Bhagwan

हनुमान जी

Shakti · Bhakti · Balजहाँ राम-नाम हैहनुमान जयंती, मंगलवार व शनिवार
हनुमान जी

हनुमान जी

हनुमान जी

हनुमान जी माता अंजना और वानरराज केसरी के पुत्र हैं। उन्हें पवनपुत्र इसलिए कहा जाता है कि मान्यता के अनुसार वायु देव का उनके जन्म में विशेष योगदान था। वे श्री राम के परम भक्त हैं और रामायण में उनकी भूमिका सीता जी की खोज, लंका दहन और संजीवनी लाने जैसे प्रसंगों में सबसे प्रसिद्ध है। हनुमान जयंती कई जगह चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में तिथि अलग है।

मंगलवार हनुमान जी का मुख्य दिन माना जाता है। लोक मान्यता है कि उनका जन्म मंगलवार को हुआ। इस दिन मंगल ग्रह से जुड़ी बाधाओं की शांति के लिए भी लोग व्रत रखते हैं।

मंत्र

ॐ हं हनुमते नमः

हे हनुमते, आपको नमस्कार।

हनुमान जी की पूजा विधि: मंगलवार और शनिवार में अंतर

हनुमान जी कौन हैं

हनुमान जी माता अंजना और वानरराज केसरी के पुत्र हैं। उन्हें पवनपुत्र इसलिए कहा जाता है कि मान्यता के अनुसार वायु देव का उनके जन्म में विशेष योगदान था। वे श्री राम के परम भक्त हैं और रामायण में उनकी भूमिका सीता जी की खोज, लंका दहन और संजीवनी लाने जैसे प्रसंगों में सबसे प्रसिद्ध है। हनुमान जयंती कई जगह चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में तिथि अलग है।

मंगलवार की पूजा

मंगलवार हनुमान जी का मुख्य दिन माना जाता है। लोक मान्यता है कि उनका जन्म मंगलवार को हुआ। इस दिन मंगल ग्रह से जुड़ी बाधाओं की शांति के लिए भी लोग व्रत रखते हैं।

शनिवार की पूजा

शनिवार शनि देव का दिन है। एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार हनुमान जी ने शनि देव को रावण की कैद से छुड़ाया था, इसलिए शनि ने वचन दिया कि हनुमान जी के भक्तों को वे कष्ट नहीं देंगे। इसी कारण शनिवार को भी हनुमान जी की उपासना होती है। यह कथा रामायण के मूल पाठ में नहीं बल्कि लोक परंपरा में मिलती है, इसलिए इसे मान्यता के रूप में ही लिखना ठीक है।

घर पर पूजा की विधि

स्नान करके साफ कपड़े पहनें। लाल या पीला रंग शुभ माना जाता है।

हनुमान जी की मूर्ति या चित्र को साफ करके स्थापित करें और दीपक जलाएं।

सिंदूर को चमेली के तेल में मिलाकर चढ़ाने की परंपरा है।

लाल फूल या गेंदे की माला चढ़ाएं।

भोग में बेसन के लड्डू, बूंदी, गुड़ चना या केला रखें।

हनुमान चालीसा का पाठ करें। समय हो तो सुंदरकांड भी पढ़ सकते हैं।

आरती करें और प्रसाद बांटें।

हनुमान चालीसा

इसे गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है। इसमें 40 चौपाइयां हैं और शुरुआत में दो दोहे। यह अवधी भाषा में है, इसलिए पढ़ते समय अर्थ पर भी ध्यान दें। रटने से ज्यादा काम अर्थ समझकर पढ़ने से आता है।

कुछ बातें ध्यान रखें

पूजा के दिन मन, वाणी और भोजन में सात्विकता रखने की परंपरा है।

मंत्र जप करना हो तो ॐ हनुमते नमः सरल है।

क्षेत्र के हिसाब से कुछ नियम बदल सकते हैं, जैसे महिलाओं द्वारा मूर्ति को छूने की परंपरा। अपने परिवार और मंदिर की रीति मानें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाते हैं?

कथा है कि सीता जी को सिंदूर लगाते देख हनुमान जी ने इसका कारण पूछा। उत्तर मिला कि इससे राम जी प्रसन्न होते हैं, तो उन्होंने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया।

मंगलवार और शनिवार में से कौन सा दिन बेहतर है?

कोई एक बेहतर नहीं है। जिस दिन नियम से निभा सकें, वही दिन चुनें।

हनुमान चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?

हां, सुबह या शाम किसी भी समय पढ़ा जा सकता है।

क्या हनुमान जी की पूजा में प्रसाद जरूरी है?

नहीं। श्रद्धा से जल और फूल भी काफी माने जाते हैं।

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