- Home
- Scriptures
- भगवद्गीता
- अध्याय 7
Bhagavad Gita · Adhyay 7
ज्ञान विज्ञान योग
30 श्लोक, Jnana Vijnana Yoga

अध्याय का सार
कृष्ण अपने प्रकृति-स्वरूप का रहस्य बताते हैं: समस्त सृष्टि उनकी अंश-प्रकृति से बनी है। माया की त्रिगुणी वृत्तियों से लोग भ्रमित होते हैं, पर जो उन्हें समर्पित हैं वे माया पार कर लेते हैं। वे समस्त वस्तुओं में उनका सार-तत्व हैं।
मुख्य शिक्षाएँ
- सृष्टि का सार रूप ही भगवान हैं
- माया भगवद्-भक्ति से ही पार होती है
- जो मुझमें शरण आते हैं, वे भव-बंधन पार करते हैं
अध्याय 7 — सम्पूर्ण श्लोक (30)
श्लोक लोड हो रहे हैं…
प्रतिनिधि श्लोक
मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा। निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः॥
Mayi sarvani karmani sannyasyadhyatmachetasa
समस्त कर्म मुझमें समर्पित कर, आत्म-चेतना से, आशा और ममता रहित होकर युद्ध करो।
सनातन सेवा ऐप
Sanatan Seva App mein japein, suntein aur dekhein
Mantra ka jap, vrat katha, Bhagavad Gita, Ramcharitmanas, rashifal, wallpapers aur daily devotional content. Sab kuch ek hi app mein, aapki bhasha mein.
Hindi · English · भोजपुरी · मराठी सहित कई भाषाएँ
Aaj ka Bhakti Vichar
मन के वश में करना ही सबसे बड़ी तपस्या है।
ॐ नमः शिवाय
Jap: 27 / 108
Gita · Bhajan · Rashifal · Wallpaper
