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Bhagavad Gita · Adhyay 8
अक्षर ब्रह्म योग
28 श्लोक, Akhabrahma Yoga

अध्याय का सार
अक्षर-ब्रह्म (अविनाशी ब्रह्म) की उपासना और अंतकाल में भगवत्-स्मरण का महत्व। जो अंतिम समय में भगवान को छोड़कर देह त्यागता है, वह उन्हीं को प्राप्त होता है: 'यं यं वापि स्मरन्भावं'।
मुख्य शिक्षाएँ
- अंतकाल का स्मरण यात्रा-दिशा तय करता है
- अक्षर-ब्रह्म की अभ्यास-उपासना से परम-गति
अध्याय 8 — सम्पूर्ण श्लोक (28)
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प्रतिनिधि श्लोक
यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम्। तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः॥
Yam yam vapi smaranbhavam tyajatyante kalevaram
जिस-जिस भाव का स्मरण करते हुए देह त्यागता है, वह उसी को प्राप्त होता है।
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6:15ॐ
Aaj ka Bhakti Vichar
मन के वश में करना ही सबसे बड़ी तपस्या है।
ॐ नमः शिवाय
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