
मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam, Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat
देवता
भगवान शिव
श्रेष्ठ समय
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त; सोमवार और श्रावण मास विशेष फलदायी।
माला / जाप
रुद्राक्ष की माला पर 108 बार नित्य जाप करें; विशेष संकट में 1008 या 11 माला का अनुष्ठान करें।
मंत्र का अर्थ
भावार्थ
हम त्रिनेत्र धारी भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो सुगंधित हैं और पोषण देने वाले हैं। जैसे कच्चे खीरा बेल से आसानी से अलग हो जाता है, वैसे ही हम मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर अमृतत्व को प्राप्त करें। यह मंत्र जीवन-रक्षा और रोग-नाश के लिए जापा जाता है।
जाप विधि
कैसे जाप करें
- 1
प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर आसन पर बैठें, शरीर और मन शुद्ध रखें।
- 2
शिवलिंग के सामने धूप-दीप जलाकर माला हाथ में लें।
- 3
मंत्र का उच्चारण धीमे और स्पष्ट स्वर में करें, प्रत्येक शब्द का अर्थ मन में स्मरण रखें।
- 4
108 या 1008 बार जाप करें; अन्त में शिव को जल और बेलपत्र अर्पित करें।
महात्म्य और परंपरा
पारंपरिक महत्व
महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद (7.59.12) में वर्णित है और इसे वेदों का सबसे शक्तिशाली जीवन-रक्षक मंत्र माना जाता है। इसका जाप गंभीर रोग, संकट और मृत्यु-भय के समय विशेष रूप से किया जाता है। मान्यता है कि मारकंडेय ऋषि ने इसी मंत्र की शक्ति से काल को परास्त किया था।
यह मंत्र तीनों स्तरों, शरीर, मन और आत्मा, पर कार्य करता है। नियमित जाप से जीवन-शक्ति बढ़ती है, भय समाप्त होता है और मृत्यु के प्रति सहज दृष्टि विकसित होती है। घर में किसी रोगी की स्वस्थता के लिए भी इसका जाप कराया जाता है।
माला और जाप की जानकारी
माला
रुद्राक्ष की माला पर 108 बार नित्य जाप करें; विशेष संकट में 1008 या 11 माला का अनुष्ठान करें।
श्रेष्ठ समय
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त; सोमवार और श्रावण मास विशेष फलदायी।
सामान्य प्रश्न
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रोज़ाना 108 बार (एक माला) जाप उत्तम है। किसी रोगी या संकट के लिए 21 दिन तक नित्य 108 या 1008 बार का अनुष्ठान किया जाता है।
