Evening Puja

संध्या पूजा विधि

संध्या की आरती और दीपक, घर के मंदिर में सांझ की शुभ लौ।

देवता

समस्त देवता

श्रेष्ठ समय

सूर्यास्त के समय, संध्या के प्रथम प्रहर में।

श्रेणी

Evening पूजा

पूजा का परिचय

संध्या काल दिन-रात्रि का संधि क्षण है: इस समय दीपक जलाने और आरती करने की परंपरा प्राचीन है। संध्या का दीपक घर की देहरी पर या मंदिर में जलाने से घर में लक्ष्मी का आगमन माना जाता है।

संध्या पूजा संक्षिप्त होती है: दीपक, धूप, आरती और प्रार्थना। तुलसी के पास संध्या दीपक विशेष शुभ माना जाता है।

पूजा सामग्री

  • दीपक और घी/तेल
  • रुई की बत्ती
  • धूप और अगरबत्ती
  • आरती थाली
  • पुष्प
  • नैवेद्य (मिठाई)
  • घंटी
  • कपूर

पूजा विधि

चरण-दर-चरण

  1. 1

    संध्या के समय (लगभग 6–7 बजे) पूजा स्थल पर जाएँ।

  2. 2

    देवताओं के समक्ष दीपक जलाएँ, घी का दीपक श्रेष्ठ।

  3. 3

    धूप/अगरबत्ती जलाकर दिखाएँ।

  4. 4

    आरती गाएँ, घंटी बजाते हुए।

  5. 5

    कपूर जलाकर दिखाएँ और प्रार्थना करें।

  6. 6

    तुलसी के समक्ष दीपक जलाएँ (हो तो)।

  7. 7

    प्रसाद बाँटें और घर के सब सदस्य आरती में सम्मिलित हों।

शुभ समय

सूर्यास्त के समय, संध्या के प्रथम प्रहर में।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • संध्या दीपक देहरी पर भी रखें, घर की रक्षा और लक्ष्मी-आगमन का संकेत।
  • आरती के समय पूरा परिवार सम्मिलित हो, घर में सौहार्द्र बनता है।
  • दीपक बुझने न पाए ऐसी व्यवस्था रखें, रात्रि में मंदिर का दीपक शुभ माना जाता है।

सामान्य प्रश्न

घी का दीपक सात्विक और शुभ माना गया है: यह मन को शांत करता है और देव-कृपा का प्रतीक है। तेल का दीपक भी जलाते हैं, पर घी श्रेष्ठ है।

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