देवता
समस्त देवता
श्रेष्ठ समय
मंदिर स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त (पंचांग से); नित्य पूजा प्रातः-संध्या।
श्रेणी
Daily पूजा
पूजा का परिचय
घर का मंदिर गृह का पवित्रतम स्थान है: यहाँ देवताओं का निवास माना जाता है। मंदिर की सही दिशा, देवताओं के स्थान और नित्य पूजन के नियम वास्तु और आगम शास्त्रों में वर्णित हैं।
घर के मंदिर में प्रातः-संध्या दीपक जलाने से घर का वातावरण दिव्य बना रहता है। मंदिर की देखभाल, स्वच्छता, फूलों का त्याग समय पर, और भोग का सम्मान, ये सब देव-सेवा के अंग हैं।
पूजा सामग्री
- मंदिर की अलमारी/चौकी
- देवताओं की मूर्ति/चित्र
- तुलसी का पौधा (आँगन में)
- पूजा की थाली
- दीपक
- अक्षत-चंदन-रोली
- पुष्प
- घंटी
- नैवेद्य
- गंगाजल
पूजा विधि
चरण-दर-चरण
- 1
मंदिर के लिए ईशान (उत्तर-पूर्व) दिशा श्रेष्ठ है: प्रवेश द्वार से देखने पर सामने न हो।
- 2
चौकी पर पीले/लाल वस्त्र बिछाकर देवताओं को स्थापित करें।
- 3
देवताओं के स्थान, गणेश केंद्र-पश्चिम, शिव उत्तर, विष्णु/कृष्ण पूर्व, देवी दक्षिण-पूर्व की ओर।
- 4
मंदिर का द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।
- 5
नित्य प्रातः मंदिर साफ करें, दीपक जलाएँ और पूजन करें।
- 6
संध्या में पुनः दीपक और आरती करें।
- 7
तुलसी आँगन/बालकनी में उत्तर-पूर्व दिशा में लगाएँ, नित्य जल दें।
शुभ समय
मंदिर स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त (पंचांग से); नित्य पूजा प्रातः-संध्या।
महत्वपूर्ण सुझाव
- मंदिर के नीचे शयन कक्ष न रखें, यदि अनिवार्य हो तो देवताओं के समक्ष पर्दा रखें।
- मंदिर में टूटी-फूटी या जीर्ण मूर्तियाँ न रखें।
- पूजा की सामग्री के लिए अलग आसन और बक्सा रखें, स्वच्छता रखें।
सामान्य प्रश्न
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सर्वोत्तम है। पूर्व या उत्तर दिशा भी शुभ है: पश्चिम और दक्षिण में रखने से बचें।
