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मंगलवार हनुमान पूजा की विधि

31 अगस्त 20267 मिनट में पढ़ेंBhagwan
मंगलवार हनुमान पूजा की विधि

मंगलवार को हनुमान जी की पूजा कैसे करें? जानें पूजा विधि, सिंदूर चढ़ाने का नियम, चोला और भोग की जानकारी।

मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन हनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड लग जाती है। सिंदूर से रंगे बजरंगबली के सामने दीपक जलाकर, चोला चढ़ाकर और चालीसा पढ़कर भक्त अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। मंगलवार की यह पूजा संकटमोचन की पूजा मानी गई है।

हनुमान जी को जल्दी प्रसन्न होने वाला देव माना गया है और उनकी पूजा में बाध्यताएँ कम हैं। घर पर उनके चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाकर और चालीसा पढ़कर भी पूरी पूजा हो जाती है। मंगलवार के दिन थोड़ी सी सावधानी और श्रद्धा से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है, ऐसी मान्यता है।

पूजा की सामग्री

• सिंदूर, चमेली का तेल और लाल वस्त्र या चोला।

• लाल पुष्प, गुड़ और चने का भोग या बूंदी के लड्डू।

• घी या चमेली के तेल का दीपक और अगरबत्ती।

• हनुमान चालीसा या सुंदरकांड की पुस्तक।

• प्रसाद के लिए गुड़, चना और मिठाई।

पूजा का मुख्य मंत्र

ॐ हं हनुमते नमः

अर्थ: हनुमान जी के बीज अक्षर हं के साथ उन्हें नमन। मंगलवार पूजा का प्रचलित जाप मंत्र।

पूजा की विधि

1. मंगलवार की सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। लाल रंग का वस्त्र हो तो शुभ माना जाता है।

2. हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठकर चमेली के तेल का दीपक जलाएँ। दीपक को सिंदूर से टीका लगाएँ।

3. हनुमान जी को सिंदूर का चोला अर्पित करें और लाल पुष्प चढ़ाएँ।

4. ॐ हं हनुमते नमः का 11, 21 या 108 बार जाप करें या हनुमान चालीसा का पाठ करें।

5. गुड़ और चने या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएँ। भोग के बाद प्रसाद बाँटें।

6. अंत में हनुमान जी से मनोकामना की प्रार्थना करें और प्रणाम करें। बजरंगबली को दण्डवत प्रणाम करने की परंपरा भी है।

सिंदूर चढ़ाने का महत्व

हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सीता माता अपने माथे पर सिंदूर लगा रही थीं। हनुमान जी ने पूछा कि माता यह क्या है। माता ने बताया कि यह श्रीराम की दीर्घायु के लिए सिंदूर लगाया जाता है।

यह सुनते ही हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया और कहा कि जिस छोटे से सिंदूर से प्रभु की आयु बढ़ती है, उसका पूरा शरीर भर दूँ तो प्रभु अमर हो जाएँ। श्रीराम ने यह भाव देखकर वरदान दिया कि जो भक्त हनुमान को सिंदूर अर्पित करेगा, उसकी कामना पूरी होगी। तब से सिंदूर हनुमान पूजा का आधार बना।

मंगलवार का व्रत

मंगलवार का व्रत हनुमान जी के निमित्त रखा जाता है। व्रत में सुबह स्नान के बाद हनुमान पूजा करना और दिनभर फलाहार रखना सामान्य नियम है। कुछ भक्त निर्जला व्रत रखते हैं और शाम को पूजा के बाद व्रत खोलते हैं। व्रत के साथ चालीसा का पाठ और सुंदरकांड का पाठ या सुनना परंपरा का हिस्सा है।

मंगलवार के व्रत में गुड़ और चने का भोग विशेष प्रचलित है। व्रत के दिन भी मसालेदार और तामसिक भोजन से बचा जाता है। जो लोग व्रत नहीं रख सकते, वे केवल पूजा और चालीसा पाठ से दिन की श्रद्धा पूरी करते हैं, जो परंपरा में स्वीकार्य है।

मंगलवार की मान्यताएँ

• मान्यता है कि मंगलवार की हनुमान पूजा से संकट दूर होते हैं और मनोबल बढ़ता है।

• शनि संबंधी परेशानियों में मंगलवार और शनिवार दोनों दिन हनुमान उपासना का सहारा लिया जाता रहा है।

• मंगल ग्रह की शांति से भी हनुमान उपासना जोड़ी गई है, इसलिए विवाह संबंधी बाधाओं में मंगलवार पूजा का प्रचलन है।

• विद्यार्थी मंगलवार को हनुमान जी की कृपा से एकाग्रता की कामना करते हैं।

• चालीसा के 108 बार पाठ का विशेष विधान कठिन संकटों के समय बताया गया है, जो आचार्य के मार्गदर्शन में हो।

घर पर और मंदिर में

मंगलवार की पूजा को घर की दिनचर्या में जोड़ने का सीधा तरीका है इस दिन को सप्ताह का विशेष दिन बना देना। सुबह निकलते समय हनुमान मंदिर के दर्शन कर लेना या शाम को दीपक जलाकर चालीसा पढ़ लेना, दोनों में से जो संभव हो उसे अपना लें। इतना ही छोटा नियम भी मंगलवार को अन्य दिनों से अलग बना देता है।

घर पर हनुमान जी की पूजा के लिए उनका चित्र या मूर्ति पूजा स्थल पर रखी जाती है। कुछ परिवारों में हनुमान जी की प्रतिमा घर के मुख्य द्वार के पास रखने की परंपरा है। मंगलवार और शनिवार को घर पर विशेष पूजा होती है और चालीसा का सामूहिक पाठ किया जाता है।

मंदिर में मंगलवार की शाम को विशेष आरती होती है। सिंदूर और चमेली के तेल से सजे हनुमान जी के दर्शन इस दिन की शोभा हैं। बड़े हनुमान मंदिरों में बुधवार की रात सुंदरकांड पाठ की परंपरा भी प्रचलित है। संकट मोचन मंदिर जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में मंगलवार की भीड़ देखते ही बनती है।

ध्यान रखने वाली बातें

मंगलवार की पूजा में कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है। इस दिन क्रोध और व्यर्थ वाणी से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि हनुमान जी ब्रह्मचारी और वाणी के स्वामी माने गए हैं। पूजा के समय मन में श्रीराम का स्मरण रखें, क्योंकि हनुमान जी राम नाम से सबसे अधिक प्रसन्न होते माने गए हैं।

हनुमान जी को अर्पित वस्तुएँ शुद्ध और साफ हों। सिंदूर अच्छा हो और तेल ताज़ा हो। भोग में गुड़ और चना सबसे प्रचलित है। प्रसाद को सम्मान से बाँटें। बच्चों को चालीसा का पाठ सिखाना मंगलवार की पूजा का सुंदर अंग है, जिससे उन्हें बचपन से ही संकटमोचन की श्रद्धा मिलती है।

मंगलवार पूजा की परंपराएँ अलग अलग क्षेत्रों में थोड़ी भिन्न हैं। कहीं व्रत का नियम कठोर है और कहीं सरल। बजरंग बाण जैसे पाठ कुछ परंपराओं में विशेष नियमों से पढ़े जाते हैं, उनके लिए जानकार मार्गदर्शन लें। सामान्य भक्ति के लिए चालीसा, छोटे मंत्र और सिंदूर अर्पण पर्याप्त माने गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: मंगलवार को हनुमान जी की पूजा कैसे करें?

उत्तर: सुबह स्नान के बाद हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएँ, सिंदूर का चोला चढ़ाएँ, लाल पुष्प अर्पित करें, ॐ हं हनुमते नमः का जाप या चालीसा का पाठ करें और गुड़ चने या बूंदी का भोग लगाकर प्रसाद बाँटें। शाम को पुनः आरती करें।

प्रश्न: हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाते हैं?

उत्तर: कथा के अनुसार सीता माता के माथे का सिंदूर देखकर हनुमान जी ने पूछा और जाना कि वह श्रीराम की दीर्घायु के लिए लगाया जाता है। तब उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा दिया। श्रीराम ने वरदान दिया कि सिंदूर अर्पित करने वाले भक्त की कामना पूरी होगी। तब से सिंदूर हनुमान पूजा का मुख्य अर्पण है।

प्रश्न: मंगलवार को क्या भोग लगाते हैं?

उत्तर: गुड़ और भुने चने का भोग हनुमान जी को सबसे प्रचलित भोग है। बूंदी या बेसन के लड्डू भी अर्पित किए जाते हैं। मंगलवार के व्रत में इन्हीं का प्रसाद बाँटा जाता है। भोग के साथ जल अर्पित करने की परंपरा भी है।

प्रश्न: क्या रात में हनुमान जी की पूजा कर सकते हैं?

उत्तर: हनुमान जी की पूजा किसी भी समय की जा सकती है, पर सुबह और शाम की पूजा का प्रचलन सर्वाधिक है। मंगलवार और शनिवार की रात को चालीसा पढ़ने और सुंदरकांड सुनने की परंपरा भी व्यापक है। रात के पाठ के लिए कोई बाध्यता नहीं बताई गई है।

प्रश्न: मंगलवार का व्रत कैसे रखते हैं?

उत्तर: सुबह स्नान के बाद हनुमान पूजा करके व्रत का संकल्प लें। दिनभर फलाहार करें या निर्जला रहें, शाम को पुनः पूजा और आरती करके व्रत खोलें। गुड़ चने का भोग लगाकर प्रसाद लें। व्रत के दिन सात्विक आहार और शुद्ध आचरण का पालन करें।

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