
नवदुर्गा
नवदुर्गा
देवी कवच में एक श्लोक आता है जिसमें नौ नाम क्रम से गिनाए गए हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
रंगों का क्रम शास्त्रों में तय नहीं है। लोकप्रिय परंपरा में रंग उस दिन के वार के हिसाब से चुने जाते हैं, इसलिए हर साल बदलते हैं। जैसे सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को नीला, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को हरा, शनिवार को स्लेटी और रविवार को नारंगी। उस साल के नवरात्रि कैलेंडर में जो रंग दिया हो, वही अपनाएं।
मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः
हे दुर्गा, आपको नमस्कार।
नवदुर्गा के नौ रूप: मंत्र, भोग और रंग
नौ रूपों का क्रम
देवी कवच में एक श्लोक आता है जिसमें नौ नाम क्रम से गिनाए गए हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
दिन 1: शैलपुत्री
हिमालय की पुत्री। पर्वतराज की कन्या होने से यह नाम पड़ा। वृषभ पर सवार, हाथ में त्रिशूल और कमल। इसी दिन घटस्थापना होती है।भोग: देसी घी।मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
दिन 2: ब्रह्मचारिणी
शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप करने वाला स्वरूप। हाथ में जपमाला और कमंडल। संयम और तपस्या का प्रतीक।भोग: शक्कर या मिश्री।मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
दिन 3: चंद्रघंटा
मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र। सिंह पर सवार, दस भुजाएं। यह रूप साहस और भय से मुक्ति का माना जाता है।भोग: दूध की खीर या दूध से बनी मिठाई।मंत्र: ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः
दिन 4: कूष्मांडा
मान्यता है कि अपनी मंद मुस्कान से इन्होंने ब्रह्मांड की रचना की। आठ भुजाओं के कारण अष्टभुजा भी कहलाती हैं।भोग: मालपुआ।मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः
दिन 5: स्कंदमाता
कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है, की माता। कमल पर विराजमान गोद में बालक स्कंद। मातृत्व का रूप। इस पर हमारे कार्तिकेय जी वाले लेख में और पढ़ें।भोग: केला।मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
दिन 6: कात्यायनी
ऋषि कात्यायन की पुत्री के रूप में प्रकट हुईं। महिषासुर का वध करने वाला रूप यही माना जाता है। ब्रज की गोपियों ने कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए इन्हीं की पूजा की थी, ऐसा भागवत में आता है।भोग: शहद।मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
दिन 7: कालरात्रि
सबसे उग्र रूप। काला रंग, बिखरे केश, गदहा वाहन। यह रूप अंधकार और भय का नाश करने वाला माना जाता है, इसलिए नाम में रात्रि है पर भाव शुभ का है। मां काली से इसका संबंध जोड़ा जाता है।भोग: गुड़।मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः
दिन 8: महागौरी
कठोर तप के बाद शरीर काला पड़ गया था। शिव जी ने गंगाजल से स्नान कराया तो वे अत्यंत गौर वर्ण की हो गईं। इसी दिन अष्टमी का कन्या पूजन कई घरों में होता है।भोग: नारियल।मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः
दिन 9: सिद्धिदात्री
कमल पर विराजमान, चार भुजाओं वाली। आठ सिद्धियां देने वाली मानी जाती हैं। नवमी के दिन हवन और कन्या पूजन से नवरात्रि पूरी होती है।भोग: तिल, हलवा, पूरी और चना।मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
नौ दिनों के रंग
रंगों का क्रम शास्त्रों में तय नहीं है। लोकप्रिय परंपरा में रंग उस दिन के वार के हिसाब से चुने जाते हैं, इसलिए हर साल बदलते हैं। जैसे सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को नीला, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को हरा, शनिवार को स्लेटी और रविवार को नारंगी। उस साल के नवरात्रि कैलेंडर में जो रंग दिया हो, वही अपनाएं।
नवरात्रि पूजा की सरल विधि
पहले दिन साफ जगह पर मिट्टी में जौ बोएं और कलश स्थापित करें।
रोज सुबह दीपक जलाकर उस दिन की देवी का मंत्र और दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करें।
व्रत रखने वाले सात्विक आहार लें। कई लोग सेंधा नमक, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा और फल खाते हैं।
अष्टमी या नवमी पर कन्याओं को भोजन कराएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवरात्रि साल में कितनी बार आती है?
चार बार। चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे प्रमुख हैं। आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रि भी मानी जाती हैं।
शारदीय और चैत्र नवरात्रि में क्या फर्क है?
शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में आती है और दशहरे से जुड़ी है। चैत्र नवरात्रि के अंत में राम नवमी आती है।
पूरे नौ दिन व्रत जरूरी है?
नहीं। पहले और आखिरी दिन या केवल अष्टमी का व्रत रखने की भी परंपरा है। अपनी सेहत देखकर तय करें।
दुर्गा सप्तशती किसने लिखी?
यह मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है, जिसे देवी महात्म्य भी कहते हैं।
मंत्र
पूजा विधि
आरती और भजन
