
श्री राम
श्री राम
वाल्मीकि रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। ऋषियों की सलाह पर उन्होंने पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया। यज्ञ से प्राप्त खीर तीनों रानियों में बांटी गई। चैत्र शुक्ल नवमी को कौशल्या के गर्भ से राम का जन्म हुआ। कैकेयी से भरत और सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए। इसी तिथि को आज राम नवमी के रूप में मनाया जाता है।
मर्यादा का अर्थ है सीमा या आचरण की रेखा। पुरुषोत्तम यानी श्रेष्ठ पुरुष। राम को यह नाम इसलिए मिला कि उन्होंने राजा, पुत्र, पति, भाई और मित्र, हर भूमिका में अपनी सीमा नहीं लांघी, चाहे उसका दाम कितना भी बड़ा रहा।
मंत्र
श्री राम जय राम जय जय राम
श्री राम का स्मरण — संसार के दुख हरण करने वाले।
मर्यादा पुरुषोत्तम राम से सीखने लायक 7 बातें
राम जन्म की कथा
वाल्मीकि रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। ऋषियों की सलाह पर उन्होंने पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया। यज्ञ से प्राप्त खीर तीनों रानियों में बांटी गई। चैत्र शुक्ल नवमी को कौशल्या के गर्भ से राम का जन्म हुआ। कैकेयी से भरत और सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए। इसी तिथि को आज राम नवमी के रूप में मनाया जाता है।
"मर्यादा पुरुषोत्तम" का मतलब
मर्यादा का अर्थ है सीमा या आचरण की रेखा। पुरुषोत्तम यानी श्रेष्ठ पुरुष। राम को यह नाम इसलिए मिला कि उन्होंने राजा, पुत्र, पति, भाई और मित्र, हर भूमिका में अपनी सीमा नहीं लांघी, चाहे उसका दाम कितना भी बड़ा रहा।
सात बातें जो आज भी काम की हैं
1. वचन की कीमत समझना। पिता दशरथ ने कैकेयी को दिए वचन में राम को वनवास दे दिया। राज्याभिषेक की सुबह राम ने बिना शिकायत वन का रास्ता चुना। अयोध्या के लिए रघुकुल की यही रीति मानी गई कि प्राण जाए पर वचन न जाए।
2. बड़े पद पर रहकर भी विनम्र रहना। राम ने केवट से नाव मांगी, शबरी के जूठे बेर स्वीकार किए, निषादराज गुह को गले लगाया। जाति या हैसियत उनके लिए बाधा नहीं थी।
3. मित्रता निभाना। सुग्रीव का राज्य लौटाने और विभीषण को शरण देने में राम ने यह नहीं देखा कि इससे उन्हें क्या मिलेगा। मित्र की मदद पहले, हिसाब बाद में।
4. पद से ऊपर कर्तव्य रखना। राजा के रूप में प्रजा की बात का मान उनके लिए निजी सुख से बड़ा था। इस प्रसंग पर आज भी लोग अलग अलग राय रखते हैं, और रामायण के अलग पाठों में ब्योरे भी भिन्न हैं। पर यह पक्ष साफ है कि राम ने राजधर्म को सबसे ऊपर रखा।
5. रिश्तों में त्याग। भरत ने राज्य लेने से मना कर दिया और राम की खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर शासन चलाया। लक्ष्मण चौदह साल साथ वन में रहे। यह कथा बताती है कि भाई का रिश्ता अधिकार से नहीं, त्याग से चलता है।
6. शत्रु के गुण भी पहचानना। रावण के मरने पर राम ने विभीषण से कहा कि उनका विधिवत संस्कार करो, क्योंकि रावण महान विद्वान था। जीत के बाद भी कड़वाहट नहीं रखी।
7. धैर्य से संकट काटना। सीता हरण, वानर सेना जुटाना, समुद्र पर सेतु बनाना। राम ने हर बाधा पर जल्दबाजी की जगह योजना और साथियों का भरोसा चुना।
राम नाम का महत्व
तुलसीदास के रामचरितमानस में राम नाम की बहुत महिमा गाई गई है। परंपरा में माना जाता है कि सच्चे मन से राम नाम का जप मन को शांत करता है। जप के लिए कोई कठिन विधि नहीं है। श्री राम जय राम जय जय राम सबसे प्रचलित मंत्र है।
राम नवमी कैसे मनाएं
सुबह स्नान करके राम दरबार की पूजा करें।
पंचामृत से अभिषेक, तुलसी दल और फूल चढ़ाएं।
रामरक्षा स्तोत्र या रामचरितमानस के बालकांड का पाठ करें।
कई जगह दोपहर 12 बजे के आसपास जन्म की आरती होती है। सटीक मुहूर्त पंचांग से देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रामायण किसने लिखी?
संस्कृत में आदि रामायण महर्षि वाल्मीकि ने लिखी। हिंदी भाषी क्षेत्र में तुलसीदास का रामचरितमानस सबसे ज्यादा पढ़ा जाता है।
राम को विष्णु का अवतार क्यों कहा जाता है?
परंपरा में राम को विष्णु का सातवां अवतार माना गया है, जो रावण के अत्याचार से धरती को मुक्त कराने आए।
राम नवमी कब आती है?
चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को, यानी आमतौर पर मार्च या अप्रैल में।
राम और हनुमान जी का रिश्ता क्या है?
हनुमान जी राम के परम भक्त और सेवक हैं। हनुमान जी की पूजा विधि का लेख भी पढ़ें।
