Ekadashi Vrat

श्रावण पुत्रदा एकादशी

श्रावण शुक्ल एकादशी 'पुत्रदा' के नाम से जानी जाती है, क्योंकि परंपरा में इसका व्रत संतान-प्राप्ति एवं संतान-कल्याण से जुड़ा माना गया है। पद्म पुराण-परंपरा में इ…

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत

देवता

भगवान विष्णु

तिथि / समय

श्रावण शुक्ल एकादशी

श्रेणी

Ekadashi व्रत

व्रत का परिचय

श्रावण शुक्ल एकादशी 'पुत्रदा' के नाम से जानी जाती है, क्योंकि परंपरा में इसका व्रत संतान-प्राप्ति एवं संतान-कल्याण से जुड़ा माना गया है। पद्म पुराण-परंपरा में इस एकादशी का महात्म्य श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को बताया गया है। कथा-परंपरा के अनुसार जो दंपत्ति संतान-सुख की कामना से विधिपूर्वक इस एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें पुत्र-रत्न की प्राप्ति होती है तथा संतान का कल्याण होता है। यह व्रत संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं विद्या-बुद्धि की वृद्धि कराने वाला माना गया है। पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी-पूजा, विष्णु-पूजा एवं ब्राह्मण-भोजन का विशेष विधान है। व्रत का फल वर्षों के तप के समान बताया गया है, यह पद्म पुराण-परंपरा में वर्णित एकादशी-माहात्म्य का सार है।

व्रत विधि

कैसे रखें

  1. 1

पूजा सामग्री

    व्रत के नियम

    • व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
    • संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।

    पारण विधि

    संतान-कल्याण की परंपरा

    व्रत कथा

    श्रावण शुक्ल एकादशी 'पुत्रदा' के नाम से जानी जाती है, क्योंकि परंपरा में इसका व्रत संतान-प्राप्ति एवं संतान-कल्याण से जुड़ा माना गया है। पद्म पुराण-परंपरा में इस एकादशी का महात्म्य श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को बताया गया है। कथा-परंपरा के अनुसार जो दंपत्ति संतान-सुख की कामना से विधिपूर्वक इस एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें पुत्र-रत्न की प्राप्ति होती है तथा संतान का कल्याण होता है। यह व्रत संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं विद्या-बुद्धि की वृद्धि कराने वाला माना गया है। पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी-पूजा, विष्णु-पूजा एवं ब्राह्मण-भोजन का विशेष विधान है। व्रत का फल वर्षों के तप के समान बताया गया है, यह पद्म पुराण-परंपरा में वर्णित एकादशी-माहात्म्य का सार है।

    सामान्य प्रश्न

    संतान-कल्याण की परंपरा

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