
देवता
भगवान विष्णु
तिथि / समय
वैशाख शुक्ल एकादशी
श्रेणी
Ekadashi व्रत
व्रत का परिचय
मोहिनी एकादशी की कथा-परंपरा में ऋषि-पुत्र धृष्टबुद्धि का प्रसंग आता है। कथा है कि चंद्रमा के पुत्र वसु के वंश में तीन पुत्री-पुत्र थे, जिनमें धृष्टबुद्धि सर्वाधिक पापी था। वह पिता की संपत्ति नष्ट करता, रमणियों से दुर्व्यवहार करता तथा देव-ब्राह्मण की उपेक्षा करता था। उसके दुराचरण से त्रस्त होकर पिता ने तथा परिवार ने उसे घर से निकाल दिया।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
पूजा सामग्री
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
मोह से मुक्ति एवं पाप-नाश
व्रत कथा
मोहिनी एकादशी की कथा-परंपरा में ऋषि-पुत्र धृष्टबुद्धि का प्रसंग आता है। कथा है कि चंद्रमा के पुत्र वसु के वंश में तीन पुत्री-पुत्र थे, जिनमें धृष्टबुद्धि सर्वाधिक पापी था। वह पिता की संपत्ति नष्ट करता, रमणियों से दुर्व्यवहार करता तथा देव-ब्राह्मण की उपेक्षा करता था। उसके दुराचरण से त्रस्त होकर पिता ने तथा परिवार ने उसे घर से निकाल दिया।
धृष्टबुद्धि भटकता हुआ वन में पहुँचा। वहाँ कुछ दिन व्यापार-व्यवहार से रहा, परंतु व्यसनों ने उसका सर्वनाश कर दिया। अंत में वह देश-विदेश भटकता हुआ ऋषियों के तपोवन पास आया। वहाँ उसने परंपरा से वैशाख शुक्ल एकादशी (मोहिनी) के दिन जल-तालाब से जल पीकर तृष्णा शांत की तथा उसी दिन अनाहार रह गया। रात्रि वह किसी वृक्ष के नीचे बिता गया। विधि-विपरीत जीवन जीते व्यक्ति को संयोग से मिली यह एकादशी-निराहार-निद्रा इतनी पुण्यदायी सिद्ध हुई कि उसकी मृत्यु के समय यम-दूत उसे छू नहीं पाए।
यम-दूतों से मुक्त धृष्टबुद्धि को विष्णु-दूतों ने गरुड़ पर बैठाकर वैकुंठ ले गए। कथा का उपदेश यह है कि मोहिनी एकादशी का दिन विष्णु-तत्त्व से ओत-प्रोत है, इस तिथि के स्मरण, उपवास एवं रात्रि-जागरण से गंभीरतम पाप भी नष्ट होते हैं। परंपरा में कहा गया है कि इस एकादशी का फल हज़ारों वर्षों के तप एवं अश्वमेध यज्ञ के पुण्य के समान है। जो व्रती विधिपूर्वक मोहिनी एकादशी का निर्वाह करता है, वह भव-बंधन (मोह) से मुक्त होकर वैकुंठ का अधिकारी बनता है।
सामान्य प्रश्न
मोह से मुक्ति एवं पाप-नाश
