
देवता
भगवान विष्णु
तिथि / समय
माघ कृष्ण एकादशी
श्रेणी
Ekadashi व्रत
व्रत का परिचय
षटतिला एकादशी का नाम इसकी तिल-संबंधी छह विधियों से जुड़ा माना जाता है, तिल से स्नान, तिल का चर्चन (विलेपन), तिल का हवन, तिल का भोग, तिल का दान तथा तिल का उपभोग। माघ कृष्ण एकादशी पर इन विधियों का आचरण करने से व्रती को अपार पुण्य प्राप्त होता है, यह पद्म पुराण-परंपरा का कथन है। कथा-परंपरा में एक ब्राह्मण-दंपत्ति का प्रसंग आता है जिन्होंने तिल-दान के दान-वैभव से देव-प्रसाद पाया। षटतिला व्रत से व्रती के रोग, दरिद्रता तथा ऋण का नाश माना गया है। माघ-मास की शुद्धि-परंपरा के साथ जुड़ी यह एकादशी दान-तत्त्व का उपदेश देती है, तिल का दान पितृ-तृप्ति से भी जुड़ा है, इसीलिए इस एकादशी पर तिल-दान का विधान विशेष फलदायी माना गया है। व्रत के साथ विष्णु-पूजा एवं द्वादशी-पारण का नियम रहता है।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
पूजा सामग्री
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
तिल-दान की विशेष परंपरा
व्रत कथा
षटतिला एकादशी का नाम इसकी तिल-संबंधी छह विधियों से जुड़ा माना जाता है, तिल से स्नान, तिल का चर्चन (विलेपन), तिल का हवन, तिल का भोग, तिल का दान तथा तिल का उपभोग। माघ कृष्ण एकादशी पर इन विधियों का आचरण करने से व्रती को अपार पुण्य प्राप्त होता है, यह पद्म पुराण-परंपरा का कथन है। कथा-परंपरा में एक ब्राह्मण-दंपत्ति का प्रसंग आता है जिन्होंने तिल-दान के दान-वैभव से देव-प्रसाद पाया। षटतिला व्रत से व्रती के रोग, दरिद्रता तथा ऋण का नाश माना गया है। माघ-मास की शुद्धि-परंपरा के साथ जुड़ी यह एकादशी दान-तत्त्व का उपदेश देती है, तिल का दान पितृ-तृप्ति से भी जुड़ा है, इसीलिए इस एकादशी पर तिल-दान का विधान विशेष फलदायी माना गया है। व्रत के साथ विष्णु-पूजा एवं द्वादशी-पारण का नियम रहता है।
सामान्य प्रश्न
तिल-दान की विशेष परंपरा
