मंत्र
ॐ नमः शिवाय
Om Namah Shivaya
देवता
भगवान शिव
श्रेष्ठ समय
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4–6 बजे) या संध्या काल; सोमवार विशेष शुभ।
माला / जाप
रुद्राक्ष की माला (108 मनके) पर जाप करें, प्रतिदिन कम से कम एक माला।
मंत्र का अर्थ
भावार्थ
मैं शिव को नमस्कार करता हूँ, जो सभी प्राणियों के हृदय में वास करने वाले आत्म-स्वरूप हैं। 'नमः' का अर्थ है अहंकार का विसर्जन, 'मैं' को शिव के समर्पित कर देना। यह पाँच अक्षरों का मंत्र पाँच तत्वों (न-भूमि, म-जल, शि-अग्नि, वा-वायु, य-आकाश) को शुद्ध करता है।
जाप विधि
कैसे जाप करें
- 1
प्रातः स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र पहनकर शांत स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- 2
रुद्राक्ष की माला लें, शिवलिंग या शिव के चित्र के सामने ध्यान केंद्रित करें।
- 3
प्रत्येक माला पर 'ॐ नमः शिवाय' का उच्चारण मन में या धीमी आवाज़ में करें, शब्द स्पष्ट रखें।
- 4
108 जाप पूर्ण होने पर भगवान शिव को बेलपत्र, जल या धूप अर्पित करें और ध्यान करें।
महात्म्य और परंपरा
पारंपरिक महत्व
ॐ नमः शिवाय सबसे प्राचीन मंत्रों में से एक है: इसे पंचाक्षरी मंत्र कहा जाता है क्योंकि इसमें 'न-म-शि-वा-य' पाँच शक्तिशाली अक्षर हैं। शास्त्रों के अनुसार यह मंत्र वेदों का सार है और कलियुग में मोक्ष का सरल मार्ग है। शिव पुराण में कहा गया है कि इस मंत्र का निष्ठापूर्वक जाप करने वाला व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
यह मंत्र शरीर के पाँच तत्वों को संतुलित कर मन को एकाग्र बनाता है। नियमित जाप से क्रोध, अहंकार और माया के बंधन कमज़ोर पड़ते हैं और भक्त के भीतर शांति तथा साहस बढ़ता है। सोमवार और श्रावण मास में इसका जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला और जाप की जानकारी
माला
रुद्राक्ष की माला (108 मनके) पर जाप करें, प्रतिदिन कम से कम एक माला।
श्रेष्ठ समय
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4–6 बजे) या संध्या काल; सोमवार विशेष शुभ।
सामान्य प्रश्न
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एक माला यानी 108 बार नित्य जाप करना श्रेष्ठ है। श्रद्धा हो तो 11 या 21 माला भी जप सकते हैं, विशेषकर श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर।
