Ekadashi Vrat

योगिनी एकादशी

योगिनी एकादशी की कथा कुबेर के राज-उद्यान में रखे हेममाली नामक माली से जुड़ी है। कथा है कि अलकापुरी में धन-देव कुबेर का उद्यान था, जिसमें अमरावती के वृक्ष सुशोभि…

योगिनी एकादशी व्रत

देवता

भगवान विष्णु

तिथि / समय

आषाढ़ कृष्ण एकादशी

श्रेणी

Ekadashi व्रत

व्रत का परिचय

योगिनी एकादशी की कथा कुबेर के राज-उद्यान में रखे हेममाली नामक माली से जुड़ी है। कथा है कि अलकापुरी में धन-देव कुबेर का उद्यान था, जिसमें अमरावती के वृक्ष सुशोभित थे। हेममाली का कार्य प्रतिदिन देवराज इंद्र के लिए पुष्प ले जाना था। वह अपने कार्य में निपुण था, परंतु धीरे-धीरे उसका चित्त अपनी पत्नी स्वर्ग-सुंदरी विशालाक्षी में आसक्त हो गया।

व्रत विधि

कैसे रखें

  1. 1

पूजा सामग्री

    व्रत के नियम

    • व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
    • संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।

    पारण विधि

    कुष्ठ-रोग आदि शारीरिक दोष-नाश की परंपरा

    व्रत कथा

    योगिनी एकादशी की कथा कुबेर के राज-उद्यान में रखे हेममाली नामक माली से जुड़ी है। कथा है कि अलकापुरी में धन-देव कुबेर का उद्यान था, जिसमें अमरावती के वृक्ष सुशोभित थे। हेममाली का कार्य प्रतिदिन देवराज इंद्र के लिए पुष्प ले जाना था। वह अपने कार्य में निपुण था, परंतु धीरे-धीरे उसका चित्त अपनी पत्नी स्वर्ग-सुंदरी विशालाक्षी में आसक्त हो गया।

    एक दिन हेममाली जल-क्रीड़ा में व्यस्त रहा तथा पुष्प देवराज को नहीं पहुँचा सका। इंद्र की सभा बिना पुष्प के अधूरी रही। कुबेर ने ज्ञान देखा तो उन्होंने क्रोध में शाप दिया, 'तू प्रतिदिन आसक्ति के कारण विलंब करता है; तू मिथ्याबादी एवं आलस्य-ग्रस्त है, धरती पर जाकर कुष्ठ रोग से पीड़ित हो।' तत्क्षण हेममाली धरती पर गिरा तथा उसके शरीर पर कुष्ठ-विकार उभर आए। वह दुःखी होकर भटकने लगा।

    भटकता हुआ हेममाली ऋषि मार्कंडेय के आश्रम में पहुँचा तथा अपना संपूर्ण दुःख कह सुनाया। मार्कंडेय ने उसे बताया कि वह जन्म-भर के पाप से मुक्त होकर केवल शाप-विमोचन चाहता है, 'आषाढ़ कृष्ण एकादशी (योगिनी) का व्रत कर। इस व्रत से रोग-पीड़ा नष्ट हो जाएगी।' हेममाली ने योगिनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत किया तथा उसका कुष्ठ-रोग तत्क्षण नष्ट हो गया। वह अपने सुंदर रूप धारण करके पुनः स्वर्ग लौट गया। कथा का निष्कर्ष है कि योगिनी एकादशी के व्रत से शारीरिक रोग, शाप-पीड़ा एवं पाप दूर होते हैं तथा व्रती को स्वर्ग-सुख पुनः प्राप्त होता है।

    सामान्य प्रश्न

    कुष्ठ-रोग आदि शारीरिक दोष-नाश की परंपरा

    इस व्रत की कथा Sanatan Seva ऐप में सुनें, मंत्र और आरती के साथ

    संबंधित सामग्री

    सभी व्रतों पर वापस जाएँ