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रामचरितमानस के 7 कांड: सरल परिचय

11 अगस्त 20268 मिनट में पढ़ेंKatha & Scriptures
रामचरितमानस के 7 कांड: सरल परिचय

रामचरितमानस के 7 कांडों का सरल परिचय जानें। हर कांड का नाम और उसमें वर्णित कथा का सार।

रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य है जो श्रीराम के चरित का काव्यात्मक वर्णन है। इसे रामायण का अवधी भाषा में रचा गया रूप कहा जाता है, जो वाल्मीकि रामायण पर आधारित है पर अपनी अलग भक्ति भावना और लोक परंपरा से संपन्न है। सात कांडों में विभाजित यह ग्रंथ उत्तर भारत की सबसे पूजी जाने वाली पुस्तकों में है।

मानस का पाठ घरों, मंदिरों और आश्रमों में निरंतर होता रहता है। रामचरितमानस के सात कांडों में संपूर्ण राम कथा इस तरह बाँधी गई है कि हर कांड एक विशेष भाव की गाथा बन जाता है। यहाँ सातों कांडों का सरल परिचय दिया गया है, जिससे पाठ करने वालों को कथा का क्रम स्पष्ट हो जाए।

बालकांड: श्रीराम का जन्म और बाल लीला

मानस का पहला कांड बालकांड है जिसमें श्रीराम के जन्म से लेकर विवाह तक की कथा है। इसमें अयोध्या के राजा दशरथ की पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ, वशिष्ठ के आश्रम की शिक्षा, ताड़का वध, अहल्या उद्धार, जनकपुरी में धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर का वर्णन है। नाम महिमा का प्रसंग भी बालकांड में ही है।

बालकांड में श्रीराम के बाल स्वरूप की माधुर्य का वर्णन भक्तों को बहुत प्रिय है। वत्सल्य रस से भरा यह कांड माताओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है। कैवल्य देने वाले राम नाम की महिमा और भक्ति के स्वरूप का उपदेश भी इसी कांड की देन है।

अयोध्याकांड: वन गमन

दूसरा कांड अयोध्याकांड है जिसमें राम के वन गमन की कथा है। दशरथ के वचन निभाने के लिए कैकेयी के वरदान, राम का राज्य त्याग, सीता और लक्ष्मण का साथ देना, दशरथ का वियोग और भरत का राम को वापस बुलाने का प्रयास, इस कांड की मुख्य घटनाएँ हैं।

अयोध्याकांड मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र का सबसे बड़ा प्रदर्शन है। पिता के वचन के लिए राज्य का त्याग और भरत का चौदह वर्ष के लिए पादुका की स्थापना करके निष्ठा निभाना, ये प्रसंग मर्यादा और त्याग की सीख देते हैं। विरह और स्नेह का भाव इस कांड को भावपूर्ण बनाता है।

अरण्यकांड: वन में लीला और सीता हरण

तीसरा कांड अरण्यकांड है जिसमें राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास की घटनाएँ हैं। पंचवटी में निवास, शूर्पणखा का प्रसंग, खर दूषण का वध और रावण द्वारा मारीच के सोने हिरन के रूप में जाल, ये घटनाएँ इस कांड में आती हैं। सीता हरण इस कांड की सबसे बड़ी घटना है।

अरण्यकांड में जटायु का राम के प्रति स्नेह और रावण से युद्ध करते हुए बलिदान भावुक कर देता है। शबरी का बेर अर्पण करने का प्रसंग भी अरण्यकांड का ही है, जो भक्ति में भाव की श्रेष्ठता का सबसे बड़ा उदाहरण बना। राम द्वारा शबरी के बेर खाना भक्ति की सर्वोच्च मिसाल है।

किष्किंधाकांड: हनुमान जी से भेंट

चौथा कांड किष्किंधाकांड है जिसमें राम की हनुमान जी से भेंट होती है। सुग्रीव के साथ मैत्री, बाली का वध और सुग्रीव का राज्याभिषेक इस कांड की घटनाएँ हैं। राम और हनुमान की भेंट इस कांड का सबसे भावपूर्ण प्रसंग माना जाता है।

हनुमान जी के रूप में राम को अपना श्रेष्ठ भक्त मिला, इस प्रसंग को तुलसीदास जी ने अत्यंत माधुर्य से लिखा है। वानर सेना द्वारा सीता जी की खोज का आदेश और समुद्र किनारे जाम्वंत द्वारा हनुमान जी की शक्ति का स्मरण कराना, ये प्रसंग किष्किंधाकांड से जुड़ते हैं और सुंदरकांड का मार्ग बनाते हैं।

सुंदरकांड: हनुमान जी की लंका यात्रा

पाँचवाँ कांड सुंदरकांड है जो पूरा हनुमान जी की वीरता और भक्ति की गाथा है। समुद्र को लाँघना, लंका में प्रवेश, सीता जी को खोजना, अशोक वाटिका में सीता जी से भेंट, राम की अँगूठी देना, लंका की सेना का वध और पूंछी में आग लगाकर लंका जलाना, ये सब प्रसंग सुंदरकांड में हैं।

सुंदरकांड को मानस का सबसे प्रचलित कांड माना जाता है और इसका स्वतंत्र पाठ विशेष फलदायक माना गया है। संकट के समय सुंदरकांड का पाठ कराने की परंपरा उत्तर भारत में व्यापक है। हनुमान जी की शक्ति, बुद्धि और राम के प्रति अनन्य भक्ति का सुंदर वर्णन इस कांड की पहचान है। भँवरे को संदेश ले जाने का प्रसंग भी इसी कांड में है।

लंकाकांड: रावण के साथ युद्ध

छठा कांड लंकाकांड या युद्धकांड है जिसमें राम और रावण के बीच युद्ध का वर्णन है। समुद्र पर सेतु बंधन, विभीषण का राम की शरण में आना, कुंभकरण और मेघनाद का वध, रावण का वध और सीता जी का अग्नि परीक्षा के बाद राम को मिलना, ये घटनाएँ इस कांड में हैं।

लंकाकांड में राम की विजय का उल्लास है और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश है। समुद्र को लाँघकर बने सेतु का निर्माण और विभीषण को शरण देने का प्रसंग राम के उदार स्वभाव का परिचय देता है। यह कांड वीर रस से भरा है और राम के पराक्रम का वर्णन करता है।

उत्तरकांड: अयोध्या वापसी और लवकुश

सातवाँ और अंतिम कांड उत्तरकांड है। इसमें पुष्पक विमान से अयोध्या की वापसी, राम राज्य का सुख, सीता जी का वनवास, वाल्मीकि आश्रम में लव और कुश का जन्म और पालन, अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को रोकने पर लव कुश का राम सेना से युद्ध और अंत में सीता जी का धरती में समा जाना और राम का जल समाधि लेना, ये प्रसंग वर्णित हैं।

उत्तरकांड कथा का समापन है और इसमें अनेक भावुक प्रसंग हैं। राम राज्य का आदर्श इसी कांड में वर्णित है, जो रामराज्य शब्द का स्रोत है। इस कांड में राम के मर्यादा पालन की कठिन परीक्षाएँ और अंतिम विरह का भाव भक्तों को भावुक करता है।

मानस पाठ की परंपरा

• मानस का नित्य पाठ करने वाले भक्तों की संख्या बड़ी है, जिसमें एक कांड या निश्चित दोहे चौपाई की परंपरा है।

• सुंदरकांड का स्वतंत्र पाठ संकट के समय विशेष फलदायक माना गया है।

• अखंड मानस पाठ की परंपरा में एक दिन में पूरे मानस का पाठ होता है।

• राम नवमी पर अखंड पाठ और रामायण पाठ के आयोजन होते हैं।

• मानस के पाठ के साथ संगीत और कीर्तन की परंपरा भी प्रचलित है।

मानस की भाषा और स्वरूप

मानस अवधी भाषा में रचा गया है और इसकी छंद रचना संगीतात्मक है। इसमें दोहे और चौपाइयाँ मुख्य हैं, साथ में सोरठे और छंद भी हैं। भाषा सरल और गेय होने के कारण पाठ करने वाले को कंठस्थ करना आसान लगता है। मानस का पाठ सुनने का अपना अलग आनंद है, इसीलिए प्रवचन और कथा वाचन की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

मानस के पाठ के लिए सरल अर्थ सहित संस्करण उपलब्ध हैं, जिनसे अर्थ समझकर पाठ किया जा सकता है। बच्चों को छोटे दोहे और प्रचलित चौपाइयाँ सिखाने से शुरुआत होती है। मानस के प्रवचन आज भी शहरों और कस्बों में नियमित होते हैं, जहाँ भक्त सुनने जाते हैं।

मानस के कुछ प्रसंगों की व्याख्या परंपराओं में अलग अलग ढंग से की जाती रही है। पाठ के समय भाव पर ध्यान दें और संदेह हो तो किसी जानकार आचार्य से पूछें। मानस पाठ के विधि विधान में परिवार और संप्रदाय की परंपराएँ अलग हो सकती हैं, अपनी परंपरा के अनुसार पाठ करें। ग्रंथ को सम्मान से रखें और पाठ के स्थान की शुद्धता का ध्यान रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: रामचरितमानस के कितने कांड हैं?

उत्तर: रामचरितमानस में सात कांड हैं, बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड। हर कांड में श्रीराम के जीवन की एक विशेष अवधि की कथा है।

प्रश्न: रामचरितमानस किसने लिखा?

उत्तर: रामचरितमानस की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने सोलहवीं शताब्दी में अवधी भाषा में की थी। यह वाल्मीकि रामायण पर आधारित है पर अपनी भक्ति भावना और लोक परंपरा से संपन्न है। तुलसीदास जी हनुमान चालीसा के रचयिता भी हैं।

प्रश्न: रामचरितमानस का सबसे महत्वपूर्ण कांड कौन सा है?

उत्तर: सुंदरकांड को सबसे प्रचलित और फलदायक माना गया है, जिसमें हनुमान जी की लंका यात्रा की गाथा है। इसका स्वतंत्र पाठ संकट के समय किया जाता है। बालकांड का नाम महिमा प्रसंग और उत्तरकांड का राम राज्य वर्णन भी विशेष महत्व रखते हैं।

प्रश्न: मानस पढ़ने का सही तरीका क्या है?

उत्तर: रोज एक निश्चित अंश पढ़ने की परंपरा में मानस क्रम से पढ़ा जाता है। सरल अर्थ सहित संस्करण से भाव समझना चाहिए। संकट के समय सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। अखंड पाठ में एक दिन में पूरा मानस पढ़ा जाता है। पाठ के साथ प्रवचन सुनना भी परंपरा का हिस्सा है।

प्रश्न: सुंदरकांड का पाठ क्यों किया जाता है?

उत्तर: सुंदरकांड में हनुमान जी की वीरता, बुद्धि और राम भक्ति की गाथा है। मान्यता है कि इसके पाठ से संकट दूर होते हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। इसीलिए संकट के समय घरों और मंदिरों में सुंदरकांड पाठ कराया जाता है। मंगलवार और शनिवार के पाठ का प्रचलन विशेष है।

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