
देवता
भगवान विष्णु
तिथि / समय
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी
श्रेणी
Ekadashi व्रत
व्रत का परिचय
उत्पन्ना एकादशी की कथा एकादशी-तत्त्व की उत्पत्ति से जुड़ी है। पद्म पुराण-परंपरा के अनुसार भगवान विष्णु योग-निद्रा में रत थे। उनके कर्ण-रंध्र से एक दैत्य निकला, जिसका नाम मुर (मुरन) था। वह ब्रह्मांड का आतंक बन गया तथा देवताओं को देवलोक से खदेड़ दिया। देवता विष्णु की शरण में पहुँचे। भगवान ने गदा लेकर मुर का पीछा किया; भीषण युद्ध हुआ।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
पूजा सामग्री
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
एकादशी-देवी की उत्पत्ति-कथा की परंपरा
व्रत कथा
उत्पन्ना एकादशी की कथा एकादशी-तत्त्व की उत्पत्ति से जुड़ी है। पद्म पुराण-परंपरा के अनुसार भगवान विष्णु योग-निद्रा में रत थे। उनके कर्ण-रंध्र से एक दैत्य निकला, जिसका नाम मुर (मुरन) था। वह ब्रह्मांड का आतंक बन गया तथा देवताओं को देवलोक से खदेड़ दिया। देवता विष्णु की शरण में पहुँचे। भगवान ने गदा लेकर मुर का पीछा किया; भीषण युद्ध हुआ।
मुर माया-विद्या से अनेक रूप बनाता तथा युद्ध में अजेय लग रहा था। युद्ध के उपरांत विष्णु बद्रिकाश्रम की एक गुफा में विश्राम-निद्रा को गए। उसी समय मुर गुफा में आया तथा उन पर आक्रमण करने को उद्यत हुआ। तभी भगवान के देह से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई, जिसका तेज अपार था। उस देवी ने मुर का नाश कर दिया।
प्रसन्न विष्णु ने उस देवी से कहा, 'तू मेरी शक्ति से उत्पन्न हुई है; तुझे एकादशी नाम मिला। मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी से तू व्रत-स्वरूप में त्रिलोक में पूजी जाएगी। जो तेरा व्रत करेगा, उसके समस्त पाप नष्ट होंगे।' तभी से मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी 'उत्पन्ना' के नाम से एकादशी-आराधना का आदि-प्रसंग बनी। यह एकादशी समस्त एकादशी-व्रतों की जननी मानी गई, व्रत का आरंभ इसी तिथि से करना शुभ माना गया है। जो व्रती वर्ष में केवल एक ही एकादशी रख सकता है, उसके लिए उत्पन्ना एकादशी सर्वश्रेष्ठ बताई गई है, इसके व्रत से समस्त व्रतों का फल मिल जाता है।
सामान्य प्रश्न
एकादशी-देवी की उत्पत्ति-कथा की परंपरा
