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Bhagavad Gita · Adhyay 17
श्रद्धात्रय विभाग योग
28 श्लोक, Shraddhatraya Vibhaga Yoga

अध्याय का सार
श्रद्धा तीन प्रकार की होती है: सात्त्विक, राजस और तामस। भोजन, यज्ञ, दान, तप, सब कर्म श्रद्धा के अनुसार फल देते हैं। 'ॐ तत् सत्', ब्रह्म, यज्ञ और दान का सार यही त्रयी है।
मुख्य शिक्षाएँ
- श्रद्धा के अनुसार साधना और फल
- ॐ तत् सत्, सत्-भाव से ही कर्म सफल
अध्याय 17 — सम्पूर्ण श्लोक (28)
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प्रतिनिधि श्लोक
श्रद्धया परया तप्तं तपस्तत् सात्त्विकं मतम्।
Shraddhaya paraya taptam tapastat sattvikam matam
परम श्रद्धा से किया गया तप सात्त्विक माना गया है।
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6:15ॐ
Aaj ka Bhakti Vichar
मन के वश में करना ही सबसे बड़ी तपस्या है।
ॐ नमः शिवाय
Jap: 27 / 108
Gita · Bhajan · Rashifal · Wallpaper
