
संपूर्ण कथा
वानरराज केसरी और माता अंजना के पुत्र हनुमान को पवन देव का अंश माना जाता है। बचपन में एक बार प्रातःकाल उगते हुए लाल सूर्य को देखकर बालक हनुमान ने उसे कोई फल समझा और उसे पकड़ने के लिए आकाश में छलांग लगा दी।
इसी समय राहु भी सूर्य की ओर बढ़ रहा था। हनुमान को देखकर वह घबराकर इंद्र के पास पहुँचा। इंद्र ने क्रोध में आकर बालक पर वज्र से प्रहार किया, जिससे उनकी ठोड़ी (हनु) पर चोट लगी और वे मूर्छित होकर गिर पड़े। इसी से उनका नाम 'हनुमान' पड़ा।
पुत्र की यह दशा देखकर पवन देव ने वायु का प्रवाह रोक दिया और तीनों लोक व्याकुल हो गए। तब ब्रह्माजी सहित सभी देवताओं ने आकर हनुमान को पुनः जीवित किया और उन्हें अनेक वरदान दिए। इस प्रकार वे अद्वितीय बल, बुद्धि और भक्ति के प्रतीक बने।
कथा का संदेश
शक्ति के साथ यदि विवेक और विनम्रता हो तो वही शक्ति संसार का कल्याण करती है।
