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नीम करोली बाबा

Ram Naam · Seva · Premकैंची धाम (नैनीताल), वृंदावनगुरु पूर्णिमा, बाबा जयंती (6 सितंबर)
नीम करोली बाबा

नीम करोली बाबा

नीम करोली बाबा

बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में बताया जाता है। जन्म का वर्ष आमतौर पर 1900 के आसपास माना जाता है, पर सटीक तारीख को लेकर अलग अलग बातें मिलती हैं। बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है।

परंपरा के अनुसार कम उम्र में ही उनका विवाह हुआ, पर उनका मन वैराग्य की ओर था। वे घर छोड़कर साधु जीवन में चले गए। बाद में गृहस्थ जीवन में लौटे और परिवार भी बसाया, पर साथ साथ संत के रूप में भी पहचाने गए। उन्हें लोग बाबा, महाराज जी और कई जगह बाबा नीब करौरी के नाम से भी पुकारते हैं।

मंत्र

राम राम

बाबा नीम करोली का स्मरण — राम राम ही सब कुछ है।

नीम करोली बाबा: जीवन परिचय और कैंची धाम

जीवन परिचय

बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में बताया जाता है। जन्म का वर्ष आमतौर पर 1900 के आसपास माना जाता है, पर सटीक तारीख को लेकर अलग अलग बातें मिलती हैं। बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है।

परंपरा के अनुसार कम उम्र में ही उनका विवाह हुआ, पर उनका मन वैराग्य की ओर था। वे घर छोड़कर साधु जीवन में चले गए। बाद में गृहस्थ जीवन में लौटे और परिवार भी बसाया, पर साथ साथ संत के रूप में भी पहचाने गए। उन्हें लोग बाबा, महाराज जी और कई जगह बाबा नीब करौरी के नाम से भी पुकारते हैं।

नीम करोली नाम कैसे पड़ा

फर्रुखाबाद जिले के नीब करौरी गांव में उन्होंने साधना की थी, इसी स्थान के नाम पर उन्हें यह नाम मिला। इसके पीछे की कथा के ब्योरे अलग अलग मिलते हैं। एक प्रसिद्ध लोक कथा में कहा जाता है कि उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया था और ट्रेन आगे नहीं बढ़ी, जब तक उन्हें सम्मान से वापस नहीं बैठाया गया। कथा लोक में बहुत प्रचलित है, पर इसकी पुष्टि का कोई दस्तावेजी आधार नहीं मिलता, इसलिए इसे "कहा जाता है" कहकर ही लिखें।

हनुमान जी के भक्त

बाबा खुद को सेवक कहते थे और हनुमान जी के अनन्य भक्त माने जाते हैं। उनके भक्तों ने देश भर में हनुमान मंदिर बनवाए। इनमें लखनऊ का हनुमान सेतु मंदिर और नैनीताल क्षेत्र के मंदिर शामिल हैं। भक्तों में बाबा के प्रति वही भाव है जो लोग हनुमान जी के प्रति रखते हैं। हनुमान जी की पूजा और चालीसा के बारे में हमारा हनुमान जी की पूजा विधि वाला लेख पढ़ें। श्री राम के प्रति हनुमान जी की भक्ति को समझने के लिए राम वाला लेख भी काम आएगा।

बाबा की शिक्षाएं

बाबा लंबे प्रवचन नहीं देते थे। उनके शब्द छोटे और सीधे होते थे। भक्तों के बीच उनकी तीन सीखें सबसे प्रचलित हैं:

सबसे प्रेम करो।

सबकी सेवा करो।

ईश्वर को याद रखो।

एक और वाक्य जो उनके नाम से कहा जाता है, "सब एक हैं।" उनके भक्त बताते हैं कि वे हर जाति, धर्म और देश के लोगों को समान भाव से मिलते थे। भंडारे में सबको भोजन कराना उनके आश्रमों की पहचान रही है।

उनके बारे में कई चमत्कार की कथाएं सुनाई जाती हैं। ये भक्तों के अनुभव और स्मृतियां हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। लेख में इन्हें तथ्य की तरह नहीं, बल्कि भक्तों के अनुभव के रूप में लिखें।

विदेश में प्रसिद्धि

1960 और 70 के दशक में कई पश्चिमी लोग बाबा के पास आए। इनमें अमेरिकी विद्वान रिचर्ड एल्पर्ट भी थे, जिन्हें बाबा ने राम दास नाम दिया। राम दास की किताब “Be Here Now” से पश्चिम में बाबा की चर्चा बढ़ी। संगीतकार कृष्ण दास, जिन्होंने भजन कीर्तन को पश्चिम में लोकप्रिय किया, भी बाबा के शिष्य रहे। बाद के वर्षों में कुछ जानी मानी हस्तियों के कैंची धाम आने की खबरें भी चर्चा में रहीं, पर इन्हें छापने से पहले भरोसेमंद स्रोत से पक्का कर लें।

महासमाधि

बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में महासमाधि ली। वहां आश्रम और समाधि स्थल है, जो उनके भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है। कुछ स्रोतों में तारीख एक दिन आगे पीछे मिलती है, इसलिए अपने लेख में आधिकारिक आश्रम की जानकारी से मिलान करें।

कैंची धाम

कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली के पास है, नैनीताल शहर से लगभग 17 किलोमीटर दूर, नैनीताल अल्मोड़ा मार्ग पर। नाम इसलिए पड़ा कि सड़क पर यहां दो तीखे मोड़ कैंची की तरह दिखते हैं। आश्रम की स्थापना 1960 के दशक में हुई मानी जाती है, और बाबा ने यहां कई वर्ष बिताए।

परिसर में हनुमान जी का मंदिर, बाबा का मंदिर और भक्तों के लिए कुछ सेवाएं हैं। सुबह और शाम की आरती, भंडारा और कीर्तन आश्रम के जीवन का हिस्सा हैं।

स्थापना दिवस: हर साल 15 जून को कैंची धाम का स्थापना दिवस मनाया जाता है, जब भंडारा और विशाल मेला लगता है। उस दिन लाखों लोग पहुंचते हैं, इसलिए सड़कों पर लंबा जाम और रहने की दिक्कत हो सकती है। शांति से दर्शन करना हो तो भीड़ वाले दिनों से बचें।

यात्रा के व्यावहारिक सुझाव

नैनीताल, भवाली और काठगोदाम में रहने के विकल्प मिलते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो लगभग 35 किलोमीटर दूर है।

पहाड़ी रास्ता है, इसलिए मौसम और भूस्खलन की जानकारी देखकर निकलें।

आश्रम की शांति बनाए रखें। तेज आवाज, ज्यादा फोटोग्राफी और अनावश्यक भीड़ से बचें।

आश्रम में प्रसाद स्वरूप जो भोजन मिले, उसे नम्रता से ग्रहण करें और बर्बाद न करें।

नैनीताल की सैर और हनुमानगढ़ी जैसे आसपास के मंदिर भी यात्रा में जोड़े जा सकते हैं।

ध्यान दें: कैंची धाम के दर्शन का समय, प्रवेश के नियम, वाहन की व्यवस्था, ठहरने की अनुमति, फोटो और मोबाइल के नियम बदलते रहते हैं। कई बार भीड़ के कारण प्रशासन अस्थायी रोक या यातायात योजना लागू करता है। प्रकाशित करने से पहले आश्रम की आधिकारिक सूचना और स्थानीय प्रशासन की जानकारी जरूर जांचें। इस लेख में जानबूझकर कोई समय या नियम नहीं लिखा गया है।

बाबा से जुड़ी साधना

बाबा के भक्त कोई कठिन विधि नहीं अपनाते। सबसे आम तरीके हैं:

राम नाम जप: बाबा के आश्रमों में राम नाम का जप बहुत प्रचलित है।

हनुमान चालीसा का पाठ: भक्त रोज या मंगलवार और शनिवार को पढ़ते हैं।

सेवा: जरूरतमंद को भोजन कराना या किसी की मदद करना, जिसे बाबा के उपदेश का सबसे सीधा रूप माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नीम करोली बाबा कौन थे?

बीसवीं सदी के प्रसिद्ध संत, जिन्हें हनुमान जी का भक्त और सेवा का उपदेशक माना जाता है। देश विदेश में उनके अनुयायी हैं।

कैंची धाम कहां है?

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली के पास, नैनीताल अल्मोड़ा मार्ग पर।

कैंची धाम का स्थापना दिवस कब होता है?

हर साल 15 जून को। इस दिन बहुत भीड़ रहती है।

बाबा की मुख्य शिक्षा क्या थी?

सबसे प्रेम, सबकी सेवा और ईश्वर का स्मरण।

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