
सुबह उठकर कौन से मंत्र बोलने चाहिए? जानें सुबह के मंत्र, उनका अर्थ, पढ़ने का सही समय और विधि। दिन की शुरुआत भक्ति से करने का सरल तरीका।
सुबह की पहली आवाज़ अगर भगवान के नाम की हो जाए तो पूरा दिन कुछ अलग ही बीतता है। घर के बड़े बुज़ुर्ग अक्सर कहते हैं कि आँख खुलते ही बिस्तर पर बैठे बैठे ईश्वर का स्मरण कर लो, फिर काम में लग जाना। सनातन परंपरा में सुबह के मंत्रों का उतना ही महत्व रहा है जितना स्नान और पूजा का, क्योंकि मंत्र से दिन की शुरुआत शुद्ध भाव से होती है।
शास्त्रों में आँख खुलने से लेकर स्नान और पूजा तक हर कदम के लिए मंत्र बताए गए हैं। कुछ मंत्र इतने छोटे हैं कि बच्चे भी आसानी से याद कर लेते हैं, और कुछ थोड़े विस्तृत हैं। यहाँ उन्हीं मुख्य मंत्रों को सरल अर्थ के साथ दिया गया है, साथ में यह भी बताया गया है कि इन्हें किस क्रम में बोलना चाहिए।
आँख खुलते ही कौन सा मंत्र बोलें
नींद खुलते ही सबसे पहला काम है अपनी दोनों हथेलियाँ आँखों के सामने लाकर देखना। मान्यता है कि हमारे हाथों में ही लक्ष्मी, सरस्वती और गोविंद तीनों का वास होता है, इसलिए दिन की शुरुआत हाथ देखने और इस मंत्र के साथ करना शुभ माना गया है।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
अर्थ: हथेलियों के ऊपरी भाग में लक्ष्मी, बीच में सरस्वती और मूल में गोविंद निवास करते हैं, इसीलिए प्रभात के समय सबसे पहले हाथ देखना शुभ है।
इसके बाद पैर ज़मीन पर रखने से पहले धरती माता को प्रणाम करते हुए यह मंत्र बोलें। भारतीय संस्कृति में धरती को माँ कहा गया है, और उसे चलने फिरने के लिए दिन में कई बार छूते हैं, इसलिए सुबह पहली बार पैर रखने से पहले क्षमा माँगने की परंपरा है।
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमंडले। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥
अर्थ: हे समुद्र को वस्त्र बनाने वाली और पर्वतों को स्तन रूप में रखने वाली विष्णुपत्नी धरती माता, आपको नमस्कार। मेरे पैरों के स्पर्श का दोष मुझे क्षमा करें।
इसके बाद बिस्तर से उठकर हाथ जोड़कर अपने इष्ट देव का नाम लें और मन में आज के दिन के लिए छोटी सी प्रार्थना करें कि दिन अच्छे से बीते। राम, कृष्ण, शिव, दुर्गा या गुरु, जिसकी भक्ति हो उसका स्मरण काफी है। यह पूरा क्रम दो मिनट से भी कम का है, पर असर पूरे दिन तक रहता है।
स्नान के बाद कौन से मंत्र पढ़ें
स्नान के बाद शरीर शुद्ध होता है, इसलिए यह समय गायत्री मंत्र के जाप के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। गायत्री को वेदों की माँ कहा जाता है और यह सूर्य की शक्ति से जुड़ा मंत्र है, इसलिए सुबह के समय इसका जाप विशेष फलदायक माना जाता है।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
अर्थ: हम उस प्रत्यक्ष, पवित्र और तेजस्वी सविता देव के तेज का ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को सही दिशा दिलाए।
सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित करना भी सुबह की परंपरा का बड़ा हिस्सा रहा है। तांबे के लोटे में जल भरकर, सूर्य की ओर मुख करके धीरे धीरे जल छोड़ें और यह मंत्र बोलें।
ॐ घृणि सूर्याय नमः
अर्थ: हे तेज से भरे सूर्य देव, आपको नमस्कार।
सूर्य को अर्घ्य देते समय यह भी ध्यान रखें कि जल एक ही बार में नहीं, बल्कि धीरे धीरे छोटे छोटे हिस्सों में छोड़ा जाए। जो लोग सूर्य को जल नहीं दे पाते, वे सिर्फ ऊपर दिए मंत्र का जाप करके सूर्य देव को प्रणाम कर सकते हैं। सूर्य को जल देने की पूरी विधि रविवार वाले आलेख में विस्तार से मिलेगी।
पूजा के समय कौन से मंत्र पढ़ें
सुबह की पूजा में सबसे पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता माना गया है। इसके बाद अपने इष्ट देव के अनुसार मंत्र चुनें। शिव भक्त ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं, हनुमान भक्त हनुमान मंत्र या हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, और गणेश उपासक ॐ गं गणपतये नमः का जाप करते हैं।
ॐ गं गणपतये नमः
अर्थ: हे गणों के स्वामी गणपति, आपको नमस्कार।
पूजा के बाद आरती करें और भगवान का धन्यवाद करें। अगर समय कम हो तो सिर्फ गायत्री मंत्र और इष्ट देव के नाम का जाप करना भी पर्याप्त माना गया है। मंत्रों की संख्या से ज्यादा जरूरी है उन्हें मन से बोलना। नीचे दी गई तालिका से पूरे क्रम को एक नजर में समझा जा सकता है।
| समय | क्या करें | मंत्र |
|---|---|---|
| आँख खुलते ही | हथेलियाँ आँखों के सामने लाएँ | कराग्रे वसते लक्ष्मीः |
| पैर ज़मीन पर रखने से पहले | धरती माता को प्रणाम | समुद्रवसने देवि |
| स्नान के बाद | गायत्री मंत्र का जाप | ॐ भूर्भुवः स्वः |
| सूर्योदय के समय | सूर्य को जल अर्पित करें | ॐ घृणि सूर्याय नमः |
| पूजा के समय | इष्ट देव का जाप | ॐ नमः शिवाय, ॐ गं गणपतये नमः |
शुरुआत करने वालों के लिए आसान तरीका
अगर आपने पहले कभी नियमित रूप से मंत्र जाप नहीं किया है तो एक ही साथ सब कुछ शुरू करने की जल्दबाज़ी न करें। धार्मिक आचार्य भी कहते हैं कि छोटी शुरुआत ही टिकती है। इस क्रम को अपनाकर देखें।
1. पहले सिर्फ एक मंत्र चुनें, जैसे अपने इष्ट देव का नाम मंत्र या ॐ नमः शिवाय।
2. उस मंत्र को सुबह और सोते समय रोज़ दोहराने की आदत डालें, चाहे पाँच मिनट ही क्यों न लगें।
3. जब मंत्र ज़ुबान पर बैठ जाए तो हथेली देखने और धरती को प्रणाम वाले मंत्र जोड़ें।
4. इसके बाद स्नान के बाद गायत्री मंत्र और सूर्य को जल देने की आदत डालें।
5. सब कुछ स्थिर होने पर माला से जाप शुरू करें और पूजा के मंत्रों को दिनचर्या में शामिल करते जाएँ।
ध्यान रखने वाली कुछ बातें
• आँख खुलते ही बोलने वाले मंत्रों के लिए स्नान जरूरी नहीं, क्योंकि ये बिस्तर पर बैठे ही होते हैं।
• गायत्री जैसे वैदिक मंत्रों का जाप स्नान के बाद शुद्ध अवस्था में करना बेहतर माना गया है।
• मंत्र बोलते समय जल्दबाज़ी न करें, शुद्ध उच्चारण पर ध्यान दें। शुद्ध उच्चारण भी हो जाए तो मंत्र का अर्थ सोचते हुए बोलें।
• समय न मिले तो सिर्फ इष्ट देव के नाम का स्मरण भी पर्याप्त है, शास्त्रों में नाम स्मरण को बड़ा सरल साधन बताया गया है।
• मंत्र का असर श्रद्धा और नियमितता से जुड़ा है, यांत्रिक ढंग से बोले गए शब्दों से नहीं।
घरेलू दैनिक मंत्रों के लिए किसी विशेष दीक्षा की जरूरत नहीं मानी जाती। पर यदि कोई विशेष अनुष्ठान या लंबा जाप करना हो, जैसे पुराणों में वर्णित कोई विधि, तो किसी जानकार आचार्य से एक बार पूछ लेना बेहतर रहता है। अलग अलग परंपराओं में विधि थोड़ी अलग हो सकती है, जो अपनी परंपरा के अनुसार चले वही ठीक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्या बिना स्नान के मंत्र पढ़ सकते हैं?
उत्तर: आँख खुलते ही बोलने वाले मंत्र, जैसे कराग्रे वसते लक्ष्मीः और समुद्रवसने देवि, बिना स्नान के बोले जा सकते हैं क्योंकि ये बिस्तर से उठने से पहले के मंत्र हैं। गायत्री मंत्र जैसे वैदिक मंत्रों का जाप स्नान के बाद करना श्रेष्ठ माना गया है। अगर बीमारी या किसी वजह से स्नान नहीं हो पा रहा है तो मन की शुद्धि के साथ जाप किया जा सकता है, श्रद्धा ही सबसे बड़ी शर्त है।
प्रश्न: सुबह के मंत्र कितनी बार बोलने चाहिए?
उत्तर: किसी भी मंत्र को एक बार श्रद्धा से बोलना भी अच्छा माना गया है। परंपरा में 1, 3, 11, 21, 27 और 108 की संख्या में जाप करने का विधान है, जिसमें 108 को सबसे पूर्ण संख्या माना गया है। शुरुआत में 11 या 21 बार जाप करना आरामदायक रहता है। माला से जाप करने पर गिनती की चिंता भी नहीं रहती।
प्रश्न: अगर सुबह जल्दी नहीं उठ पाते तो क्या करें?
उत्तर: शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त यानी सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटे पहले का समय सबसे श्रेष्ठ माना गया है, पर आज की जिंदगी में हर किसी के लिए यह संभव नहीं है। जितने बजे भी उठें, आँख खुलते ही वाले मंत्र बोल सकते हैं। समय से ज्यादा जरूरी है नियमितता, इसलिए अपनी दिनचर्या के अनुसार एक समय तय करके रोज़ वहीं मंत्र जाप करें।
प्रश्न: कौन सा मंत्र सबसे शक्तिशाली माना जाता है?
उत्तर: हर मंत्र का अपना अलग महत्व है और किसी एक को सबसे शक्तिशाली बताना ठीक नहीं होगा। गायत्री को वेदों की जननी कहा गया है, ॐ नमः शिवाय को पंचाक्षर मंत्र की श्रेणी में रखा गया है और राम नाम को सबसे सरल साधन माना गया है। आप जिस देवता में श्रद्धा रखते हैं, उसका मंत्र आपके लिए सबसे फलदायक रहेगा, क्योंकि भक्ति भाव से बड़ा कोई उपाय नहीं माना गया।
प्रश्न: बच्चों को कौन से मंत्र याद कराने चाहिए?
उत्तर: बच्चों के लिए छोटे मंत्र सबसे अच्छे रहते हैं जिन्हें वे जल्दी याद कर लें। ॐ का उच्चारण, राम नाम, ॐ नमः शिवाय और हनुमान जी के छोटे मंत्र से शुरुआत की जा सकती है। गायत्री मंत्र थोड़ा लंबा है, इसलिए उसे धीरे धीरे, अर्थ समझाते हुए याद कराएँ। बच्चों को मंत्र का अर्थ बताना जरूरी है ताकि वह यांत्रिक रटना न बने।
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सुबह के मंत्र, उनका अर्थ और पूजा की पूरी विधि Sanatan Seva app में एक जगह मिल जाती है। अगर जाप की गिनती रखनी हो तो app का जाप काउंटर बहुत काम आता है, और पूजा के समय की याद भी app दिला देती है।
