Aarti Puja

आरती विधि

आरती की सही विधि, दीपक, घंटी और भाव का संयोजन।

देवता

समस्त देवता

श्रेष्ठ समय

पूजा के अंत में, प्रातः और संध्या दोनों काल।

श्रेणी

Aarti पूजा

पूजा का परिचय

आरती पूजा की परिसमाप्ति है: दीपक की ज्योति से देवता का प्रकाश-दर्शन। आरती में दीपक, घंटी, कपूर और पुष्प का संयोजन होता है: यह देव-भाव की पूर्ण अभिव्यक्ति है।

आरती तीन या पाँच दीपकों से की जाती है: त्रिमुखी या पंचमुखी दीपक। घंटी की ध्वनि के साथ आरती के भजन गाए जाते हैं और अंत में कपूर की आरती दिखाई जाती है।

पूजा सामग्री

  • त्रिमुखी/पंचमुखी दीपक
  • घी या तेल
  • रुई बत्तियाँ
  • घंटी
  • कपूर
  • पुष्प
  • आरती थाली
  • जल का पात्र

पूजा विधि

चरण-दर-चरण

  1. 1

    आरती थाली में दीपक, कपूर, पुष्प और घंटी रखें।

  2. 2

    दीपक जलाएँ, देवताओं के दाईं ओर से आरंभ करें।

  3. 3

    घंटी बजाते हुए आरती का भजन गाएँ।

  4. 4

    दीपक को देवता के समक्ष चारों दिशाओं में घुमाएँ, धीरे-धीरे।

  5. 5

    कपूर जलाकर अंतिम आरती दिखाएँ।

  6. 6

    देवता को जल (अर्घ्य) अर्पित करें।

  7. 7

    सभी सदस्य दीपक की ज्योति में हाथ रखकर नेत्रों तक ले जाएँ।

  8. 8

    पुष्प और प्रसाद बाँटें।

शुभ समय

पूजा के अंत में, प्रातः और संध्या दोनों काल।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • आरती दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) घुमाएँ, धीरे और भावपूर्ण।
  • घंटी की ध्वनि और भजन का ताल मेल खाए, मन एकाग्र रहे।
  • आरती के बाद ज्योति में हाथ रखकर आँखों पर लगाएँ, दिव्य दर्शन का प्रतीक।

सामान्य प्रश्न

दक्षिणावर्त, घड़ी की सुई की दिशा में। देवता के समक्ष चार या सात बार घुमाते हैं।

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