों हाथों से पकड़कर सीने के पास लाएं, फिर सिर के ऊपर तक उठाएं।
जल की पतली धार धीरे धीरे गिराएं। धार के बीच से उगते सूर्य को देखने की परंपरा है।
अर्घ्य देते समय मंत्र बोलें।
जल पैरों पर न गिरे, इसके लिए नीचे थाली या गमला रखें। बाद में यह जल किसी पौधे में डाल दें।
अंत में तीन बार परिक्रमा की तरह घूमकर या उसी जगह खड़े होकर प्रणाम करें।
एक सावधानी जरूरी है। सीधे सूरज की ओर देर तक देखना आंखों के लिए नुकसानदायक होता है। जल की धार से झलक लेना या सूर्य की ओर हल्की दृष्टि रखना काफी है। सूर्योदय के बाद धूप तेज होने पर आंखें खोलकर न देखें।
सूर्य मंत्र
अर्घ्य के समय आसान मंत्र:
ॐ सूर्याय नमः
या
ॐ घृणि सूर्याय नमः
परंपरा में एक और श्लोक बोला जाता है:
ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते।अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
इसका भाव है कि हे हजार किरणों वाले, तेज के भंडार और संसार के स्वामी सूर्य, श्रद्धा से दिया गया यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए।
आदित्य हृदय स्तोत्र की कथा
वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड में प्रसंग आता है। राम और रावण का युद्ध चल रहा था और राम थके हुए खड़े थे। उसी समय महर्षि अगस्त्य रणभूमि में आए और राम को सूर्य की स्तुति सिखाई। यही आदित्य हृदय स्तोत्र है, जिसमें 31 श्लोक माने जाते हैं। तीन बार जप करने और फिर पूरे मन से युद्ध करने की बात कही गई है। इस स्तोत्र को आत्मविश्वास और ऊर्जा के पाठ के रूप में याद किया जाता है।
रविवार की पूजा
रविवार सूर्य का दिन है। इस दिन कई लोग नमक रहित या हल्का भोजन लेकर व्रत रखते हैं। सूर्यास्त के बाद ही भोजन करने की परंपरा भी है। सूर्य के अर्घ्य के साथ गुड़, लाल फूल और गेहूं का दान भी किया जाता है। अगर व्रत स्वास्थ्य के हिसाब से कठिन लगे तो केवल जल अर्पण और मंत्र जप भी पर्याप्त माना गया है।
सूर्य नमस्कार और छठ
सूर्य की उपासना का एक रूप आसनों में भी मिलता है, जिसे सूर्य नमस्कार कहते हैं। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ पूजा में डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। उड़ीसा का कोणार्क सूर्य मंदिर सूर्य रथ के आकार में बना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रोज अर्घ्य देना जरूरी है?
नहीं, यह श्रद्धा और सुविधा की बात है। रविवार से शुरू करके जितने दिन निभा सकें, उतने दिन करें।
बादल हों तो क्या करें?
उसी दिशा में मुंह करके अर्घ्य दे दें। सूर्य दिखे या न दिखे, भाव वही रहता है।
महिलाएं अर्घ्य दे सकती हैं?
हां, छठ जैसे व्रत में तो महिलाओं की भूमिका सबसे बड़ी है।
अर्घ्य का जल पैरों के नीचे आए तो?
इसीलिए थाली या गमले का उपयोग बताया गया है, ताकि जल का अनादर न हो।
मंत्र
पूजा विधि
व्रत
आरती और भजन
