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Bhagavad Gita · Adhyay 5
कर्म संन्यास योग
29 श्लोक, Karma Sanyasa Yoga

अध्याय का सार
त्याग और कर्मयोग में कौन श्रेष्ठ? कृष्ण कहते हैं: दोनों मुक्तिदायक हैं, पर कर्मयोग श्रेष्ठ है। सच्चा संन्यासी वह है जो कर्म करते हुए फल-आसक्ति त्यागता है: आसक्ति रहित कर्मी ही सुखी है।
मुख्य शिक्षाएँ
- कर्म करते हुए आसक्ति-त्याग = सच्चा संन्यास
- ज्ञान-दृष्टि से सुख-दुःख दोनों समान लगते हैं
अध्याय 5 — सम्पूर्ण श्लोक (29)
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प्रतिनिधि श्लोक
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ। ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि॥
Sukhaduhkhe same kritva labhalabhau jayajayau
सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय को सम मानकर युद्ध के लिए तैयार होओ, इससे पाप नहीं लगेगा।
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6:15ॐ
Aaj ka Bhakti Vichar
मन के वश में करना ही सबसे बड़ी तपस्या है।
ॐ नमः शिवाय
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Gita · Bhajan · Rashifal · Wallpaper
