- Home
- Scriptures
- भगवद्गीता
- अध्याय 6
Bhagavad Gita · Adhyay 6
ध्यान योग
47 श्लोक, Dhyana Yoga

अध्याय का सार
ध्यान-साधना का अध्याय, आसन, स्थिरता, एकाग्रता और समता की विधि। कृष्ण कहते हैं: आत्मा को आत्मा द्वारा ही उद्धार करना है; उठा हुआ मन मित्र है और डूबा हुआ मन शत्रु। संयमी का मन दीपक की शांत लौ जैसा स्थिर होता है।
मुख्य शिक्षाएँ
- मन ही मित्र भी है, शत्रु भी
- युक्ताहार-विहार वाला संयमी योगी सर्वश्रेष्ठ
- चंचल मन को अभ्यास और वैराग्य से वश में करें
अध्याय 6 — सम्पूर्ण श्लोक (47)
श्लोक लोड हो रहे हैं…
प्रतिनिधि श्लोक
उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
Uddharedatmanatmanam natmanamavasadayet
मनुष्य अपने आत्म-स्वरूप से ही उद्धार करे, अपने को गिराये नहीं, आत्मा ही बंधु है और आत्मा ही शत्रु।
सनातन सेवा ऐप
Sanatan Seva App mein japein, suntein aur dekhein
Mantra ka jap, vrat katha, Bhagavad Gita, Ramcharitmanas, rashifal, wallpapers aur daily devotional content. Sab kuch ek hi app mein, aapki bhasha mein.
Hindi · English · भोजपुरी · मराठी सहित कई भाषाएँ
Aaj ka Bhakti Vichar
मन के वश में करना ही सबसे बड़ी तपस्या है।
ॐ नमः शिवाय
Jap: 27 / 108
Gita · Bhajan · Rashifal · Wallpaper
