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Bhagavad Gita · Adhyay 14
गुणत्रय विभाग योग
27 श्लोक, Gunatraya Vibhaga Yoga

अध्याय का सार
प्रकृति के तीन गुण, सत्त्व, रजस और तमस, का वर्णन। सत्त्व प्रकाश देता है, रजस आसक्ति और कर्म-प्रेरणा देता है, तमस अज्ञान और आलस्य देता है। जो तीनों गुणों से परे हो जाता है: गुणातीत, वही भगवान को प्राप्त होता है।
मुख्य शिक्षाएँ
- तीनों गुण बंधन करने वाले हैं: सत्त्व भी
- गुणातीत, तीनों के पार की दशा
अध्याय 14 — सम्पूर्ण श्लोक (27)
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प्रतिनिधि श्लोक
गुणानेतानतीत्य त्रीन्देही देहसमुद्भवान्। जन्ममृत्युजरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते॥
Gunanetanatitya trindehi dehasamudbhavan
देही इन तीनों गुणों को पार करके जन्म-मृत्यु-जरा-दुःख से मुक्त होकर अमृत पाता है।
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Aaj ka Bhakti Vichar
मन के वश में करना ही सबसे बड़ी तपस्या है।
ॐ नमः शिवाय
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