Ekadashi Vrat

निर्जला एकादशी

निर्जला एकादशी की कथा भीम से जुड़ी है। कथा है कि भीम अत्यंत अन्न-प्रिय थे, उन्हें उपवास असह्य था। उनकी माता कुंती एवं भ्राता युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल एवं सहदेव स…

निर्जला एकादशी व्रत

देवता

भगवान विष्णु

तिथि / समय

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

श्रेणी

Ekadashi व्रत

व्रत का परिचय

निर्जला एकादशी की कथा भीम से जुड़ी है। कथा है कि भीम अत्यंत अन्न-प्रिय थे, उन्हें उपवास असह्य था। उनकी माता कुंती एवं भ्राता युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल एवं सहदेव सभी एकादशी व्रत करते थे, परंतु भीम इस नियम से बचते थे। एक दिन भीम ने व्यास जी से सरल उपाय पूछा, 'मैं एकादशी का उपवास नहीं कर सकता, परंतु स्वर्ग-अधिकार भी खोना नहीं चाहता।'

व्रत विधि

कैसे रखें

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पूजा सामग्री

    व्रत के नियम

    • व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
    • संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।

    पारण विधि

    निर्जल उपवास की विशेष परंपरा, समस्त एकादशियों का फल

    व्रत कथा

    निर्जला एकादशी की कथा भीम से जुड़ी है। कथा है कि भीम अत्यंत अन्न-प्रिय थे, उन्हें उपवास असह्य था। उनकी माता कुंती एवं भ्राता युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल एवं सहदेव सभी एकादशी व्रत करते थे, परंतु भीम इस नियम से बचते थे। एक दिन भीम ने व्यास जी से सरल उपाय पूछा, 'मैं एकादशी का उपवास नहीं कर सकता, परंतु स्वर्ग-अधिकार भी खोना नहीं चाहता।'

    व्यास जी ने कहा, 'एकादशी का अन्न-त्याग अनिवार्य है; तुम्हें एक ही उपाय है, ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (निर्जला) के दिन बिना जल-अन्न के निर्जला व्रत करो। यदि तुम पूरे दिन एवं रात्रि निराहार-निर्जल रहो तो वर्ष की समस्त चौबीस एकादशियों का फल तुम्हें प्राप्त हो जाएगा।' भीम ने उस दिन निर्जला व्रत रखा। दिन भर उनके शरीर में व्याकुलता होती रही, परंतु रात्रि-जागरण के साथ उन्होंने व्रत का पालन किया तथा प्रातः द्वादशी को विधिपूर्वक पारण की। इसी प्रसंग से निर्जला एकादशी का विशेष महत्त्व बना, जो व्रती शारीरिक असमर्थता के कारण सभी एकादशियाँ नहीं रख पाता, वह वर्ष में एक बार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जल व्रत करके समस्त एकादशी-फल की प्राप्ति कर लेता है।

    इस एकादशी का उपवास सूर्योदय से द्वादशी की प्रातः तक निर्जल रहने का कठोर नियम है। परंपरा में इसका फल अश्वमेध यज्ञ के समान बताया गया है। यह व्रत तप-बल एवं संकल्प-शक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक बना, जिल्मिलती गर्मी (ज्येष्ठ) में जल-त्याग की यह साधना व्रती की इंद्रिय-जय की कसौटी मानी गई। जो स्वास्थ्य कठोर हो, वही इस व्रत का निर्वाह करे, यह परंपरा का स्पष्ट निर्देश है।

    सामान्य प्रश्न

    निर्जल उपवास की विशेष परंपरा, समस्त एकादशियों का फल

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