Ganesh Puja

गणेश जी पूजा विधि

विघ्नहर्ता की आराधना, मोदक, दूर्वा और सिंदूर की भेंट।

गणेश जी पूजा विधि पूजा विधि

देवता

श्री गणेश जी

श्रेष्ठ समय

प्रातः काल; बुधवार, चतुर्थी और किसी भी शुभ आरंभ से पूर्व।

श्रेणी

Ganesh पूजा

पूजा का परिचय

गणेश पूजा हर शुभ कार्य का आरंभ है: 'अथ श्री गणेशाय नमः'। गणेश जी बुद्धि और सिद्धि के दाता हैं, इसलिए विद्या, कार्य और उद्यम की शुरुआत में उनका पूजन विघ्नों को दूर करता है।

गणेश पूजन में दूर्वा (दूब घास) और मोदक का विशेष महत्व है: 21 दूर्वा की जोड़ियाँ और 21 मोदक अर्पित करने की परंपरा है। राक्षस विघ्नों के नाशक गणपति की उपासना से कार्य बाधा-रहित संपन्न होते हैं।

पूजा सामग्री

  • मोदक
  • दूर्वा (दूब घास), 21 जोड़ियाँ
  • सिंदूर और अक्षत
  • लाल पुष्प
  • दूर्वा सहित श्वेत पुष्प
  • पंचामृत
  • नारियल
  • केला
  • धूप-दीपक
  • घंटी

पूजा विधि

चरण-दर-चरण

  1. 1

    प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र में गणपति के समक्ष आसन लगाएँ।

  2. 2

    संकल्प लें, अपने शुभ कार्य और मनोकामना का स्मरण करें।

  3. 3

    गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएँ।

  4. 4

    सिंदूर, अक्षत और लाल पुष्प अर्पित करें।

  5. 5

    21 दूर्वा की जोड़ियाँ अर्पित करें, प्रत्येक पर गणेश मंत्र का स्मरण।

  6. 6

    मोदक और फलों का भोग लगाएँ।

  7. 7

    गणेश आथर्वशीर्ष या गणेश चालीसा का पाठ करें।

  8. 8

    आरती करें और प्रसाद बाँटें।

शुभ समय

प्रातः काल; बुधवार, चतुर्थी और किसी भी शुभ आरंभ से पूर्व।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • गणेश जी को दूर्वा अति प्रिय है: प्रत्येक पूजन में अवश्य अर्पित करें।
  • चतुर्थी तिथि में चंद्र दर्शन से बचें (मिथ्या दोष कथा)।
  • मोदक का भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें, अपमान न हो।

सामान्य प्रश्न

दूर्वा गणेश जी को अति प्रिय है: कथा है कि दूर्वा दानी ऋषि ने दूर्वा अर्पित कर गणेश की कृपा पाई। 21 की संख्या गणपति के गणों का प्रतीक मानी जाती है।

पूजा की आरती और मंत्र Sanatan Seva ऐप में सुनें
सभी पूजा विधियों पर वापस जाएँ