Bhagavad Gita · Adhyay 12

भक्ति योग

20 श्लोक, Bhakti Yoga

अध्याय 12 — भक्ति योग

अध्याय का सार

अध्याय 11 के उत्तर में अर्जुन पूछता है: सगुण (आकार) और निर्गुण (निराकार) उपासना में कौन श्रेष्ठ? कृष्ण कहते हैं, जो मुझे समर्पित भाव से चिंतन करते हैं वे श्रेष्ठ हैं। साथ ही भक्त के लक्षण बताते हैं: अद्वेष्टा, मैत्र, करुणा, निर्ममता, समता।

मुख्य शिक्षाएँ

  • मत्परमा कर्तव्य-फल त्यागी भक्त श्रेष्ठ
  • समता, अहिंसा, क्षमा, भक्त के लक्षण

अध्याय 12 — सम्पूर्ण श्लोक (20)

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प्रतिनिधि श्लोक

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहंकारः समदुःखसुखः क्षमी॥

Advdeshta sarvabhutanam maitrah karuna eva cha

जो सब प्राणियों से अद्वेष रखता है, मैत्री और करुणा रखता है, निर्मम निरहंकार है, सुख-दुःख में सम और क्षमावान है: वह मुझे अति प्रिय है।

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6:15ॐ

Aaj ka Bhakti Vichar

मन के वश में करना ही सबसे बड़ी तपस्या है।

ॐ नमः शिवाय

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