
राधा रानी
राधा रानी
राधा को ब्रज परंपरा में कृष्ण की प्रेम शक्ति माना गया है। वैष्णव दर्शन उन्हें ह्लादिनी शक्ति कहता है, यानी वह शक्ति जो कृष्ण को आनंद देती है। इस दृष्टि से राधा और कृष्ण दो नहीं, एक ही तत्व के दो रूप हैं।
एक बात इतिहास की दृष्टि से भी जाननी चाहिए। श्रीमद्भागवत में राधा का नाम सीधा नहीं आता, पर एक श्लोक की व्याख्या में कई आचार्य उन्हीं की ओर संकेत मानते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण, पद्म पुराण और गर्ग संहिता में राधा का विस्तार से वर्णन मिलता है। जयदेव के गीत गोविंद और बाद में चैतन्य महाप्रभु, निंबार्क, वल्लभ और हित हरिवंश जैसे संतों की परंपराओं में राधा भक्ति का केंद्र बनीं। राधावल्लभ संप्रदाय में तो राधा ही प्रमुख उपास्य हैं। इसलिए लिखते समय "पुराणों और भक्ति संप्रदायों के अनुसार" कहना अधिक सही रहेगा।
मंत्र
श्री राधे कृष्ण
श्री राधे-कृष्ण का स्मरण — प्रेम की स्वीकृति।
राधा रानी का महत्व और बरसाना धाम
राधा कौन हैं
राधा को ब्रज परंपरा में कृष्ण की प्रेम शक्ति माना गया है। वैष्णव दर्शन उन्हें ह्लादिनी शक्ति कहता है, यानी वह शक्ति जो कृष्ण को आनंद देती है। इस दृष्टि से राधा और कृष्ण दो नहीं, एक ही तत्व के दो रूप हैं।
एक बात इतिहास की दृष्टि से भी जाननी चाहिए। श्रीमद्भागवत में राधा का नाम सीधा नहीं आता, पर एक श्लोक की व्याख्या में कई आचार्य उन्हीं की ओर संकेत मानते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण, पद्म पुराण और गर्ग संहिता में राधा का विस्तार से वर्णन मिलता है। जयदेव के गीत गोविंद और बाद में चैतन्य महाप्रभु, निंबार्क, वल्लभ और हित हरिवंश जैसे संतों की परंपराओं में राधा भक्ति का केंद्र बनीं। राधावल्लभ संप्रदाय में तो राधा ही प्रमुख उपास्य हैं। इसलिए लिखते समय "पुराणों और भक्ति संप्रदायों के अनुसार" कहना अधिक सही रहेगा।
राधा का जन्म और राधा अष्टमी
परंपरा के अनुसार राधा का जन्म भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को हुआ, जो कृष्ण जन्माष्टमी के लगभग पंद्रह दिन बाद आती है। इसे राधा अष्टमी कहते हैं। उनके पिता वृषभानु और माता कीर्ति मानी जाती हैं। जन्मस्थान को लेकर दो परंपराएं हैं। एक मथुरा के पास रावल गांव को जन्मस्थान बताती है और दूसरी बरसाना को उनका निवास मानती है। भक्तों के लिए बरसाना ही राधा रानी का धाम है।
कथा में आता है कि राधा कुछ समय तक आंखें नहीं खोलती थीं। कृष्ण के दर्शन के बाद ही उन्होंने पहली बार आंखें खोलीं। यह कथा लोक परंपरा की है, किसी मूल ग्रंथ में एक जैसी नहीं मिलती।
कृष्ण से पहले राधा का नाम क्यों
राधे कृष्ण, राधे श्याम, सीता राम, गौरी शंकर। इन सब नामों में स्त्री शक्ति का नाम पहले आता है। भक्ति परंपरा में इसका कारण दिया जाता है कि शक्ति के बिना शक्तिमान अधूरा है। राधा को प्रेम की सर्वोच्च अवस्था माना गया है और कृष्ण तक पहुंचने का रास्ता प्रेम से होकर जाता है।
एक और व्याख्या नाम के अक्षरों से जुड़ी है। लोग कहते हैं कि राधा शब्द को उलटकर पढ़ें तो धारा बनता है, यानी भक्ति की धारा। यह भक्तों की भावना भरी व्याख्या है, भाषा विज्ञान का तर्क नहीं। राधा नाम का एक और भाव आराधना से जोड़ा जाता है।
बरसाना धाम
बरसाना मथुरा जिले में है। गांव एक पहाड़ी पर बसा है जिसे ब्रह्मगिरि या ब्रह्मा पर्वत कहते हैं। पहाड़ी की चोटी पर श्री राधा रानी मंदिर है, जिसे लाडली जी का मंदिर भी कहते हैं। वहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। मंदिर के आसपास के स्थान भी भक्तों के लिए महत्व रखते हैं।
लट्ठमार होली: फाल्गुन में बरसाना और नंदगांव के बीच होने वाली होली, जिसमें नंदगांव के पुरुष बरसाना आते हैं और महिलाएं उन पर लाठियां बरसाती हैं। यह कृष्ण और गोपियों की लीला की स्मृति मानी जाती है।
राधा अष्टमी का उत्सव: राधा जन्मोत्सव पर बरसाना में विशेष आयोजन होते हैं।
राधा कुंड और श्याम कुंड: गोवर्धन के पास स्थित ये कुंड वैष्णव परंपरा में बहुत पवित्र माने जाते हैं।
ध्यान दें: मंदिर का समय, उत्सवों की तिथियां, चढ़ाई और परिवहन की व्यवस्था और होली के दौरान प्रवेश के नियम हर साल बदल सकते हैं। प्रकाशित करने से पहले स्थानीय प्रशासन या मंदिर की आधिकारिक जानकारी जरूर देखें।
वृंदावन और राधा
वृंदावन में राधा रमण, राधा वल्लभ, राधा दामोदर जैसे मंदिर राधा नाम से ही जुड़े हैं। बांके बिहारी जी के विग्रह को भी राधा और कृष्ण का संयुक्त रूप माना जाता है। इस भाव पर बांके बिहारी मंदिर वाले लेख में और पढ़ें।
राधा रानी की पूजा कैसे करें
घर में पूजा के लिए कोई कठिन नियम नहीं है। राधा कृष्ण की युगल मूर्ति रखें, तुलसी दल, फूल और माखन मिश्री का भोग लगाएं। सबसे सरल साधना नाम जप है।
राधे राधे या श्री राधा कृष्णाय नमः का जप किया जा सकता है। संकीर्तन, यानी सब मिलकर भजन गाना, ब्रज परंपरा में प्रमुख साधन है। हर महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी और पूर्णिमा पर भी कई घरों में राधा कृष्ण की पूजा होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राधा रानी कौन थीं?
भक्ति परंपरा में राधा कृष्ण की प्रेम शक्ति और उनकी सबसे प्रिय भक्त के रूप में पूजी जाती हैं। वैष्णव दर्शन में उन्हें कृष्ण से अभिन्न माना गया है।
राधा अष्टमी कब होती है?
भाद्रपद मास की शुक्ल अष्टमी को, जो जन्माष्टमी के लगभग पंद्रह दिन बाद आती है। तिथि हर साल पंचांग से देखें।
बरसाना में कौन सा मंदिर प्रसिद्ध है?
ब्रह्मगिरि पर्वत की चोटी पर बना श्री राधा रानी मंदिर, जिसे लाडली जी मंदिर भी कहते हैं।
क्या राधा का नाम श्रीमद्भागवत में है?
नाम सीधा नहीं आता, पर कई आचार्य एक श्लोक की व्याख्या में उनका संकेत मानते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण और गर्ग संहिता जैसे ग्रंथों में राधा का विस्तार से वर्णन मिलता है।
मंत्र
पूजा विधि
आरती और भजन
