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शनिवार हनुमान पूजा की विधि

28 जुलाई 20266 मिनट में पढ़ेंDaily Bhakti
शनिवार हनुमान पूजा की विधि

शनिवार को हनुमान जी की पूजा कैसे करें? जानें शनिवार की विधि, सिंदूर और चोला, भोग और मंत्र।

शनिवार का दिन हनुमान जी और शनि देव दोनों की उपासना से जुड़ा है। परंपरा में शनि देव के साथ हनुमान जी की पूजा करने का विशेष विधान है, क्योंकि हनुमान जी और शनि देव की मैत्री का उल्लेख पुराणों में मिलता है। इसीलिए शनि से जुड़ी परेशानियों में शनिवार को हनुमान उपासना का सहारा लिया जाता रहा है।

शनिवार की शाम हनुमान मंदिरों में विशेष भीड़ दिखती है। सिंदूर अर्पण, चमेली के तेल का दीपक, चालीसा का पाठ और सुंदरकांड का आयोजन, यह सब शनिवार की पहचान है। इस दिन शनि मंदिरों में भी पूजा होती है और तेल के दान की परंपरा है।

शनिवार की पूजा विधि

1. शनिवार की सुबह स्नान के बाद हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें। काले या लाल वस्त्र की परंपरा शनिवार को है।

2. चमेली या सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। शनिवार को तेल का दीपक जलाने का विशेष विधान है।

3. हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करें। सिंदूर में थोड़ा चमेली का तेल मिलाकर अर्पण करने की परंपरा है।

4. ॐ हं हनुमते नमः का जाप करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। सुंदरकांड का पाठ भी शनिवार को प्रचलित है।

5. गुड़ चने या बूंदी का भोग लगाएँ और प्रसाद बाँटें।

6. हनुमान आरती करें। संभव हो तो शनि मंदिर जाकर शनि देव को तेल अर्पित करें और दान करें।

पूजा का मुख्य मंत्र

ॐ हं हनुमते नमः

अर्थ: हनुमान जी के बीज अक्षर हं के साथ उन्हें नमन। शनिवार जाप का प्रचलित मंत्र।

हनुमान और शनि की मैत्री

पौराणिक कथा के अनुसार रावण ने शनि देव को बंदी बना लिया था। जब हनुमान जी सुंदरकांड में लंका पहुँचे, तो उन्होंने शनि देव को रावण के बंधन से मुक्त कराया। कृतज्ञ शनि देव ने हनुमान जी से कहा कि जो भक्त आपकी उपासना करेगा, मैं उस पर अपना अशुभ प्रभाव नहीं डालूँगा।

तब से शनि से जुड़ी परेशानियों में हनुमान उपासना का सहारा लिया जाता रहा है। साढ़े साती, ढैया और शनि की महादशा जैसे कालों में भक्त शनिवार को हनुमान जी की पूजा, चालीसा पाठ और सुंदरकांड पाठ करते हैं। हनुमान जी को शनि दोष शांति का उपाय बताया गया है।

शनिवार के नियम

• शनिवार को तेल का दीपक जलाने का विशेष विधान है, चमेली या सरसों के तेल का प्रयोग करें।

• इस दिन काले तिल, तेल, काले वस्त्र, लोहे और उड़द का दान शुभ माना गया है।

• शनिवार को बाल काटने, नाखून काटने और कपड़े खरीदने से बचने की मान्यता प्रचलित है।

• हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण जैसे पाठ शनिवार को विशेष फलदायक माने गए हैं, बजरंग बाण के लिए मार्गदर्शन लें।

• शाम को हनुमान मंदिर की आरती में शामिल होना शनिवार की शोभा है।

शनि मंदिर की पूजा

शनिवार को शनि मंदिरों में भी विशेष पूजा होती है। शनि देव को सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाकर अर्पित किया जाता है। काले तिल, उड़द, लोहे और काले वस्त्र का दान की परंपरा है। शनि देव को जुड़े भोग में सरसों के तेल में भिगोई रोटी और काले तिल की खिचड़ी अर्पित की जाती है।

प्रसिद्ध शनि मंदिरों में शनि शिंगणापुर महाराष्ट्र का स्थान सबसे ऊपर है। यहाँ शनि देव का स्वरूप स्वयंभू काले पाषाण का है। दिल्ली का शनि मंदिर, राजस्थान का श्री शनि धाम और तमिलनाडु का तिरुनल्लर शनि मंदिर भी प्रसिद्ध हैं। शनिवार को इन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ लगती है।

शनिवार का व्रत

शनिवार व्रत हनुमान जी और शनि देव दोनों के निमित्त रखा जाता है। सुबह स्नान के बाद पूजा करके संकल्प लें। दिनभर फलाहार या एक समय सात्विक भोजन की परंपरा है। कुछ भक्त उड़द दाल और तिल का त्याग करते हैं। शाम को पुनः पूजा करके व्रत खोला जाता है।

शनिवार व्रत की कथा में एक भक्त की गाथा है जिसने नियम से व्रत रखा और उसकी कठिनाइयाँ दूर हुईं। व्रत के साथ दान का महत्व विशेष बताया गया है, विशेषकर तेल और काले तिल का दान। जो लोग व्रत नहीं रख सकते वे केवल पूजा, चालीसा पाठ और दान से दिन का भाव निभा सकते हैं।

सुंदरकांड पाठ की परंपरा

शनिवार की रात सुंदरकांड पाठ का आयोजन उत्तर भारत में बहुत प्रचलित है। सुंदरकांड रामचरितमानस का वह कांड है जिसमें हनुमान जी की लंका यात्रा की गाथा है। मान्यता है कि इसके पाठ से संकट दूर होते हैं और हनुमान जी की कृपा बनी रहती है।

सुंदरकांड पाठ घर पर भी किया जा सकता है और मंदिरों में आयोजित सामूहिक पाठ में भी शामिल हो सकते हैं। जो लोग स्वयं पाठ करने में असमर्थ हों, वे सुन सकते हैं। सुंदरकांड पाठ के बाद हनुमान आरती और प्रसाद वितरण की परंपरा है। शनि से जुड़ी कठिनाइयों में तो सुंदरकांड पाठ को विशेष उपाय माना गया है।

ध्यान रखने वाली बातें

शनिवार की पूजा में हनुमान जी के साथ श्रीराम का स्मरण रखें। पूजा के समय क्रोध और व्यर्थ वाणी से बचें, क्योंकि शनि को कर्म का देवता माना गया है और आचरण पर उसकी दृष्टि बताई गई है। तेल के दीपक के साथ सावधानी रखें।

दान करते समय जरूरतमंद को ही दें और श्रद्धा से दें। शनि से जुड़ी मान्यताओं को अंधविश्वास न बनने दें, परिश्रम का महत्व हमेशा याद रखें। शनि देव को न्याय के देवता माना गया है, इसलिए इस दिन सच्चाई और न्याय के रास्ते पर चलने का संकल्प लेना इस उपासना का व्यावहारिक सार है।

शनिवार की पूजा परंपराओं में क्षेत्रीय अंतर रहता है। दक्षिण भारत में शनि की पूजा का अपना क्रम है और उत्तर भारत में हनुमान पूजा की प्रधानता है। साढ़े साती जैसे विशिष्ट कालों से जुड़े अनुष्ठानों के लिए जानकार आचार्य से परामर्श लेना उचित रहता है। सामान्य भक्ति में सिंदूर अर्पण, तेल दीपक और चालीसा पाठ पर्याप्त माने गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: शनिवार को हनुमान जी की पूजा कैसे करें?

उत्तर: सुबह स्नान के बाद हनुमान जी के सामने चमेली या सरसों के तेल का दीपक जलाएँ, सिंदूर अर्पित करें, ॐ हं हनुमते नमः का जाप और चालीसा पाठ करें, गुड़ चने का भोग लगाएँ और आरती करें। संभव हो तो शनि मंदिर में तेल अर्पण करें।

प्रश्न: शनिवार को हनुमान जी की पूजा क्यों करते हैं?

उत्तर: पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी ने रावण के बंधन से शनि देव को मुक्त कराया था, तब शनि देव ने वरदान दिया कि हनुमान जी की उपासना करने वालों पर उनका अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा। इसीलिए शनि से जुड़ी परेशानियों में शनिवार को हनुमान उपासना की जाती है।

प्रश्न: शनिवार को क्या दान करते हैं?

उत्तर: शनिवार को सरसों या तिल का तेल, काले तिल, उड़द, काले वस्त्र और लोहे की वस्तुओं का दान शुभ माना गया है। ये वस्तुएँ शनि देव से जुड़ी मान्यताएँ रखती हैं। दान श्रद्धा से और जरूरतमंद को करें।

प्रश्न: शनिवार को क्या नहीं करते?

उत्तर: प्रचलित मान्यताओं में शनिवार को बाल काटना, नाखून काटना और नए कपड़े खरीदना अशुभ माना गया है। तेल का दान करना शुभ है, तेल उधार देने से बचने की मान्यता भी कही जाती है। ये लोक मान्यताएँ हैं, श्रद्धा के अनुसार निभाएँ।

प्रश्न: सुंदरकांड पाठ कब और क्यों करते हैं?

उत्तर: सुंदरकांड रामचरितमानस का कांड है जिसमें हनुमान जी की लंका यात्रा की गाथा है। शनिवार और मंगलवार की रात इसके पाठ का विशेष प्रचलन है। मान्यता है कि संकट के समय सुंदरकांड पाठ से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और कठिनाइयाँ दूर होती हैं।

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