
वेंकटेश्वर जी
वेंकटेश्वर जी
बहुत से लोग दोनों नामों को एक समझ लेते हैं। तिरुपति नीचे बसा शहर है, जहां रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा है। तिरुमला ऊपर पहाड़ी पर है, जहां वेंकटेश्वर का मंदिर है। पहाड़ी की सात चोटियां मानी जाती हैं, इसलिए इसे सप्तगिरि भी कहते हैं और भगवान को सात पहाड़ों का स्वामी कहा जाता है।
पुराणों की कथा के अनुसार एक बार ऋषियों में बहस हुई कि त्रिदेवों में सबसे श्रेष्ठ कौन है। परीक्षा लेने का जिम्मा भृगु ऋषि को मिला। वे ब्रह्मा और शिव के पास गए और अपेक्षित आदर न मिलने का कारण बताकर लौट आए। फिर वैकुंठ पहुंचे। विष्णु विश्राम कर रहे थे। भृगु ने क्रोध में उनके वक्षस्थल पर पैर मार दिया। वहीं लक्ष्मी जी का निवास माना जाता है।
मंत्र
ॐ नमो वेंकटेशाय
हे वेंकटेश, आपको नमस्कार।
तिरुपति बालाजी की कथा और दर्शन गाइड
तिरुपति और तिरुमला का फर्क
बहुत से लोग दोनों नामों को एक समझ लेते हैं। तिरुपति नीचे बसा शहर है, जहां रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा है। तिरुमला ऊपर पहाड़ी पर है, जहां वेंकटेश्वर का मंदिर है। पहाड़ी की सात चोटियां मानी जाती हैं, इसलिए इसे सप्तगिरि भी कहते हैं और भगवान को सात पहाड़ों का स्वामी कहा जाता है।
श्रीनिवास की कथा
पुराणों की कथा के अनुसार एक बार ऋषियों में बहस हुई कि त्रिदेवों में सबसे श्रेष्ठ कौन है। परीक्षा लेने का जिम्मा भृगु ऋषि को मिला। वे ब्रह्मा और शिव के पास गए और अपेक्षित आदर न मिलने का कारण बताकर लौट आए। फिर वैकुंठ पहुंचे। विष्णु विश्राम कर रहे थे। भृगु ने क्रोध में उनके वक्षस्थल पर पैर मार दिया। वहीं लक्ष्मी जी का निवास माना जाता है।
विष्णु ने शांत रहकर ऋषि के पैर दबाए और पूछा कि चोट तो नहीं लगी। पर लक्ष्मी जी इस अपमान से आहत होकर वैकुंठ छोड़कर चली गईं। कुछ कथाओं में वे कोल्हापुर पहुंचीं।
तब विष्णु पृथ्वी पर उतरे और शेषाचलम की पहाड़ी पर एक बांबी में तपस्या करने लगे। एक गाय रोज उस बांबी पर दूध देती थी। एक चरवाहे ने यह देखा और गुस्से में कुल्हाड़ी चला दी, जो भगवान के सिर पर लगी। यही प्रसंग श्रीनिवास कथा का आरंभ माना जाता है। इसके बाद वे वकुला देवी के पास पले, जिन्हें कृष्ण की पालक माता यशोदा का पुनर्जन्म बताया जाता है।
पद्मावती से विवाह और कुबेर का कर्ज
आकाश राजा की पुत्री पद्मावती से श्रीनिवास का विवाह तय हुआ। विवाह के खर्च के लिए उनके पास धन नहीं था। उन्होंने कुबेर से कर्ज लिया। कथा के अनुसार यह कर्ज कलियुग के अंत तक ब्याज सहित चुकाना है। इसीलिए माना जाता है कि भक्त जो दान देते हैं, वह इसी ऋण में योगदान है।
यह कथा अलग अलग ग्रंथों और क्षेत्रीय परंपराओं में थोड़े अलग ब्योरों के साथ मिलती है, इसलिए "एक मान्यता के अनुसार" कहकर लिखना ठीक रहता है। पद्मावती का मंदिर तिरुपति के पास तिरुचानूर में है। परंपरा में वहां भी दर्शन करना यात्रा का हिस्सा माना जाता है।
केश दान की परंपरा
तिरुमला में बड़ी संख्या में भक्त अपना सिर मुंडवाकर बाल अर्पित करते हैं। दक्षिण भारत में इसे मोक्कु कहा जाता है। भाव यह है कि अहंकार और अपना सजना संवरना भगवान के चरणों में रख दिया। यह कोई जरूरी नियम नहीं है। जो न करना चाहे, उसके दर्शन में कोई कमी नहीं मानी जाती। महिलाएं और पुरुष दोनों यह करते हैं।
लड्डू प्रसाद
तिरुपति का लड्डू देशभर में प्रसिद्ध है और इसे GI टैग प्राप्त है। मंदिर की रसोई में बनने वाला यह लड्डू मंदिर के बाहर नकल करके बेचने वालों से अलग पहचाना जाता है। प्रसाद आधिकारिक काउंटर से ही लें।
मंत्र और नाम स्मरण
सबसे प्रचलित है ओम नमो वेंकटेशाय और गोविंदा गोविंदा का जयकारा। सुबह जगाने के लिए गाई जाने वाली सुप्रभातम स्तुति बहुत लोकप्रिय है। विष्णु जी के अलग अलग रूपों के बारे में हमारा दशावतार वाला लेख भी देख सकते हैं। लक्ष्मी जी से जुड़े भाव के लिए महालक्ष्मी पूजा विधि वाला लेख पढ़ें।
यात्रा के लिए व्यावहारिक बातें
पैदल चढ़ाई का मार्ग अलिपिरि से शुरू होता है और भक्तों में लोकप्रिय है। बस और निजी वाहन से भी ऊपर जाया जा सकता है। सामान्य दिनों में भी भीड़ रहती है, और ब्रह्मोत्सव या वैकुंठ एकादशी के समय भीड़ और बढ़ जाती है। रहने की बुकिंग पहले से करना समझदारी है।
ध्यान दें: दर्शन के टिकट, ऑनलाइन बुकिंग, ड्रेस कोड, मोबाइल और बैग के नियम, केश दान की व्यवस्था और दर्शन का समय तिरुमला तिरुपति देवस्थानम यानी TTD तय करता है और ये बदलते रहते हैं। प्रकाशित करने से पहले TTD की आधिकारिक वेबसाइट से जांच लें। टिकट बेचने वाली फर्जी साइटों से बचने की सलाह पाठकों को भी दें। इस लेख में समय और शुल्क जानबूझकर नहीं लिखे गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तिरुपति बालाजी कौन हैं?
मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु का कलियुग में प्रकट रूप। उन्हें वेंकटेश्वर, श्रीनिवास और गोविंदा भी कहते हैं।
तिरुपति में बाल क्यों दान करते हैं?
यह अहंकार और मनोकामना की पूर्ति पर कृतज्ञता के भाव से की जाने वाली परंपरा है। इसे करना अनिवार्य नहीं है।
बालाजी पर कुबेर का कर्ज क्या है?
कथा के अनुसार विवाह के लिए श्रीनिवास ने कुबेर से कर्ज लिया था, जो कलियुग के अंत तक चुकाना है। भक्त इसी कारण दान करते हैं।
तिरुपति और तिरुमला में क्या अंतर है?
तिरुपति नीचे का शहर है और तिरुमला ऊपर पहाड़ी पर मंदिर वाला स्थान है।
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