
देवता
भगवान विष्णु
तिथि / समय
आश्विन शुक्ल एकादशी
श्रेणी
Ekadashi व्रत
व्रत का परिचय
पापांकुशा एकादशी का महात्म्य पद्म पुराण-परंपरा में वर्णित है। आश्विन शुक्ल पक्ष की यह एकादशी विष्णु के पद (पाद) की उपासना से जुड़ी मानी गई है। परंपरा के अनुसार जो व्रती इस दिन निराहार रहकर विष्णु की षोडशोपचार पूजा करता है, उसके समस्त पाप, चाहे गुरु-द्रोह जैसे गंभीर दोष हों, नष्ट होते हैं। यह एकादशी व्रती को अक्षय फल देने वाली मानी गई है; इसका व्रत करने वाला व्यक्ति भोग एवं मोक्ष दोनों का अधिकारी बनता है। कथा-परंपरा में इस एकादशी के नियम यह बताए गए हैं कि व्रती दिन भर विष्णु-स्मरण करता रहे, रात्रि जागरण करे तथा द्वादशी को दान के साथ पारण करे। जिसकी मनोकामनाएँ अधूरी हैं, वह इस एकादशी का विशेष आश्रय लेता है, यह लोक-विश्वास प्रचलित है।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
पूजा सामग्री
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
पाप-शमन एवं मनोकामना-सिद्धि की परंपरा
व्रत कथा
पापांकुशा एकादशी का महात्म्य पद्म पुराण-परंपरा में वर्णित है। आश्विन शुक्ल पक्ष की यह एकादशी विष्णु के पद (पाद) की उपासना से जुड़ी मानी गई है। परंपरा के अनुसार जो व्रती इस दिन निराहार रहकर विष्णु की षोडशोपचार पूजा करता है, उसके समस्त पाप, चाहे गुरु-द्रोह जैसे गंभीर दोष हों, नष्ट होते हैं। यह एकादशी व्रती को अक्षय फल देने वाली मानी गई है; इसका व्रत करने वाला व्यक्ति भोग एवं मोक्ष दोनों का अधिकारी बनता है। कथा-परंपरा में इस एकादशी के नियम यह बताए गए हैं कि व्रती दिन भर विष्णु-स्मरण करता रहे, रात्रि जागरण करे तथा द्वादशी को दान के साथ पारण करे। जिसकी मनोकामनाएँ अधूरी हैं, वह इस एकादशी का विशेष आश्रय लेता है, यह लोक-विश्वास प्रचलित है।
सामान्य प्रश्न
पाप-शमन एवं मनोकामना-सिद्धि की परंपरा
