
देवता
भगवान विष्णु
तिथि / समय
चैत्र कृष्ण एकादशी
श्रेणी
Ekadashi व्रत
व्रत का परिचय
पापमोचनी एकादशी की कथा मेधावी ऋषि के प्रसंग से जुड़ी है। कथा है कि देवर्षि नारद एक बार मरुत्वान वन में गए। वहाँ उन्होंने एक सुंदर अप्सरा मंजुघोषा को तपोवन की ओर जाते देखा। मंजुघोषा का उद्देश्य ऋषियों की तपस्या भंग करना था। वन में मेधावी नाम के तेजस्वी ब्रह्मचारी ऋषि तप कर रहे थे। मंजुघोषा ने वृक्ष के आड़ से नर्तन-संगीत आरंभ किया तथा अपने रूप-लावण्य से ऋषि का ध्यान भंग करने का प्रयत्न किया।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
पूजा सामग्री
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
समस्त पापों का नाश
व्रत कथा
पापमोचनी एकादशी की कथा मेधावी ऋषि के प्रसंग से जुड़ी है। कथा है कि देवर्षि नारद एक बार मरुत्वान वन में गए। वहाँ उन्होंने एक सुंदर अप्सरा मंजुघोषा को तपोवन की ओर जाते देखा। मंजुघोषा का उद्देश्य ऋषियों की तपस्या भंग करना था। वन में मेधावी नाम के तेजस्वी ब्रह्मचारी ऋषि तप कर रहे थे। मंजुघोषा ने वृक्ष के आड़ से नर्तन-संगीत आरंभ किया तथा अपने रूप-लावण्य से ऋषि का ध्यान भंग करने का प्रयत्न किया।
मेधावी का चित्त विचलित हुआ। उन्होंने मंजुघोषा को अपने आश्रम में रहने की अनुमति दी तथा कालांतर में वे भोग-जीवन में लिप्त हो गए। वर्षों व्यतीत हुए। एक दिन मंजुघोषा ने ऋषि से वन-विहार की आज्ञा माँगी। ऋषि ने कहा, 'पहले मेरी तपस्या का वन तो देख ले, फिर जाना।' दोनों ने देखा कि जिस ऋतु में उनका ध्यान भंग हुआ था, वही ऋतु बार-बार दोहराती जा रही है। मेधावी को ज्ञान हुआ कि जो समय भोग में व्यतीत हुआ वह केवल एक ही दिन-भर का मानकर उसने वर्षों तप-नाश किया। क्रोधित होकर उन्होंने मंजुघोषा को शाप दे दिया कि वह पिशाचिनी बन जाए।
मंजुघोषा ने बहुत विनती की। ऋषि ने बताया कि चैत्र कृष्ण एकादशी (पापमोचनी) के व्रत से उसका पाप नष्ट होगा। मंजुघोषा ने विधिपूर्वक व्रत किया तथा पिशाचिनी-देह से मुक्त होकर पुनः स्वर्ग को चली गई। ऋषि मेधावी की तपस्या भी पुनः शुद्ध हुई। भगवान विष्णु ने स्वयं नारद के माध्यम से यह निष्कर्ष दिया कि पापमोचनी एकादशी का व्रत समस्त पापों का दहन करने वाला है, चाहे पाप कितना ही गहरा क्यों न हो, यह एकादशी व्रती को पवित्र कर देती है।
सामान्य प्रश्न
समस्त पापों का नाश
