देवता
भगवान शिव एवं माँ पार्वती
तिथि / समय
प्रत्येक सोमवार; श्रावण मास के सोमवार विशेष फलदायी
श्रेणी
Somvar व्रत
व्रत का परिचय
भविष्य पुराण की परंपरा के अनुसार अमरपट्टन नगर में एक शिवभक्त निर्धन ब्राह्मण रहता था, जिसका जीवन साधारण था परंतु श्रद्धा अटूट थी। प्रत्येक सोमवार वह भोर में स्नान करके शिवालय जाता, शिवलिंग पर जल-दूध अर्पित करता तथा बेलपत्र चढ़ाकर घंटियों की ध्वनि के साथ महादेव का ध्यान करता। उसकी पत्नी भी व्रत में साथ रहती और सायं शिव-कथा सुनती।
व्रत विधि
कैसे रखें
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प्रातः स्नान के बाद शिवलिंग पर जल एवं कच्चा दूध अर्पण करें, बेलपत्र, धतूरा, भाँग तथा चंदन चढ़ाएँ। दिन भर उपवास अथवा एक समय फलाहार रखें और सायंकाल शिव-आरती, ॐ नमः शिवाय का 108 बार जाप तथा सोमवार व्रत कथा का श्रवण करें। व्रती श्वेत अथवा शुद्ध वस्त्र पहने, ब्रह्मचय का पालन करे तथा पारण पर प्रसाद ग्रहण कर भोजन करे। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार विधिवत् पूजा से विशेष फल की परंपरा है।
पूजा सामग्री
- कच्चा दूध
- जल
- बेलपत्र
- धतूरा-भाँग
- चंदन
- धूप-दीप
- श्वेत वस्त्र
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
सुख-शांति, संतान-पालन एवं सुहाग की रक्षा; मन की निर्मलता।
व्रत कथा
भविष्य पुराण की परंपरा के अनुसार अमरपट्टन नगर में एक शिवभक्त निर्धन ब्राह्मण रहता था, जिसका जीवन साधारण था परंतु श्रद्धा अटूट थी। प्रत्येक सोमवार वह भोर में स्नान करके शिवालय जाता, शिवलिंग पर जल-दूध अर्पित करता तथा बेलपत्र चढ़ाकर घंटियों की ध्वनि के साथ महादेव का ध्यान करता। उसकी पत्नी भी व्रत में साथ रहती और सायं शिव-कथा सुनती।
समय बीतने पर ब्राह्मण के घर संतान उत्पन्न हुई, पर दारिद्र्य ने घर का द्वार नहीं छोड़ा। ग्राम के कुछ लोग व्यंग्य करने लगे, 'इतनी पूजा करके तुम्हें शिव जी ने ही क्या दिया?' ब्राह्मण ने विनम्रता से कहा, 'मैं शंकर को धन-वर देने हेतु नहीं पूजता; मैं उनके लिए जो हूँ, वही अर्पित करता हूँ। जो देव निराकार हैं, वे भक्त की विभूति से प्रसन्न होते हैं।' एक सोमवार की रात्रि उसे स्वप्न में आदेश हुआ, 'अगले प्रातः गंगा-तट पर जाकर स्नान कर; तुझे वरदान देना चाहता हूँ।' प्रातः ब्राह्मण सपरिवार गंगा-स्नान को गया; तीर्थ-दान अधिकारी के अधिकार से उसे उस स्नान के पुण्य-फल के रूप में यथेष्ट धन प्राप्त हुआ। ब्राह्मण ने उसमें से देवालय के पुनर्जीवन का कार्य कराया और संतान का पालन सुख से किया।
परंपरा यह भी बताती है कि सोमवार का संबंध चंद्रमा से भी है। शिव जी के शिर पर अर्धचंद्र विराजमान है, अतः सोमवार को चंद्र-देव की उपासना का भी महात्म्य है। जिन स्त्रियों की मनोकामना सुहाग की सुरक्षा की होती है, वे इसी दिन गौरी-शंकर की संयुक्त पूजा करती हैं। जो व्यक्ति सोमवार व्रत का निर्वाह विधिपूर्वक करता है, उसकी महत्ताकांक्षाएँ शीघ्र पूर्ण होती हैं, मन निर्मल रहता है तथा गृह-कलह का नाश होता है। सात सोमवार से लेकर सोलह अथवा बाईस सोमवार तक के नियम से इस व्रत का विशेष फल बताया गया है।
श्रावण मास में सोमवार की पूजा का महात्म्य सर्वाधिक माना गया है, क्योंकि इस मास में शिव-उपासना का प्रत्येक व्रत कामना-पूर्ति करने वाला कहा गया है। भक्त इस दिन कच्चा दूध, जल तथा बेलपत्र अर्पित करके अपने इष्ट को तुष्ट करते हैं और सायं व्रत-कथा सुनकर पारण करते हैं। कथा-परंपरा का निष्कर्ष है कि सोमवार व्रत जीवन को सुख-शांति से भर देने वाला एवं संकटों का नाश करने वाला सर्वश्रेष्ठ साप्ताहिक व्रत है।
सामान्य प्रश्न
सुख-शांति, संतान-पालन एवं सुहाग की रक्षा; मन की निर्मलता।
