देवता
समस्त देवता
श्रेष्ठ समय
प्रातः पूजा के बाद (नाश्ता भोग) और दोपहर (राजभोग); संध्या में फल-भोग।
श्रेणी
Bhog पूजा
पूजा का परिचय
भोग देव-सेवा का प्रमुख अंग है: भगवान को अर्पित भोजन 'नैवेद्य' कहलाता है। भोग लगाने के बाद वही भोजन प्रसाद बन जाता है और भक्तों में वितरित किया जाता है। भाव ही भोग की मुख्य भेंट है: व्यंजन की विलासिता नहीं।
शास्त्रों में भोग के लिए सात्विक भोजन का विधान है: प्याज़, लहसुन और रजसिक-तामसिक वस्तुओं से रहित। फल, मिठाई, खीर, हलवा और पंचामृत सामान्य भोग हैं।
पूजा सामग्री
- ताज़ा बना सात्विक भोजन
- मिठाई/खीर/हलवा
- फल
- पंचामृत
- जल
- तुलसी दल (विष्णु/कृष्ण हेतु)
- भोग थाली
- घी का दीपक
पूजा विधि
चरण-दर-चरण
- 1
भोग से पूर्व स्वयं भूखे न रहें, पहले भगवान को अर्पित करें।
- 2
भोजन शुद्ध और ताज़ा रखें, बासी भोग वर्जित।
- 3
भोग की थाली में थोड़ा जल रखें।
- 4
देवताओं के समक्ष भोग रखकर घंटी बजाएँ।
- 5
भोग मंत्र बोलें, 'नमो आसनाय...' या सरल प्रार्थना।
- 6
5–10 मिनट देवताओं के समक्ष भोग रखें।
- 7
तुलसी दल रखें (विष्णु-भक्ति में अनिवार्य)।
- 8
भोग हटाकर प्रसाद रूप में वितरित करें।
शुभ समय
प्रातः पूजा के बाद (नाश्ता भोग) और दोपहर (राजभोग); संध्या में फल-भोग।
महत्वपूर्ण सुझाव
- भोग केवल भाव से नहीं, शुद्धता से भी अर्पित करें; रसोई और बर्तन स्वच्छ रखें।
- प्रत्येक भोग में तुलसी दल विष्णु-कृष्ण को अवश्य रखें।
- प्रसाद का अपमान न करें, जमीन पर न फेंकें, गौ/पक्षियों को दें।
सामान्य प्रश्न
प्याज़-लहसुन, बासी अन्न, नमक युक्त रजसिक व्यंजन और मांस-मदिरा, ये वर्जित हैं। सात्विक शुद्ध भोजन ही अर्पित करें।
