Pauranik Katha

माँ दुर्गा और महिषासुर वध

देवताओं की सम्मिलित शक्ति से प्रकट माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर के संहार की कथा।

माँ दुर्गा और महिषासुर वध कथा

संपूर्ण कथा

असुर महिषासुर ने कठोर तप से वरदान पाया कि उसे कोई पुरुष नहीं मार सकेगा। इस वरदान के अहंकार में उसने देवताओं को पराजित करके स्वर्ग पर अधिकार जमा लिया। परेशान देवता भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव की शरण में गए।

देवताओं की पीड़ा सुनकर तीनों देवों और अन्य सभी देवताओं के शरीर से तेज निकला, जिसके संयोग से एक अत्यंत तेजस्वी देवी प्रकट हुईं। सभी देवताओं ने उन्हें अपने अस्त्र-शस्त्र और आभूषण प्रदान किए। सिंह पर सवार होकर देवी ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा।

देवी और महिषासुर के बीच नौ दिन तक घोर युद्ध हुआ। महिषासुर अनेक रूप बदलता रहा, पर अंत में देवी ने उसका वध कर दिया। यह विजय बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा की आराधना में और दसवें दिन विजयादशमी के रूप में मनाए जाते हैं।

कथा का संदेश

संगठित शक्ति और सत्य के संकल्प के आगे कोई अत्याचारी टिक नहीं सकता।

सामान्य प्रश्न

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