देवता
कलश (देवताओं का आसन)
श्रेष्ठ समय
किसी भी शुभ अनुष्ठान के आरंभ में, पंचांग का शुभ मुहूर्त देखें।
श्रेणी
Kalash पूजा
पूजा का परिचय
कलश हिंदू अनुष्ठानों का आरंभ-बिंदु है: घटस्थापना, विवाह, गृह-प्रवेश और यज्ञ में कलश सर्वप्रथम स्थापित होता है। कलश में देवताओं का आवाहन होता है: इसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मातृ-शक्तियों का आसन माना गया है।
कलश में जल, अक्षत, सुपारी, सिक्के और आम्र-पल्लव (आम के पत्ते) रखे जाते हैं और मुँह पर नारियल सहित लाल वस्त्र बाँधा जाता है। कलश शुभत्व और पूर्णता का प्रतीक है।
पूजा सामग्री
- ताँबे/पीतल/मिट्टी का कलश
- जल और गंगाजल
- अक्षत
- सुपारी
- सिक्के (द्रव्य)
- आम के पत्ते (आम्रपल्लव)
- नारियल
- लाल वस्त्र/मौली
- पुष्प और चंदन
- 5 या 7 प्रकार की पत्तियाँ (पंचपल्लव)
पूजा विधि
चरण-दर-चरण
- 1
शुभ मुहूर्त में कलश को साफ करें और स्थापित करें।
- 2
कलश में जल भरें, गंगाजल मिलाएँ।
- 3
अक्षत, सुपारी और सिक्के डालें।
- 4
पंचपल्लव (5 प्रकार पत्तियाँ) कलश में रखें।
- 5
कलश के मुँह पर लाल वस्त्र बिछाकर नारियल रखें, मौली से बाँधें।
- 6
कलश पर स्वस्तिक बनाकर चंदन-रोली लगाएँ।
- 7
देवताओं का आवाहन करें, कलश पूजन मंत्र बोलें।
- 8
पुष्प अर्पित कर कलश की आरती करें।
शुभ समय
किसी भी शुभ अनुष्ठान के आरंभ में, पंचांग का शुभ मुहूर्त देखें।
महत्वपूर्ण सुझाव
- कलश का जल शुद्ध रखें, अनुष्ठान के बाद तुलसी/पौधों में डालें।
- नवरात्रि में घटस्थापना के कलश का जौ विसर्जन पर देवी को अर्पित करें।
- कलश के नारियल का प्रसाद रूप में वितरण करें।
सामान्य प्रश्न
जल, गंगाजल, अक्षत, सुपारी, सिक्के, पंचपल्लव (पाँच प्रकार पत्तियाँ), और मुँह पर लाल वस्त्र सहित नारियल।
