Ekadashi Vrat

कामदा एकादशी

कामदा एकादशी की कथा वासुदेव कृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को कही गई कथा-परंपरा से जुड़ी है। कथा है कि रत्नसारोवर से सुशोभित भोगीश्वर नगरी में ललित नाम का एक गंधर्व तथा…

कामदा एकादशी व्रत

देवता

भगवान विष्णु

तिथि / समय

चैत्र शुक्ल एकादशी

श्रेणी

Ekadashi व्रत

व्रत का परिचय

कामदा एकादशी की कथा वासुदेव कृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को कही गई कथा-परंपरा से जुड़ी है। कथा है कि रत्नसारोवर से सुशोभित भोगीश्वर नगरी में ललित नाम का एक गंधर्व तथा उसकी पत्नी ललिता रहते थे। दोनों अत्यंत प्रेमपूर्ण दंपत्ति थे। एक बार राज-सभा में ललित गान कर रहा था, उसका ध्यान अपनी प्रिया ललिता में लगा रह गया और उसका स्वर-ताल बिखर गया। सभा में उपस्थित नाग-कन्या पुंडरीक ने राजा पीथू को यह बात बताई। राजा ने क्रोध में ललित को शाप दे दिया कि वह भूत-गण से युक्त भीम राक्षस बन जाएगा।

व्रत विधि

कैसे रखें

  1. 1

पूजा सामग्री

    व्रत के नियम

    • व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
    • संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।

    पारण विधि

    इच्छाओं की पूर्ति, भूत-प्रेत-पिशाच बाधा नाश

    व्रत कथा

    कामदा एकादशी की कथा वासुदेव कृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को कही गई कथा-परंपरा से जुड़ी है। कथा है कि रत्नसारोवर से सुशोभित भोगीश्वर नगरी में ललित नाम का एक गंधर्व तथा उसकी पत्नी ललिता रहते थे। दोनों अत्यंत प्रेमपूर्ण दंपत्ति थे। एक बार राज-सभा में ललित गान कर रहा था, उसका ध्यान अपनी प्रिया ललिता में लगा रह गया और उसका स्वर-ताल बिखर गया। सभा में उपस्थित नाग-कन्या पुंडरीक ने राजा पीथू को यह बात बताई। राजा ने क्रोध में ललित को शाप दे दिया कि वह भूत-गण से युक्त भीम राक्षस बन जाएगा।

    तत्क्षण ललित का शरीर राक्षस-रूप में बदल गया। वह भीषण रूप लेकर वन में घूमने लगा। पति की इस दशा से व्याकुल ललिता ने ऋषि श्रींगी के आश्रम में जाकर सहायता माँगी। ऋषि ने कहा, 'चैत्र शुक्ल एकादशी का नाम कामदा है; यह समस्त कामनाएँ देने वाली एवं शाप-मुक्ति कराने वाली है। तू उस एकादशी का व्रत करके उसका फल अपने पति को अर्पित कर।'

    ललिता ने विधिपूर्वक कामदा एकादशी का व्रत रखा तथा प्रातः द्वादशी को व्रत का फल पति को समर्पित किया। उसी क्षण ललित का शाप टूट गया, उसका राक्षस-शरीर नष्ट हुआ तथा वह पुनः सुंदर गंधर्व बन गया। दोनों दंपत्ति ने आनंदपूर्वक भगवान विष्णु की उपासना की। कथा का निष्कर्ष है कि कामदा एकादशी के व्रत से शाप-बाधा, भूत-प्रेत-पिशाच का प्रभाव एवं समस्त मनोकामनाओं का नाश होकर विष्णु-कृपा प्राप्त होती है। जो व्रती इस दिन नियम से उपवास-पूजा करता है, उसकी इच्छाएँ शीघ्र पूर्ण होती हैं।

    सामान्य प्रश्न

    इच्छाओं की पूर्ति, भूत-प्रेत-पिशाच बाधा नाश

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