Devi Mantra

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र

समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी महालक्ष्मी का बीज मंत्र।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र

मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

Om Shrim Mahalakshmyei Namah

देवता

माँ लक्ष्मी

श्रेष्ठ समय

शुक्रवार प्रातः/संध्या; दीपावली रात्रि सर्वोत्तम।

माला / जाप

रुद्राक्ष या कमल की माला पर 108 जाप, शुक्रवार नित्य या दीपावली रात्रि में 1008 जाप।

मंत्र का अर्थ

भावार्थ

महालक्ष्मी, समृद्धि, ऐश्वर्य और कृपा की देवी, को नमस्कार। 'श्रीं' बीज मंत्र ऐश्वर्य-शक्ति का प्रतीक है। इस मंत्र के नियमित जाप से आर्थिक स्थिरता, सौभाग्य और जीवन में समृद्धि का संचार होता है।

जाप विधि

कैसे जाप करें

  1. 1

    शुक्ल पक्ष की शुक्रवार या दीपावली की रात्रि सर्वोत्तम है।

  2. 2

    स्नान कर शुद्ध वस्त्र में लक्ष्मी जी के सामने घी या चमेली के तेल का दीपक जलाएँ।

  3. 3

    लाल पुष्प, अक्षत और खीर का भोग अर्पित करें।

  4. 4

    रुद्राक्ष या कमल-गुटकी की माला पर 108 बार जाप करें।

महात्म्य और परंपरा

पारंपरिक महत्व

लक्ष्मी जी विष्णु की शक्ति हैं, जहाँ श्रद्धा, स्वच्छता और संतोष है, वहीं वे निवास करती हैं। शास्त्र कहते हैं कि धन केवल कर्म से नहीं, भाव से भी आकर्षित होता है: इस मंत्र का जाप उसी भाव को स्थिर करता है।

दीपावली की रात्रि में इस मंत्र का जाप विशेष माना जाता है: मान्यता है कि माँ लक्ष्मी स्वच्छ, प्रकाशित घरों में प्रवेश करती हैं। शुक्रवार की पूजा में भी यह मंत्र प्रमुखता से जापा जाता है।

माला और जाप की जानकारी

माला

रुद्राक्ष या कमल की माला पर 108 जाप, शुक्रवार नित्य या दीपावली रात्रि में 1008 जाप।

श्रेष्ठ समय

शुक्रवार प्रातः/संध्या; दीपावली रात्रि सर्वोत्तम।

सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुक्रवार माँ लक्ष्मी का दिन माना जाता है: प्रातः या संध्या काल में जाप करें। दीपावली की रात्रि में विशेष फल है।

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