
देवता
भगवान विष्णु
तिथि / समय
माघ शुक्ल एकादशी
श्रेणी
Ekadashi व्रत
व्रत का परिचय
जया एकादशी का महात्म्य पद्म पुराण-परंपरा में वर्णित है। माघ शुक्ल पक्ष की यह एकादशी 'जया' (विजय-दायिनी) के नाम से जानी जाती है। कथा-परंपरा में इसका संबंध स्वर्ग-लोक के ऋतु-पालन से जुड़ा बताया गया है, एक स्वर्गीय गंधर्व-परंपरा से जुड़ा प्रसंग आता है जिसमें एकादशी-निर्वाह से पाप-दोष की मुक्ति होती है। परंपरा का सार यह है कि जया एकादशी के व्रत से व्रती के समस्त पाप नष्ट होते हैं तथा उसे जय-पराजय के संघर्ष में विजय प्राप्त होती है। यह एकादशी ब्रह्म-हत्या जैसे गुरुतर पापों के नाश की भी परंपरा रखती है, पद्म पुराण-परंपरा में इसका फल अश्वमेध-यज्ञ के समान बताया गया है। माघ-मास की शुद्ध-संयम परंपरा में जुड़ी यह एकादशी व्रती को साधना-पथ पर विजय-भाव देती है।
व्रत विधि
कैसे रखें
- 1
पूजा सामग्री
व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक आहार लें और देवता का स्मरण करते रहें।
- संभव हो तो उपवास रखें; न हो तो सात्विक भोजन करें।
पारण विधि
पाप-शमन एवं मुक्ति की परंपरा
व्रत कथा
जया एकादशी का महात्म्य पद्म पुराण-परंपरा में वर्णित है। माघ शुक्ल पक्ष की यह एकादशी 'जया' (विजय-दायिनी) के नाम से जानी जाती है। कथा-परंपरा में इसका संबंध स्वर्ग-लोक के ऋतु-पालन से जुड़ा बताया गया है, एक स्वर्गीय गंधर्व-परंपरा से जुड़ा प्रसंग आता है जिसमें एकादशी-निर्वाह से पाप-दोष की मुक्ति होती है। परंपरा का सार यह है कि जया एकादशी के व्रत से व्रती के समस्त पाप नष्ट होते हैं तथा उसे जय-पराजय के संघर्ष में विजय प्राप्त होती है। यह एकादशी ब्रह्म-हत्या जैसे गुरुतर पापों के नाश की भी परंपरा रखती है, पद्म पुराण-परंपरा में इसका फल अश्वमेध-यज्ञ के समान बताया गया है। माघ-मास की शुद्ध-संयम परंपरा में जुड़ी यह एकादशी व्रती को साधना-पथ पर विजय-भाव देती है।
सामान्य प्रश्न
पाप-शमन एवं मुक्ति की परंपरा
