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हनुमान मंत्र: प्रमुख मंत्र और जाप विधि

22 अक्टूबर 20267 मिनट में पढ़ेंMantra & Jap
हनुमान मंत्र: प्रमुख मंत्र और जाप विधि

हनुमान जी के प्रमुख मंत्र और उनका अर्थ जानें। मंगलवार और शनिवार के लिए हनुमान मंत्र, जाप विधि और नियम सरल हिंदी में।

हनुमान जी की उपासना सबसे सरल और सबसे लोकप्रिय उपासनाओं में से एक है। बजरंगबली को अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाला देव माना गया है। कलियुग में जहाँ अधिकांश देव पूजा कठिन नियमों से जुड़ी बताई गई है, वहीं हनुमान जी को सिर्फ स्मरण से प्रसन्न होने वाला कहा गया है।

हनुमान जी के मंत्रों की संख्या बहुत है, पर रोज की उपासना के लिए कुछ प्रमुख मंत्र ही प्रचलन में हैं। मंगलवार और शनिवार इनकी पूजा के विशेष दिन माने गए हैं, पर बजरंगबली की भक्ति किसी दिन से नहीं बाँधी गई है। यहाँ वही प्रचलित मंत्र सरल अर्थ के साथ दिए जा रहे हैं।

हनुमान जी के प्रमुख मंत्र

हनुमान उपासना में सबसे अधिक प्रचलित दो छोटे मंत्र ये हैं। इनका जाप बड़ा आसान है और इन्हें बच्चे भी जल्दी याद कर लेते हैं।

ॐ हं हनुमते नमः

अर्थ: हं हनुमान जी का बीज अक्षर है, इस मंत्र का भाव है हनुमान जी को बारंबार नमन।

ॐ श्री हनुमते नमः

अर्थ: श्री से युक्त हनुमान जी को नमस्कार। यह शुभता और शक्ति दोनों का द्योतक है।

थोड़े विस्तृत रूप में जो मंत्र हनुमान जी के स्वरूप का पूरा वर्णन करता है, वह यह है। इसे बजरंग बाण या चालीसा से पहले पढ़ने की परंपरा है।

मनोजवं मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

अर्थ: मन की गति के समान वेगवान, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वायु के पुत्र, वानरों के सरदार और श्रीराम के दूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।

हनुमान चालीसा का महत्व

हनुमान चालीसा चालीस चौपाइयों का वह पाठ है जिसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने रचा था। मान्यता है कि इसके नियमित पाठ से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और भक्त के संकट दूर होते हैं। चालीसा का पाठ कोई भी किसी भी दिन कर सकता है, पर मंगलवार और शनिवार को इसका विशेष महत्व बताया गया है।

चालीसा के अलावा सुंदरकांड का पाठ भी हनुमान उपासना का बड़ा हिस्सा है। रामचरितमानस का यह कांड हनुमान जी की शक्ति और भक्ति की गाथा है, जिसके पाठ की परंपरा घरों और मंदिरों दोनों में चली आ रही है। संकट के समय सुंदरकांड का पाठ कराने की परंपरा उत्तर भारत में व्यापक है।

जाप की विधि

हनुमान जी की पूजा में दृढ़ता का विशेष महत्व है, इसलिए सोमवार से शुरू करके नियम बनाना अच्छा रहता है। जो भक्त कुछ नियम बनाकर चलते हैं, जैसे रोज एक पाठ या मंगलवार शनिवार का व्रत, उनकी उपासना में स्थिरता आ जाती है। छोटे बच्चों के साथ मिलकर चालीसा पढ़ने की आदत डालें, इससे घर में भक्ति का वातावरण भी बनता है और बच्चों का उच्चारण भी सुधरता है।

1. प्रातः स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। हनुमान जी को रंग लाल प्रिय माना गया है, इसलिए लाल वस्त्र हो तो शुभ माना जाता है।

2. हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठकर सिंदूर और चमेली के तेल का दीपक जलाएँ। सिंदूर का छोटा चोला अर्पित करें।

3. पहले श्रीराम जी का स्मरण करें, क्योंकि हनुमान जी राम नाम से सबसे अधिक प्रसन्न होते माने गए हैं।

4. इसके बाद ॐ हं हनुमाते नमः का 11, 21 या 108 बार जाप करें, या हनुमान चालीसा का पाठ करें।

5. बूंदी के लड्डू या गुड़ और चने का भोग लगाएँ और प्रसाद बाँटें। मंगलवार को यह पूरी विधि करने का विशेष विधान है।

कौन किस मंत्र का जाप करे

हनुमान जी के मंत्रों की एक विशेषता यह है कि हर वर्ग के भक्त के लिए कोई न कोई मार्ग बताया गया है। पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए छोटे बीज मंत्र का जाप और चालीसा का पाठ उपयुक्त माना गया है, क्योंकि हनुमान जी को बुद्धि और विद्या का स्वामी भी कहा गया है।

जो लोग डर या असहज भाव से गुजर रहे हों, उनके लिए मनोजवं मारुततुल्यवेगम् मंत्र का जाप और चालीसा का नियमित पाठ बताया गया है। कार्यक्षेत्र में संघर्ष कर रहे लोग रोज सुबह चालीसा पढ़कर दिन की शुरुआत करते हैं। बच्चों को सबसे पहले ॐ हं हनुमते नमः सिखाने की परंपरा है, यह छोटा और सरल है।

आरती और भजन का महत्व

हनुमान जी की उपासना केवल मंत्र जाप तक सीमित नहीं रही। आरती और भजन इस परंपरा के उतने ही महत्वपूर्ण हिस्से हैं। मंगलवार और शनिवार की संध्या पर हनुमान मंदिरों में जो वातावरण बनता है, वह चालीसा और भजनों की शक्ति से बनता है। आरती सुनते हुए या साथ गाते हुए मन का भाव जागता है, जो कभी कभी घंटों के जाप से भी नहीं उठता।

जो लोग भजन नहीं गा सकते, वे सुनने की परंपरा में शामिल हो सकते हैं। रामायण के पाठ, हनुमान जन्मोत्सव की सभाएँ और अयोध्या की रामलीला जैसे आयोजन इसी भक्ति के विस्तार हैं। घर पर संध्या के समय चालीसा का पाठ या हनुमान जी का भजन चलाना भी स्वीकार्य रहा है। सुनने और गाने दोनों में एक ही भाव काम करता है, श्रद्धा।

जाप से जुड़ी मान्यताएँ

• मान्यता है कि हनुमान जी के जाप से भय और अशुभ स्वप्नों का प्रभाव घटता है।

• शनि की साढ़े साती जैसे कालों में हनुमान उपासना का सहारा लिया जाता रहा है, क्योंकि शनि और हनुमान जी की मैत्री का उल्लेख परंपरा में मिलता है।

• संकटमोचन के नाम से प्रसिद्ध हनुमान जी को याद करने भर से हिम्मत लौट आने का अनुभव भक्तों ने कई बार बताया है।

• मान्यता है कि जिस घर में रोज हनुमान चालीसा या बजरंग गायत्री का पाठ होता है, वहाँ नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नहीं टिकता।

• असली फल उस जाप का माना गया है जो बिना किसी स्वार्थ के, केवल भक्ति भाव से किया जाए।

बजरंग बाण जैसे तीखे पाठ की परंपरा किसी जानकार आचार्य या घर के बुज़ुर्ग के मार्गदर्शन में ही चलाना उचित माना जाता है, क्योंकि इसके अपने विशिष्ट नियम हैं। सामान्य भक्ति के लिए चालीसा और छोटे मंत्रों का जाप सर्वथा पर्याप्त माना गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: हनुमान जी का मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

उत्तर: 108 बार यानी एक माला का जाप परंपरा में पूर्ण माना गया है। शुरुआत करने वाले 11 या 21 बार जप सकते हैं। गिनती के साथ साथ भाव पर ध्यान दें, यही जाप की आत्मा मानी गई है।

प्रश्न: हनुमान मंत्र का जाप किस दिन करें?

उत्तर: किसी भी दिन किया जा सकता है, पर मंगलवार और शनिवार को इसका विशेष महत्व बताया गया है। मंगलवार को हनुमान जी को समर्पित माना गया है और शनिवार को शनि दोष शांति के साथ हनुमान उपासना की परंपरा है।

प्रश्न: क्या रात में हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं?

उत्तर: जी हाँ, हनुमान चालीसा किसी भी समय पढ़ी जा सकती है। शाम के समय या रात में सोने से पहले इसका पाठ करने वाले बहुत से भक्त हैं। कुछ लोग मंगलवार और शनिवार की रात विशेष पाठ करते हैं।

प्रश्न: हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाते हैं?

उत्तर: परंपरा के अनुसार हनुमान जी ने सीता माता के सिंदूर के प्रति भाव को देखकर अपने शरीर पर सिंदूर लगा लिया था, क्योंकि सीता माता वह सिंदूर श्रीराम की दीर्घायु के लिए लगाती थीं। तब से सिंदूर हनुमान जी को अति प्रिय माना गया है।

प्रश्न: क्या बिना स्नान के हनुमान मंत्र जप सकते हैं?

उत्तर: जाप से पहले स्नान करना श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि शुद्धता भक्ति का पहला नियम है। पर यदि किसी कारण से स्नान नहीं हो पा रहा है तो मन की शुद्धि के साथ स्मरण किया जा सकता है। हनुमान जी को भाव का पुजारी माना गया है, रूप का नहीं।

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